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Thursday, October 22, 2020

Penalty on Employer on non payment of Gratuity or Harassments of employee gratuity settlement.- यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें

उपदान संदाय अधिनियम 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972)

उपदान संदाय अधिनियम को 10 से अधिक कर्मचारियों की किसी भी संस्था संगठन पर आवश्यक रूप से लागू किया है।

Gratuity : नौकरी पेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक द्वारा दी जाती है जिस नियोजक के पास में व्यक्ति नौकरी कर रहा था।


Penalty on Employer on non Payment of Gratuity or Harassments of employee for settlement of Gratuity

अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत कुछ अपराध हैं। उनके दंड भी रखे गए यदि कोई नियोजक इस अधिनियम के अंतर्गत बताए गए उपदान का संदाय करने से बचता है या बचने का प्रयास करता है जब कोई ऐसी विवेचना बनाता है, जिससे वह उपदान का संदाय करने से बच जाए तो यह इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध है इसके लिए 6 माह तक का कारावास रखा गया है।

किसी कर्मचारी को उपदान किए जाने के संबंध में कोई नुकसान पहुंचाया जाए तो ऐसी परिस्थिति में 1 वर्ष तक का कारावास रखा गया है। ऐसा कारावास नियोजक यानी संस्था के कर्ताधर्ता को दिया जाएगा।

Time for Gratuity Settlement by Employer - 30 Days


अधिनियम के अंतर्गत उपदान का संदाय करने हेतु नियोजक को 30 दिन का समय दिया गया है। कर्मचारी जिस दिन से उपदान के संदाय हेतु आवेदन जमा करता है उससे 30 दिन की अवधि के भीतर नियोजक को उपदान का संदाय कर देना चाहिए। यदि वह उपदान का संदाय इस समय अवधि के भीतर नहीं करता है। उसके बाद कुछ समय और लेता है तो ऐसी परिस्थिति में नियोजक को कर्मचारी को एक निश्चित दर से ब्याज देना होगा।


Employee क्या कर सकता हैं  यदि  Employer  Gratuity settlement करने  में  दिक़्क़्क़त  करे 


यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें

स क्षेत्र के भीतर, जहां कंपनी का ऑफिस स्थित है, के पास ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकरण या केंद्रीय श्रम आयुक्त के पास सभी जरूरी कागजात भेजकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए अपने वकील के माध्यम से पूर्व ऑफिस को नोटिस भेजे और श्रम न्यायालयों (Labour Courts) में मुकदमा दर्ज कराये। जिस दिन कर्मचारी ग्रेच्युटी निकालने के लिए आवेदन करता है उस तारिख से 30 दिन के अन्दर उसे भुगतान मिल जाना चाहिए। यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी राशि पर साधारण ब्याज की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा. यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम,1972 (Payment of Gratuity Act,1972) के उल्लंघन का दोषी माना जायेगा जिसमे उसे 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है।

Gratuity की वसूली कैसे  होती  है। 


यदि कर्मचारी द्वारा नियोजक को उपदान के संदाय हेतु आवेदन किया जाता है और नियोजक कर्मचारी को उपदान का संदाय नहीं करता है। ऐसी परिस्थिति में नियोजक की शिकायत यदि नियंत्रक अधिकारी को की जाती है तो वह प्राधिकारी जिले के कलेक्टर को यह प्रमाण पत्र जारी करेगा कि वह भू राजस्व की वसूली की तरह ग्रेज्युटी की रकम को वसूल करें तथा वसूल करके उस रकम को कर्मचारी को प्रदान करे।


सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 (Social Security 2019)  चैप्टर 5 : 

सामाजिक सुरक्षा संहिता में कहा गया है कि कर्मचारी के हर पूर्ण साल की सर्विस पर ग्रैच्युटी 15 दिन की सैलरी पर आधारित होती है. हर पूरे साल या 6 महीने से ज्यादा के समय के लिए कर्मचारी को ग्रेच्युटी 15 दिन की सैलरी की दर पर या केंद्र सरकार के किसी नोटिफिकेशन में तय किए गए दिनों के आधार पर मिलेगी.

ग्रेच्युटी कब मिलती है? : 1. सेवानिवृत्ति होने पर 2. दुर्घटना या बीमारी की वजह से मौत या अपंगता के कारण 3. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर 4. छंटनी होने पर 5. इस्तीफ़ा देने पर 6. नौकरी से निकाल दिया जाने पर।

ग्रेच्युटी लेने के लिए कौन सा फॉर्म भरना होता है? : कंपनी को ज्वाइन करते वक़्त कर्मचारी को फॉर्म “F” भर कर उसमे अपने घर के किसी भी सदस्य को नॉमिनी बनाना होता है। यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी है कि यदि कंपनी घाटे में चल रही हो तो भी उसे ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करना होगा। 

Calculation of Gratuity

15 X {(Basic Salary+ DA+ Sales Commission) X duration of work (in years)  } / 26

15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) भाग 26 यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन है।

Maximum Amount of Gratuity

2018 में के संशोधन के बाद इस सीमा को बढ़ाकर ₹2000000 कर दिया गया है अब मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक ₹2000000 तक ग्रेच्युटी की रकम हो सकती है।

कौन   सी कंपनी Gratuity  देने के लिए  वचनबद्ध होनी चाहिए। 

नियोजक जिनमें कर्मचारियों की संख्या 10 से अधिक है, वह इस अधिनियम के अधीन नियोजक कहलाएंगे।

10 कर्मचारियों से अधिक काम करने वाली संस्थाएं इस अधिनियम के अंतर्गत शासित होगी तथा उन्हें अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की धनराशि देना होगी।

कारखाने, खदान, बागान, दुकान और वह सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्था जो केंद्रीय राज्य सरकारों तथा लोकल अथॉरिटी आदि। 

ग्रेच्युटी पर कितना कर लगता है? : निजी कर्मचारियों को जब ग्रेच्युटी उनके नौकरी करते समय (रिटायरमेंट के पहले तक) मिलती है, तो उनकी ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है क्योंकि यह उनके वेतन के अंतर्गत आता है लेकिन सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी उनकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु या पेंशन के तौर मिलती है और उस पर टैक्स भी नहीं लगता है। श्रम मंत्रालय के नये नियमों के अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपए तक के कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र होंगे इससे पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी।

1961 की सेवा नियमावली में ग्रेच्युटी रोकने का कोई उपबन्ध नहीं है. 

आपराधिक मुकदमा चल रहा हो तो रोकी जा सकती है ग्रेच्युटी: HC

विधिविरुद्ध गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में याची को मिलने वाली ग्रेच्युटी इसी आधार पर रोक दी गयी। 

Reference: https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/allahabad-allahabad-high-court-says-gratuity-can-be-stopped-if-criminal-prosecution-against-person-1122976.html

Thursday, October 15, 2020

औद्योगिक टाउनशिप

Rural Development


Rural Development


नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन




इस मिशन में नागरिकों का एक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें उनका हेल्थ रिकार्ड यानी उनकी सेहत और बीमारी से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें देखा जा सके। इस तरह विकसित होने वाले डिजिटल इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की मदद से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इसमें भारतीय नागरिकों, स्वास्थ्य पेशेवरों, सार्वजनिक अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के संस्थानों के बीच सेहत की जांच, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाला एक पुख्ता नेटवर्क बन सकेगा। इससे लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता आ सकती है और बीमारियों के त्वरित एवं सटीक इलाज की व्यवस्था बन सकती है।

पुरानी बीमारियों के इलाज का रिकार्ड मौजूद नहीं होने पर कई बार गलत इलाज की चपेट में भी आ जाते हैं। ऐसे में मर्ज से बड़ी समस्या उसके निदान की प्रक्रिया हो जाती है। यह तथ्य भी कई बार सामने आ चुके हैं कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बीमारियों के इलाज में ही गरीब हुआ जा रहा है, क्योंकि अक्सर उन्हें यही नहीं पता चलता है कि आखिर उन्हें हुआ क्या है? किस बीमारी का क्या इलाज है और कहां इलाज हो सकता है? इसकी जानकारी नहीं होने पर मरीज गलत हाथों में पड़ जाते हैं। ऐसे में सही इलाज की पहली सीढ़ी मरीज और उसके तीमारदार को इसकी जानकारी मिलना है कि आखिर बीमारी क्या है या मरीज को इससे पहले क्या मर्ज था और उसका क्या इलाज था?

डाटा से आएगी नई क्रांति : आमतौर पर ऐसे सारे रिकार्ड रखने की जिम्मेदारी व्यक्तिगत मानी जाती है, लेकिन सरकार के स्तर पर महसूस किया गया कि अगर लोगों की बीमारियों का कोई डाटाबेस तैयार हो सके और संबंधित जानकारियों को एक डिजिटल कार्ड में समाहित किया जा सके तो इस क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है। भारत ऐसी व्यवस्था करने वाला दुनिया का पहला देश नहीं है, बल्कि कई अन्य देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है। जैसे ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में डिजिटल हेल्थ रिकार्ड की व्यवस्था और अमेरिका में कायम नेशनल हेल्थ सíवस आदि का इस संबंध में अध्ययन किया गया। उल्लेखनीय है कि डिजिटल हेल्थ कार्ड जैसी योजना की प्रेरणा के पीछे एक भूमिका प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना की है। तीन साल पहले 25 सितंबर, 2018 को देश के 25 राज्यों में औपचारिक रूप से आयुष्मान योजना को जब लागू किया गया तो यह उम्मीद जगी थी कि अब देश के वंचित, उपेक्षित और गरीब लोगों को बीमारियों के इलाज में कोई समस्या नहीं होगी।

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत पिछले साल अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप में हुई थी, लेकिन अब पूरे देश में इसे लागू किया जा रहा है।
हमारे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत ही लचर हालत में हैं। यहां सरकारी चिकित्सा सेवाओं में अक्सर लापरवाही, संसाधनों का दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार देखा जाता है। निजी क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं के मानक तय नहीं हैं। निजी अस्पताल जांच, टेस्ट, इलाज और दवाओं आदि के नाम पर अनाप-शनाप रकम वसूलते हैं। इसलिए डिजिटल हेल्थ कार्ड और नेशनल डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से तमाम अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद की जा रही है,

जहां तक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से जुड़े यूनिक हेल्थ कार्ड की बात है तो अभी इसके कई फायदे एक साथ दिख रहे हैं। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक बार बीमारी की कोई जांच हो जाने और उसका इलाज शुरू हो जाने के बाद देश में कहीं भी जाने पर कोई जांच रिपोर्ट, डाक्टर की पर्ची, बीमारी के पुराने रिकार्ड आदि संभाल कर रखने और ले जाने की जरूरत नहीं होगी। ये सभी सूचनाएं हेल्थ कार्ड में दर्ज होंगी और चिकित्सक किसी मरीज की आइडी से जान जाएंगे कि मरीज पहले किन बीमारियों की चपेट में रहा है और उसका किस स्तर पर कहां एवं कितना इलाज हुआ है। आधार कार्ड या मोबाइल नंबर के माध्यम से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की वेबसाइट पर हेल्थ आइडी शीर्षक के तहत सभी जानकारियां देकर यह कार्ड बनाया जा सकता है और इससे जुड़ी सुविधाओं का लाभ उठया जा सकता है।

हेल्थ कार्ड या आइडी के माध्यम से लोग किसी भी राज्य में अस्पतालों, पैथ लैब और फार्मा कंपनियों में अपनी सेहत से जुड़ी जानकारियां अपनी मर्जी के हिसाब से ले सकेंगे। यानी इनमें कोई बाहरी व्यक्ति उनकी मंजूरी के बिना दखल नहीं दे सकेगा। हेल्थ कार्ड इस योजना का एक छोटा, किंतु सुविधापूर्ण हिस्सा है। इस योजना के फायदों को समझना हो तो इसे समग्रता में देखना होगा। असल में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत देश में जो डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा, उससे आम नागरिकों के अलावा स्वास्थ्य पेशेवरों, सरकारी और निजी क्षेत्र के अस्पतालों-संगठनों आदि के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अर्जति करना और उनकी निगरानी करना आसान हो जाएगा। मोटे तौर पर यह योजना चार महत्वपूर्ण हिस्सों में विभाजित की जाएगी। इसमें पहले चरण पर नागरिकों का डिजिटल हेल्थ कार्ड (आइडी) बनाया जाएगा। इसके बाद एक बड़ी भूमिका डिजिटल डाक्टर, स्वास्थ्य सुविधा पहचानकर्ता और निजी स्वास्थ्य रिकार्ड की रहेगी।

इस मिशन में देश के प्रत्येक डाक्टर को डिजिटल डाक्टर के रूप में एक विशेष पहचानपत्र भी दिया जाएगा, जो उनके मौजूदा पंजीकरण संख्या से अलग होगा। ये डाक्टर डिजिटल हस्ताक्षर कर सकेंगे, जिससे मरीजों को दूर बैठे इलाज का पर्चा लिख सकेंगे। इसके अलावा योजना में हर किस्म की स्वास्थ्य सुविधा को एक संख्या देकर विशेष इलेक्ट्रानिक पहचान दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर मलेरिया बुखार को एम-15 कहा जा सकता है तो देश के किसी भी कोने में बैठा डाक्टर समझ सकेगा कि मरीज को असल में क्या बीमारी अतीत में हो चुकी है। केंद्रीय सर्वर से जुड़े रहने के कारण मरीज, डाक्टर, अन्य स्वास्थ्यकर्मी, अस्पताल और सरकार तक व्यक्ति की मंजूरी के साथ जरूरी जानकारियां जुटा सकेंगे और नागरिकों को स्वस्थ रखने के मिशन को साकार किया जा सकेगा।

आयुष्मान भारत अभियान का यह डिजिटल मिशल असल में अस्पताली प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

Refernce: PIB, Jagaran

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 2015

नागरिको की खुशहाली।

नागरिक अस्पताल

दुनिया विचार से बदलती है। चीजो से नही।

दुनिया का देश पर विश्वास


सांसद आदर्श ग्राम योजना 2014

शिक्षकों को सम्मानजनक वेतनमान एवं सेवा शर्तों पर नियुक्ति।

शिक्षकों के लिए ऊच्च सन्मान ओर शिक्षा के पेशे को ऊच्च दर्जा।
टैक्स में स्पेशल छूट।


Tuesday, October 13, 2020

हर घर बिजली 2015

जनधन योजना 2014 में शुरू

40 करोड़ से ज्यादा लोगो के खाते खोले गए।
योजनाओं का पैसा सीधे लोगो के खाते में भेजा जा रहा है।

खुशहाल और श्रेष्ठ जीवन

Optic fiber link for 6 lakhs Village Target-2023

जन आरोग्य योजना 2018

10 करोड़ परिवारों को 5 लाख तक इलाज सुविधा।

भारत की बुलंदी




 भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुये हैं।

 भारत के लिए आस्था का मतलब है- उमंग, उत्साह, और उल्लास और मानवता पर विश्वास: PM @narendramodi

यही समय है, सही समय है,
भारत का अनमोल समय है।
असंख्य भुजाओं की शक्ति है,
हर तरफ़ देश की भक्ति है,
तुम उठो तिरंगा लहरा दो,
भारत के भाग्य को फहरा दो
यही समय है, सही समय है, 
भारत का अनमोल समय है।
कुछ ऐसा नहीं जो कर ना सको,
कुछ ऐसा नहीं जो पा ना सको,
तुम उठ जाओ, तुम जुट जाओ,
सामर्थ्य को अपने पहचानो,
कर्तव्य को अपने सब जानो,
भारत का ये अनमोल समय है,
यही समय है, सही समय है: PM @narendramodi

अटल पेंशन योजना 2015

किसानों की आय दुगनी 2017

E-NAM
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना

तर्क किए बिना किसी बात को आँख बंद के मान लेना भी एक प्रकार की ग़ुलामी है #BhagatSingh

लिखूं आज या कलम तोड़ दूं दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं.


लिखूं आज या कलम तोड़ दूं
दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं....

#BEWITHBETI 
#Justice
#BetiBachao

बहन- बेटी सबकी एक समान होती हैं 🤷

बहन- बेटियों की इज्जत का कोई जाती-धर्म नहीं होता है!

बहन-बेटियों की जान गरीब-अमीर नहीं होती है!

इसलिये बहन #ManishaValmiki के अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिये आवाज़ उठाना हम सब देशवासियो का कर्तव्य है!

फ़ास्ट ट्रेक में कड़ी से कड़ी सजा हो!

अगर बेटी का दुख केवल बेटी का माँ ही समझती है  #मनिषा किसी दौलतमंद की औलाद नही थी लेकिन इज़्ज़त से जीने का हक भी खत्म है क्या लोकतंत्र में अब?
संवेदनायें क्यों शून्य हैं बेटियों पर अत्याचार हों तो?

“क्या कारण है कि माँ बेटी सलामत नहीं है? शाम को अकेली घर से बाहर निकल नहीं पाती है क्या कारण है? 8-9वीं की बच्चियां स्कूल जाती है तो सिरफिरे लड़के रास्ते में ऐसी भद्दी टोका टोकी करते हैं वे स्कूल जाने से डरती हैं”


अपने बच्चों को अच्छे #संस्कार दो प्लीज 🙏
कोशिश करो कि हमारे बच्चों के #विचार अच्छे रहे ।
कोशिश करो कि उनके आचरण #अच्छे रहे ।


Our laws & their enforcement must be so strict that the mere thought of punishment makes rapists shudder with fear!Hang the culprits.Raise ur voice to safeguard daughters & sisters-its the least we can do



भारत की आत्मा गाँवो में बसती है।

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....


मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह देखा जाता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी जाति का असर बना रहता है और उसका अंतिम संस्कार उसकी जाति के अनुसार ही होता है। यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो भारतीय समाज में बनी हुई है।

हर जाति के लिए अलग-अलग शमशान घाट होता है, जो उस जाति की परंपरागत धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। यह एक रूपरेखा है जो मनुष्य की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसे आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।

भारतीय समाज में, जातिवाद और जाति से जुड़े विवाद चिरपिंड हैं, और इसका असर मौत के बाद भी बना रहता है। मृत्यु के पश्चात मानव शरीर को जलाकर उसकी आत्मा को मोक्ष की दिशा में भटकने के लिए इस परंपरागत प्रथा का अनुसरण किया जाता है। इसमें जाति के अनुसार विभिन्न क्रियाएँ होती हैं और शमशान घाट का चयन भी उसी तरह के धार्मिक और सामाजिक आधारों पर होता है।

विभिन्न शमशान घाटों का अस्तित्व मनुष्य के जीवन में धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां मृत्यु होने पर आत्मा को शांति प्रदान करने का कार्य होता है और यह श्राद्ध, पिंडदान, और अन्य धार्मिक आचरणों के माध्यम से किया जाता है।

हर जाति का अपना शमशान घाट एक विशेष भौगोलिक स्थान पर स्थित होता है और यहां जाति के अनुसार मृत्यु हुई व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रक्रिया में विभिन्न सम्प्रदायों और जातियों के बीच छिपे विवादों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह भारतीय समाज के एक अभिन्न हिस्से का हिस्सा है और यह उसकी रिच धारों का परिचय कराता है।

इस प्रकार, मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है और यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो समृद्धि और संस्कृति को बनाए रखने में मदद करता है। यह एक दृष्टिकोण है जो भारतीय समाज के गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को समझने में मदद करता है और इसे एक अद्भुत और विविध समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का एक माध्यम प्रदान करता है।