Total Pageviews

Showing posts with label ISRO. Show all posts
Showing posts with label ISRO. Show all posts

Sunday, June 21, 2026

11. Growth Sector India 2026 -Space and Satellite Technology- ISRO-The Indian Space Research Organisation-true spirit of Aatmanirbharta- अंतरिक्ष की उड़ान

 

Growth Sector India 2026 -Space and Satellite Technology

 

अंतरिक्ष की उड़ान


LVM3 M3 / OneWeb India-2 Mission

Ref _ ISRO

ISRO on successful launch of LVM3.

ISRO’s LVM3 launch vehicle, in its sixth consecutive successful flight placed 36 satellites belonging to OneWeb Group Company into their intended 450 km circular orbit with an inclination of 87.4 degrees. With this, NSIL has successfully executed its contract to launch 72 satellites of OneWeb to Low Earth Orbit.

The vehicle took off with a total payload of 5,805 kg at 09:00:20 hours local time from the second launch pad at SDSC-SHAR, Sriharikota. It gained the required altitude of 450 km in about nine minutes of flight, achieved satellite injection conditions in the eighteenth minute, and began injecting the satellites in the twentieth minute. The C25 stage performed a sophisticated maneuver to repeatedly orient itself in orthogonal directions and inject satellites into precise orbits with defined time-gaps to avoid collision of the satellites. 36 satellites were separated in 9 phases, in a batch of 4. OneWeb confirmed the acquisition of signals from all 36 satellites.

This mission marked OneWeb’s second satellite deployment from India, highlighting the strong partnership with NSIL and ISRO. It was OneWeb’s 18th launch bringing the total of OneWeb’s constellation to 618 satellites.


 

Monday, May 11, 2026

भारत का अंतरिक्ष विभाग: उपलब्धियाँ, मील के पत्थर, सफलता की कहानियाँ और भविष्य की योजनाएँ

 

भारत का अंतरिक्ष विभाग: उपलब्धियाँ, मील के पत्थर, सफलता की कहानियाँ और भविष्य की योजनाएँ

परिचय

भारत का अंतरिक्ष विभाग (Department of Space - DoS) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतर्गत कार्य करता है। इसकी स्थापना भारत में वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा अंतरिक्ष कार्यक्रमों को विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी। ISRO ने अपने मिशनों के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में अपनी पहचान बनाई है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत

भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। 1969 में ISRO की स्थापना की गई और 1972 में भारत सरकार ने अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की। 1975 में भारत ने अपना पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ लॉन्च किया, जिसने भारतीय अंतरिक्ष यात्रा की नींव रखी।

उल्लेखनीय उपलब्धियाँ और मील के पत्थर

  1. आर्यभट्ट (1975) - पहला भारतीय उपग्रह

  2. रोहिणी उपग्रह (1980) - स्वदेशी रूप से विकसित प्रक्षेपण प्रणाली के साथ सफल प्रक्षेपण

  3. चंद्रयान-1 (2008) - चंद्रमा पर जल की उपस्थिति की खोज

  4. मंगलयान (2013) - भारत का पहला मार्स मिशन, जो पहली बार में सफल होने वाला दुनिया का पहला मिशन था।

  5. चंद्रयान-2 (2019) - चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग का प्रयास

  6. चंद्रयान-3 (2023) - सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग

  7. गगनयान मिशन - भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन (निर्धारित 2025 के लिए)

महत्वपूर्ण सफलता की कहानियाँ

  • पीएसएलवी (PSLV) की सफलता: इसे ‘वर्कहॉर्स ऑफ इसरो’ कहा जाता है। इसने 50 से अधिक मिशनों में सफलता पाई है।

  • मंगलयान (Mangalyaan) की ऐतिहासिक उपलब्धि: भारत ने 450 करोड़ रुपये की लागत में यह मिशन पूरा किया, जो दुनिया का सबसे सस्ता मार्स मिशन था।

  • नाविक (NavIC) प्रणाली: भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली, जो जीपीएस का स्वदेशी विकल्प है।

वर्तमान में चल रही परियोजनाएँ

  1. गगनयान मिशन - भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन।

  2. आदित्य एल-1 मिशन - सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन।

  3. निसार (NISAR) मिशन - NASA और ISRO का संयुक्त मिशन जो पृथ्वी पर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करेगा।

  4. स्पेस स्टेशन (Indian Space Station) - भारत 2030 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है।

भविष्य की योजनाएँ

  • 2030 तक भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा।

  • चंद्रयान-4 और शुक्रयान मिशन की योजना बनाई जा रही है।

  • सौर मिशन (Solar Mission) को और विकसित किया जाएगा।

  • गगनयान-2 और गगनयान-3 के साथ और अधिक मानवयुक्त मिशन भेजे जाएंगे।

  • भारत अंतरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में भी कदम रख सकता है।

निष्कर्ष

भारत का अंतरिक्ष विभाग विज्ञान और तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ISRO ने न केवल भारत को, बल्कि विश्वभर में अपनी छाप छोड़ी है। इसके भविष्य के मिशन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे।


Thursday, January 30, 2025

इसरो: भारत का गौरव और अंतरिक्ष में नई उड़ान

 

इसरो: भारत का गौरव और अंतरिक्ष में नई उड़ान

प्रस्तावना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान के लिए जाना जाता है। इसरो ने अपने कठिन परिश्रम और समर्पण से भारत को वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है। इस लेख में हम इसरो की उपलब्धियाँ, मील के पत्थर, सफलता की कहानियाँ, और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।


इसरो की स्थापना और इतिहास

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 1969 में डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में की गई थी। उनका सपना था कि भारत आत्मनिर्भर होकर अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी बने।

इसरो की स्थापना से पहले, 1962 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना की गई थी, जिसने भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान की नींव रखी। 1972 में भारत सरकार ने अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की, जिसके अधीन इसरो कार्य करने लगा।

1975 में इसरो ने अपना पहला उपग्रह "आर्यभट्ट" सफलतापूर्वक लॉन्च किया और उसके बाद से सफलता की कई कहानियाँ लिखी गईं। यह उपग्रह सोवियत संघ की मदद से लॉन्च किया गया था और इसने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई दिशा प्रदान की।


इसरो की प्रमुख उपलब्धियाँ

  1. मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन - MOM): भारत का पहला मंगल मिशन, जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था। इस मिशन ने भारत को विश्व में पहला ऐसा देश बना दिया जिसने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में उपग्रह स्थापित कर दिया। इस मिशन की कुल लागत मात्र 450 करोड़ रुपये थी, जो किसी भी अन्य मंगल मिशन से काफी कम थी।

  2. चंद्रयान मिशन: चंद्रयान-1 (2008) और चंद्रयान-2 (2019) ने चंद्रमा पर भारत की स्थिति को मजबूत किया। चंद्रयान-3 (2023) के सफल लैंडिंग से भारत दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना। इन मिशनों के माध्यम से चंद्रमा पर जल अणुओं की उपस्थिति की पुष्टि हुई, जो भविष्य के चंद्र अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  3. गगनयान मिशन: यह भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसे 2024-25 तक लॉन्च करने की योजना है। इसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निम्न कक्षा में भेजे जाएंगे। यह मिशन इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

  4. पीएसएलवी और जीएसएलवी रॉकेट: इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) ने भारत को विश्व स्तर पर विश्वसनीय लॉन्च सेवा प्रदाता बना दिया। पीएसएलवी का उपयोग छोटे और मध्यम श्रेणी के उपग्रहों के लिए किया जाता है, जबकि जीएसएलवी भारी उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित करता है।

  5. नवीक (NavIC): भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम, जो जीपीएस का भारतीय संस्करण है। यह नौवहन और रक्षा क्षेत्रों में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  6. श्रीहरिकोटा से सैकड़ों सफल लॉन्च: इसरो ने अपने प्रक्षेपण केंद्र से सैकड़ों उपग्रहों को कक्षा में सफलतापूर्वक भेजा है, जिसमें कई विदेशी उपग्रह भी शामिल हैं।


इसरो के महत्वपूर्ण मील के पत्थर

  • 1975: पहला भारतीय उपग्रह "आर्यभट्ट" लॉन्च।

  • 1980: रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।

  • 1994: पीएसएलवी रॉकेट की सफलता।

  • 2001: जीएसएलवी का पहला प्रक्षेपण।

  • 2008: चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी की उपस्थिति की पुष्टि की।

  • 2013: मंगलयान का सफल प्रक्षेपण।

  • 2017: एक ही मिशन में 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण (वर्ल्ड रिकॉर्ड)।

  • 2023: चंद्रयान-3 का चंद्रमा पर सफल लैंडिंग।


इसरो की सफलता की कहानियाँ

  • इसरो ने सीमित बजट में उच्चतम तकनीकी उपलब्धियों को हासिल किया।

  • आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए, इसरो ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन विकसित किया।

  • प्राइवेट स्पेस सेक्टर के साथ सहयोग बढ़ाया गया, जिससे स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिला।

  • अंतरराष्ट्रीय उपग्रह लॉन्च सेवाओं में अग्रणी स्थान हासिल किया।

  • विभिन्न विदेशी देशों के उपग्रह प्रक्षेपण कर इसरो ने विश्वसनीयता अर्जित की।


भविष्य की योजनाएँ

  1. गगनयान मिशन: भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी।

  2. आदित्य-एल1 मिशन: सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन। यह मिशन सूर्य की कोरोना परत का अध्ययन करेगा।

  3. चंद्रयान-4: चंद्रमा पर और विस्तृत अनुसंधान की योजना।

  4. शुक्रयान मिशन: शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए एक मिशन।

  5. स्पेस टूरिज्म: भविष्य में भारत में अंतरिक्ष पर्यटन की संभावनाएँ।

  6. अन्य ग्रहों के लिए मिशन: शुक्र और अन्य ग्रहों पर मिशन भेजने की योजना।

  7. डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन: इसरो अब गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


इसरो न केवल भारत के वैज्ञानिक समुदाय बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।