Total Pageviews

Monday, February 23, 2026

44. Infrastructure Development- Growth Sector India 2026- Electrification of 100% of rail routes by 2030

 

Infrastructure Development

Transportation and Connectivity

  • Highway Development:
    • National Infrastructure Pipeline (NIP): $1.4 trillion investment in highways and railways.
    • Bharatmala Project: Construction of 34,800 km of highways.
  • Railways:
    • Electrification of 100% of rail routes by 2030.
    • Semi-high-speed rail projects like Vande Bharat trains.

Waterways and River Linking

  • Initiatives:
    • Inland Waterways: 23 operational routes by 2026.
    • Ken-Betwa River Linking Project: Addresses irrigation for 1.08 million hectares.
  • Projections:
    • Logistics cost reduction by 4-5%.
    • Contribution to GDP: Transportation ~10%, waterways ~1.5%.

43. Growth Sector India 2026_ शक्ति माइक्रोप्रोसेसर: भारत का स्वदेशी नवाचार- शक्ति प्रोसेसर का 10 ट्रिलियन डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में योगदान और अगले 2 वर्षों में जीडीपी में भूमिका

 

शक्ति प्रोसेसर का 10 ट्रिलियन डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में योगदान और अगले 2 वर्षों में जीडीपी में भूमिका

भारत ने 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में तकनीकी नवाचारों और स्वदेशी विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इनमें से एक प्रमुख पहल है शक्ति प्रोसेसर परियोजना, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित उच्च प्रदर्शन वाला माइक्रोप्रोसेसर है। यह लेख शक्ति प्रोसेसर के विकास, उसकी तकनीकी विशेषताओं, और उसके भारतीय अर्थव्यवस्था व जीडीपी में संभावित योगदान पर प्रकाश डालता है।

 

भारतीय अर्थव्यवस्था पर शक्ति प्रोसेसर का प्रभाव

  1. तकनीकी आत्मनिर्भरता: शक्ति प्रोसेसर जैसी परियोजनाएँ भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करती हैं। इससे न केवल विदेशी प्रोसेसर पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में नई तकनीकी कंपनियों के उभरने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

  2. नौकरी के अवसर: स्वदेशी प्रोसेसर के विकास और उत्पादन से हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उद्योग में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह कुशल पेशेवरों के लिए न केवल प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करेगा, बल्कि स्टार्टअप्स और उद्यमिता को भी बढ़ावा देगा।

  3. उद्योगों में नवाचार: शक्ति प्रोसेसर के माध्यम से भारत के विभिन्न उद्योग, जैसे कि आईटी, रक्षा, ऑटोमोबाइल, और टेलीकॉम, में नवाचार की गति तेज होगी। यह स्मार्ट सिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में भी क्रांति ला सकता है।

  4. आयात पर निर्भरता में कमी: स्वदेशी प्रोसेसर के उत्पादन से भारत के आयात बिल में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

  5. निर्यात में वृद्धि: शक्ति प्रोसेसर को वैश्विक बाजार में निर्यात करने की संभावना भी है। इससे भारत के तकनीकी उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होगी, जो कि जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

शक्ति प्रोसेसर और जीडीपी में योगदान

शक्ति प्रोसेसर के माध्यम से भारत की जीडीपी में वृद्धि के कई रास्ते खुल सकते हैं:

  1. आईटी और हार्डवेयर उद्योग का विस्तार: भारत का आईटी उद्योग पहले से ही वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्थान रखता है। शक्ति प्रोसेसर के कारण हार्डवेयर निर्माण में वृद्धि होगी, जिससे जीडीपी में प्रत्यक्ष योगदान मिलेगा।

  2. नवाचार और स्टार्टअप्स: प्रोसेसर की ओपन-सोर्स प्रकृति नए स्टार्टअप्स के लिए अवसर प्रदान करेगी, जो नवाचार को बढ़ावा देंगे और आर्थिक गतिविधियों को गति देंगे।

  3. रक्षा और सरकारी परियोजनाएँ: रक्षा और संवेदनशील सरकारी परियोजनाओं में शक्ति प्रोसेसर का उपयोग स्वदेशी समाधानों को अपनाने में मदद करेगा, जिससे सरकारी खर्च में कटौती होगी और आर्थिक दक्षता बढ़ेगी।

  4. ग्रामीण और शहरी विकास: स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी में शक्ति प्रोसेसर के अनुप्रयोग से तकनीकी विकास होगा, जो समग्र आर्थिक विकास में सहायक होगा।

अगले 2 वर्षों में अपेक्षित प्रभाव

अगले 2 वर्षों में शक्ति प्रोसेसर का प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों में देखने को मिलेगा:

  1. तेजी से उत्पादन और तैनाती: सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से शक्ति प्रोसेसर का बड़े पैमाने पर उत्पादन और विभिन्न उद्योगों में तैनाती होगी।

  2. नए व्यवसाय और स्टार्टअप्स: प्रोसेसर आधारित उत्पादों और सेवाओं के लिए नए स्टार्टअप्स उभरेंगे, जो भारतीय तकनीकी परिदृश्य को और अधिक समृद्ध करेंगे।

  3. शिक्षा और अनुसंधान: उच्च शिक्षा संस्थानों में शक्ति प्रोसेसर पर आधारित अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नई तकनीकों का विकास संभव होगा।

  4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निर्यात: शक्ति प्रोसेसर की वैश्विक स्वीकृति से भारत को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे।

 

शक्ति प्रोसेसर परियोजना न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को 10 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से भारत के आईटी, रक्षा, और निर्माण उद्योगों में नवाचार और विकास को गति मिलेगी, जिससे जीडीपी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में योगदान होगा। अगले 2 वर्षों में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखने लगेंगे, जो भारत को एक वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर करेंगे।

1. परिचय

माइक्रोप्रोसेसर क्या है?

माइक्रोप्रोसेसर एक एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit) होता है, जिसमें कंप्यूटर के केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (CPU) की सभी कार्यक्षमताएँ समाहित होती हैं। यह कंप्यूटर के मस्तिष्क के रूप में कार्य करता है, जो सभी प्रकार की गणनाएँ, डेटा प्रोसेसिंग, और नियंत्रण कार्यों को संभालता है। माइक्रोप्रोसेसर के बिना किसी भी डिजिटल डिवाइस की कल्पना करना असंभव है।

माइक्रोप्रोसेसर का इतिहास 1971 में इंटेल 4004 के साथ शुरू हुआ, जो पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध माइक्रोप्रोसेसर था। इसके बाद, तकनीकी क्षेत्र में निरंतर प्रगति के साथ माइक्रोप्रोसेसर ने कंप्यूटिंग की दुनिया में क्रांति ला दी। आज माइक्रोप्रोसेसर न केवल कंप्यूटरों में बल्कि स्मार्टफोन, वाहनों, घरेलू उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों और यहाँ तक कि सैन्य प्रणालियों में भी अनिवार्य हो गए हैं।

भारत में माइक्रोप्रोसेसर विकास की आवश्यकता

तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता किसी भी राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विशाल और विविध देश के लिए, जो तेजी से डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में प्रगति कर रहा है, माइक्रोप्रोसेसर विकास में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नवाचार के लिए आवश्यक है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेशी माइक्रोप्रोसेसरों पर निर्भरता डेटा सुरक्षा और साइबर हमलों के जोखिम को बढ़ा देती है। रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए स्वदेशी प्रोसेसर विकसित करना आवश्यक है ताकि डेटा गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके।

  • आर्थिक लाभ: माइक्रोप्रोसेसर जैसे उच्च तकनीकी उत्पादों का आयात महंगा होता है। स्वदेशी निर्माण से लागत कम होती है और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलता है। इससे रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।

  • तकनीकी नवाचार: स्वदेशी प्रोसेसर विकास से भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को नवाचार करने का अवसर मिलता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमताएँ बढ़ती हैं।

शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना का परिचय

शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकास प्रयास है, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT Madras) के Reconfigurable Intelligent Systems Engineering (RISE) समूह द्वारा विकसित किया गया है। यह परियोजना भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से शुरू की गई थी। शक्ति प्रोसेसर का उद्देश्य न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है, बल्कि सुरक्षित, विश्वसनीय, और किफायती प्रोसेसर प्रदान करना भी है, जो भारत के रक्षा, अंतरिक्ष, और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

शक्ति माइक्रोप्रोसेसर को RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित डिज़ाइन किया गया है, जो एक ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर है। यह डिज़ाइन प्रोसेसर को कस्टमाइज करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिससे विशेष अनुप्रयोगों के लिए इसे अनुकूलित किया जा सकता है।

परियोजना के मुख्य उद्देश्य:

  1. स्वदेशी प्रोसेसर का विकास: विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और भारत में माइक्रोप्रोसेसर निर्माण को बढ़ावा देना।

  2. सुरक्षा और गोपनीयता: हार्डवेयर स्तर पर डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना।

  3. आर्थिक विकास: घरेलू उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर सृजित करना।

  4. तकनीकी नवाचार: भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को नवीन तकनीक विकसित करने का अवसर प्रदान करना।

    2. शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का इतिहास और विकास

    परियोजना की शुरुआत और उद्देश्य

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब भारत सरकार ने तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्वदेशी प्रोसेसर विकास की आवश्यकता को पहचाना। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा प्रोसेसर विकसित करना था जो विदेशी विकल्पों पर निर्भरता को कम करे और रक्षा, अंतरिक्ष, और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करे।

    IIT मद्रास का योगदान

    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT Madras) के Reconfigurable Intelligent Systems Engineering (RISE) समूह ने इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस समूह का नेतृत्व प्रोफेसर कामकुमार कर रहे थे, जिनकी विशेषज्ञता और दूरदर्शिता ने परियोजना को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। IIT मद्रास ने न केवल तकनीकी डिज़ाइन और विकास में योगदान दिया, बल्कि अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से शक्ति प्रोसेसर को एक प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने में भी मदद की।

    MeitY का सहयोग और फंडिंग

    इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस परियोजना को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की। MeitY की फंडिंग ने शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के विकास को संभव बनाया, जिससे अनुसंधान, डिज़ाइन, और उत्पादन के विभिन्न चरणों में निरंतर प्रगति हुई। यह सहयोग भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' पहलों के तहत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

    विकास की प्रमुख उपलब्धियाँ

  5. 2015: शक्ति परियोजना के तहत पहले प्रोसेसर डिज़ाइन का सफल परीक्षण।

  6. 2016: E-Class प्रोसेसर का विकास, जिसे IoT और एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए डिज़ाइन किया गया।

  7. 2018: I-Class प्रोसेसर का अनावरण, जो उच्च प्रदर्शन और सुरक्षा के लिए जाना जाता है।

  8. 2020: शक्ति प्रोसेसर का बड़े पैमाने पर उत्पादन और विभिन्न अनुप्रयोगों में उपयोग शुरू हुआ।

 

3. शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के प्रकार

(लगभग 1000 शब्द)

  • E-Class (Embedded Class)
    • कम शक्ति खपत वाले अनुप्रयोग
    • IoT डिवाइसेस में उपयोग
  • C-Class (Controller Class)
    • मिड-रेंज एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए
    • स्मार्टफोन और टैबलेट के लिए संभावनाएँ
  • I-Class (Infrastructure Class)
    • उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और सर्वर उपयोग
    • रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग
  • अन्य संस्करण
    • M-Class, S-Class, और H-Class के बारे में विवरण

शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के प्रकार और उनके अनुप्रयोग

शक्ति परियोजना के तहत विभिन्न प्रकार के प्रोसेसर विकसित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक को विशेष अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है:

  1. E-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: IoT डिवाइस, स्मार्ट सेंसर, और एम्बेडेड सिस्टम।

    • विशेषताएँ: कम पावर खपत, कॉम्पैक्ट डिज़ाइन, और उच्च दक्षता।

  2. C-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और डेस्कटॉप कंप्यूटर।

    • विशेषताएँ: मध्यम प्रदर्शन और बहु-कार्य क्षमता।

  3. I-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: डेटा केंद्र, सर्वर, और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC)।

    • विशेषताएँ: उच्च गति, उन्नत सुरक्षा, और बड़ी डेटा प्रोसेसिंग क्षमता।

  4. M-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: रक्षा और सैन्य अनुप्रयोग।

    • विशेषताएँ: मजबूत सुरक्षा उपाय और चरम परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता।

  5. S-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: मोबाइल डिवाइस और स्मार्टफोन।

    • विशेषताएँ: ऊर्जा कुशल और उच्च प्रदर्शन।

  6. H-Class प्रोसेसर:

    • उपयोग: उच्च प्रदर्शन वाले कंप्यूटर और विशेष वैज्ञानिक अनुप्रयोग।

    • विशेषताएँ: चरम प्रदर्शन और अनुकूलन क्षमता।

      शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के प्रकार

      शक्ति माइक्रोप्रोसेसर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास द्वारा विकसित एक ओपन-सोर्स माइक्रोप्रोसेसर परियोजना है। यह विभिन्न श्रेणियों में विभाजित है, जो विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों और आवश्यकताओं के अनुसार डिज़ाइन किए गए हैं। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं:

      1. E-Class (Embedded Class)

      E-Class माइक्रोप्रोसेसर कम शक्ति खपत वाले अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इन प्रोसेसरों को विशेष रूप से छोटे, एम्बेडेड डिवाइसेस के लिए विकसित किया गया है, जो न्यूनतम ऊर्जा खपत के साथ प्रभावी प्रदर्शन प्रदान करते हैं।

    • कम शक्ति खपत वाले अनुप्रयोग:
      E-Class प्रोसेसरों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी कम बिजली खपत क्षमता है। इन्हें बैटरी-चालित उपकरणों में उपयोग करने के लिए अनुकूलित किया गया है, जिससे उपकरणों की बैटरी लाइफ बढ़ती है।

    • IoT डिवाइसेस में उपयोग:
      इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेस के लिए E-Class प्रोसेसर आदर्श हैं। स्मार्ट घरेलू उपकरण, वियरेबल टेक्नोलॉजी, और ऑटोमेशन सिस्टम में इनका व्यापक उपयोग होता है।

    2. C-Class (Controller Class)

    C-Class माइक्रोप्रोसेसर मिड-रेंज एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये प्रोसेसर उन अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हैं जहां मध्यम स्तर के कंप्यूटेशनल पावर और ऊर्जा दक्षता की आवश्यकता होती है।

  7. मिड-रेंज एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए:
    C-Class प्रोसेसर औद्योगिक ऑटोमेशन, चिकित्सा उपकरण, और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं। ये प्रोसेसर जटिल नियंत्रक कार्यों के लिए उपयुक्त हैं।

  8. स्मार्टफोन और टैबलेट के लिए संभावनाएँ:
    जबकि वर्तमान में C-Class प्रोसेसर मुख्य रूप से एम्बेडेड सिस्टम्स में उपयोग किए जाते हैं, भविष्य में इन्हें स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे उपकरणों के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे भारतीय तकनीकी उद्योग में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

3. I-Class (Infrastructure Class)

I-Class माइक्रोप्रोसेसर उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और सर्वर अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इन प्रोसेसरों का उपयोग उन स्थानों पर होता है जहां बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और तेज गणनात्मक गति की आवश्यकता होती है।

  • उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और सर्वर उपयोग:
    I-Class प्रोसेसर डेटा सेंटर्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) सिस्टम्स में उपयोग किए जाते हैं। इनकी उच्च प्रसंस्करण क्षमता और मल्टी-कोर आर्किटेक्चर इन्हें बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

  • रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग:
    I-Class प्रोसेसरों का उपयोग रक्षा प्रणालियों, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम्स, और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी किया जाता है। इन प्रोसेसरों की विश्वसनीयता और प्रदर्शन इन्हें इन क्षेत्रों के लिए आदर्श बनाते हैं।

अन्य संस्करण

शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना के अंतर्गत कई अन्य वर्ग भी विकसित किए गए हैं, जो विशेष प्रकार के अनुप्रयोगों के लिए अनुकूलित हैं।

  • M-Class:
    M-Class प्रोसेसर माइक्रोकंट्रोलर आधारित अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये प्रोसेसर सरल नियंत्रण कार्यों के लिए उपयुक्त हैं, जैसे कि घरेलू उपकरणों में स्वचालन, छोटे रोबोटिक्स प्रोजेक्ट्स, और अन्य एम्बेडेड सिस्टम्स।

  • S-Class:
    S-Class प्रोसेसर सुरक्षा-केंद्रित अनुप्रयोगों के लिए विकसित किए गए हैं। इनका उपयोग क्रिप्टोग्राफी, सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन, और अन्य सुरक्षा-संबंधित कार्यों में होता है। S-Class प्रोसेसर विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं जहां डेटा सुरक्षा और गोपनीयता महत्वपूर्ण होती है।

  • H-Class:
    H-Class प्रोसेसर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो विशेष रूप से सुपरकंप्यूटिंग अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं। इन प्रोसेसरों की गणना शक्ति और मल्टी-थ्रेडिंग क्षमताएं इन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान और जटिल गणनाओं के लिए आदर्श बनाती हैं।


शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके विभिन्न वर्ग विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हैं, जो न केवल घरेलू उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। E-Class से लेकर H-Class तक, शक्ति प्रोसेसर भारतीय प्रौद्योगिकी के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


    •  



      शक्ति माइक्रोप्रोसेसर की तकनीकी विशेषताएँ और लाभ
      तकनीकी विशेषताएँ

      शक्ति माइक्रोप्रोसेसर को विकसित करते समय आधुनिक तकनीकी मानकों और अनुप्रयोगों की विविध आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। इसकी कुछ प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

    RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित: यह ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर प्रोसेसर को कस्टमाइज करने की स्वतंत्रता देता है, जिससे विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन संभव होता है।

    सुरक्षा विशेषताएँ: शक्ति प्रोसेसर में उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ अंतर्निहित हैं, जैसे हार्डवेयर स्तर पर डेटा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित बूट और साइबर हमलों के खिलाफ सुरक्षा।

    ऊर्जा दक्षता: शक्ति प्रोसेसर को कम ऊर्जा खपत के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह IoT और मोबाइल डिवाइस के लिए आदर्श बनता है।

    मॉड्यूलर डिज़ाइन: इसका मॉड्यूलर डिज़ाइन विभिन्न हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन की सुविधा प्रदान करता है।

    उच्च प्रदर्शन क्षमता: शक्ति प्रोसेसर उच्च गति से डेटा प्रोसेसिंग करने में सक्षम है, जिससे यह डेटा केंद्रों और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के लिए उपयुक्त है।

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के लाभ

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना के कई लाभ हैं, जो न केवल तकनीकी बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं:

  1. तकनीकी आत्मनिर्भरता: शक्ति प्रोसेसर भारत को विदेशी प्रोसेसर पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है।

  2. आर्थिक सशक्तिकरण: स्वदेशी प्रोसेसर का विकास घरेलू उद्योगों और स्टार्टअप्स को सशक्त बनाता है, जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।

  3. नवाचार को बढ़ावा: भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को नवाचार करने का अवसर मिलता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमताएँ बढ़ती हैं।

  4. राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्वदेशी प्रोसेसर का उपयोग डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करता है।

  5. वैश्विक प्रतिस्पर्धा: शक्ति माइक्रोप्रोसेसर भारत को वैश्विक तकनीकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाता है, जिससे देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ती है।

 

4. तकनीकी विशेषताएँ

  • प्रोसेसर आर्किटेक्चर (RISC-V आधारित डिजाइन)
    • RISC (Reduced Instruction Set Computing) क्या है?
    • RISC-V आर्किटेक्चर का महत्व और ओपन-सोर्स विशेषताएँ
    • शक्ति प्रोसेसर का RISC-V के साथ समाकलन
  • प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा विशेषताएँ
    • प्रोसेसर की गति और प्रदर्शन मानक
    • कम ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय लाभ
    • सुरक्षा विशेषताएँ: हार्डवेयर स्तर पर डेटा सुरक्षा
  • ओपन-सोर्स हार्डवेयर की भूमिका
    • ओपन-सोर्स के फायदे (लागत में कमी, स्वतंत्रता)
    • विश्व स्तर पर ओपन-सोर्स हार्डवेयर का चलन

    प्रोसेसर आर्किटेक्चर (RISC-V आधारित डिजाइन)

    RISC (Reduced Instruction Set Computing) क्या है?

    RISC, या Reduced Instruction Set Computing, एक प्रोसेसर आर्किटेक्चर डिज़ाइन पद्धति है जो प्रोसेसर के इंस्ट्रक्शन सेट को सरल और कुशल बनाने पर केंद्रित है। पारंपरिक कंप्यूटर आर्किटेक्चर में, CISC (Complex Instruction Set Computing) का उपयोग किया जाता था, जिसमें जटिल और बहु-चरणीय इंस्ट्रक्शन होते थे। RISC का उद्देश्य इन इंस्ट्रक्शनों को सरल बनाना है ताकि प्रत्येक इंस्ट्रक्शन को एक ही क्लॉक साइकिल में निष्पादित किया जा सके। इससे प्रोसेसर की गति बढ़ती है और ऊर्जा खपत कम होती है।

    RISC प्रोसेसर के मुख्य लाभों में तेज प्रोसेसिंग स्पीड, कम ऊर्जा खपत, और सरलता के कारण विकास में आसानी शामिल है। यह आर्किटेक्चर विशेष रूप से एम्बेडेड सिस्टम, मोबाइल डिवाइस, और अन्य लो-पावर अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है।

    RISC-V आर्किटेक्चर का महत्व और ओपन-सोर्स विशेषताएँ

    RISC-V एक आधुनिक RISC आर्किटेक्चर है, जिसे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले द्वारा विकसित किया गया था। यह एक ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर है, जिसका मतलब है कि कोई भी इसे बिना लाइसेंस शुल्क के उपयोग, संशोधित और वितरित कर सकता है। RISC-V की ओपन-सोर्स प्रकृति इसे नवाचार के लिए आदर्श बनाती है, क्योंकि यह डेवलपर्स और कंपनियों को अपने विशेष अनुप्रयोगों के लिए प्रोसेसर डिजाइन को अनुकूलित करने की स्वतंत्रता देती है।

    RISC-V का महत्व इस बात में भी है कि यह हार्डवेयर डिजाइन में पारदर्शिता और सहयोग को बढ़ावा देता है। कंपनियाँ अपने स्वयं के कस्टम प्रोसेसर विकसित कर सकती हैं, जिससे लागत में कमी और बाजार में तेजी से प्रवेश संभव होता है। इसके अलावा, RISC-V के मॉड्यूलर डिज़ाइन की वजह से डेवलपर्स अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अतिरिक्त फीचर्स जोड़ सकते हैं।

    शक्ति प्रोसेसर का RISC-V के साथ समाकलन

    शक्ति प्रोसेसर, जिसे IBM द्वारा विकसित किया गया था, एक उच्च-प्रदर्शन प्रोसेसर है जो मुख्य रूप से सर्वर और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) में उपयोग किया जाता है। जब शक्ति प्रोसेसर को RISC-V के साथ मिलाकर डिजाइन किया जाता है, तो इससे दोनों आर्किटेक्चर के सर्वोत्तम गुणों का लाभ मिलता है। RISC-V की ओपन-सोर्स और मॉड्यूलर विशेषताएँ शक्ति प्रोसेसर के प्रदर्शन और विश्वसनीयता के साथ मिलकर एक शक्तिशाली और लचीला प्रोसेसर प्लेटफॉर्म प्रदान करती हैं।

    इस समाकलन से डेवलपर्स को अधिक अनुकूलन योग्य और किफायती प्रोसेसर डिजाइन करने में मदद मिलती है, जो विभिन्न उद्योगों में अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त होते हैं।


    प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा विशेषताएँ

    प्रोसेसर की गति और प्रदर्शन मानक

    RISC-V आधारित प्रोसेसर अपनी उच्च गति और प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। RISC आर्किटेक्चर के सरल इंस्ट्रक्शन सेट के कारण, प्रोसेसर तेजी से निर्देशों को निष्पादित कर सकते हैं। यह विशेषता विशेष रूप से मोबाइल डिवाइस और एम्बेडेड सिस्टम में महत्वपूर्ण है, जहां उच्च गति और कम ऊर्जा खपत आवश्यक होती है।

    प्रदर्शन मानकों में प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड, इंस्ट्रक्शन प्रति क्लॉक (IPC), और लेटेंसी शामिल हैं। RISC-V प्रोसेसर इन सभी मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदान करते हैं। इसके अलावा, इनके डिजाइन में मल्टीकोर आर्किटेक्चर और समानांतर प्रोसेसिंग क्षमताएँ भी होती हैं, जो भारी कंप्यूटिंग कार्यों के लिए उपयुक्त होती हैं।

    कम ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय लाभ

    RISC-V प्रोसेसर की ऊर्जा दक्षता उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाती है। सरल इंस्ट्रक्शन सेट और कुशल प्रोसेसिंग के कारण, ये प्रोसेसर कम ऊर्जा खपत करते हैं, जिससे बैटरी जीवन में वृद्धि होती है और कुल ऊर्जा लागत में कमी आती है।

    कम ऊर्जा खपत का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह प्रोसेसर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हैं। ऊर्जा दक्षता के कारण, डेटा सेंटर और बड़े सर्वर फॉर्म फैक्टर में भी यह प्रोसेसर कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करते हैं।

    सुरक्षा विशेषताएँ: हार्डवेयर स्तर पर डेटा सुरक्षा

    RISC-V प्रोसेसर में हार्डवेयर स्तर पर उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं। इन प्रोसेसर में इंटीग्रेटेड एन्क्रिप्शन मॉड्यूल, सुरक्षित बूट, और हार्डवेयर-आधारित एक्सेस कंट्रोल फीचर्स होते हैं। इससे डेटा की सुरक्षा बढ़ती है और संभावित साइबर हमलों से सुरक्षा मिलती है।

    इसके अलावा, RISC-V की ओपन-सोर्स प्रकृति डेवलपर्स को अपने सुरक्षा उपायों को कस्टमाइज़ करने की अनुमति देती है, जिससे विशेष अनुप्रयोगों के लिए अधिक मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं।


    ओपन-सोर्स हार्डवेयर की भूमिका

    ओपन-सोर्स के फायदे (लागत में कमी, स्वतंत्रता)

    ओपन-सोर्स हार्डवेयर, जैसे RISC-V, कई फायदे प्रदान करता है। सबसे महत्वपूर्ण लाभ लागत में कमी है, क्योंकि ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर के लिए कोई लाइसेंस शुल्क नहीं देना पड़ता। इससे छोटे और मध्यम व्यवसायों को उच्च-गुणवत्ता वाले प्रोसेसर विकसित करने का अवसर मिलता है।

    ओपन-सोर्स हार्डवेयर डेवलपर्स को डिजाइन और विकास में पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता है। वे अपने विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार प्रोसेसर को अनुकूलित कर सकते हैं, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, ओपन-सोर्स समुदाय का समर्थन और सहयोग डेवलपमेंट प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाता है।

    विश्व स्तर पर ओपन-सोर्स हार्डवेयर का चलन

    विश्व स्तर पर ओपन-सोर्स हार्डवेयर का चलन तेजी से बढ़ रहा है। तकनीकी कंपनियाँ और शैक्षणिक संस्थान RISC-V जैसे ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर को अपनाने में अग्रणी हैं। यह चलन नवाचार, लागत-कटौती, और तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    अमेरिका, यूरोप, और एशिया में कई कंपनियाँ अपने उत्पादों में RISC-V आधारित प्रोसेसर का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा, सरकारें और अनुसंधान संस्थान भी ओपन-सोर्स हार्डवेयर के विकास और उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी स्वीकृति और उपयोग में वृद्धि हो रही है।


    RISC-V आधारित प्रोसेसर आर्किटेक्चर आधुनिक कंप्यूटिंग की दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसकी सरलता, उच्च प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा विशेषताएँ इसे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाती हैं। ओपन-सोर्स हार्डवेयर के रूप में, RISC-V नवाचार और तकनीकी स्वतंत्रता के नए रास्ते खोलता है, जिससे भविष्य में तकनीकी विकास को नई दिशा मिलेगी।

    विश्व स्तर पर ओपन-सोर्स हार्डवेयर के बढ़ते चलन के साथ, RISC-V प्रोसेसर आने वाले वर्षों में तकनीकी परिदृश्य में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह आर्किटेक्चर न केवल लागत-कुशल समाधान प्रदान करता है, बल्कि डेवलपर्स और कंपनियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित, सुरक्षित, और कुशल प्रोसेसर डिजाइन करने की स्वतंत्रता भी देता है।


     


5. शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का अनुप्रयोग

  • रक्षा क्षेत्र में उपयोग
    • सामरिक उपकरणों और संचार प्रणालियों में शक्ति का उपयोग
    • साइबर सुरक्षा के लिए महत्त्व
  • अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान
    • ISRO के मिशनों में संभावित उपयोग
    • उच्च तापमान और विकिरण प्रतिरोधी डिजाइन
  • सरकारी और नागरिक उपयोग
    • स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में उपयोग
    • शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में योगदान

    रक्षा क्षेत्र में उपयोग

    1. सामरिक उपकरणों और संचार प्रणालियों में शक्ति का उपयोग
    रक्षा क्षेत्र में संचार प्रणालियों और सामरिक उपकरणों की सुरक्षा और दक्षता सर्वोपरि होती है। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर, जो अत्यधिक सुरक्षित और विश्वसनीय है, रक्षा प्रणालियों में निम्नलिखित प्रकार से उपयोगी है:

  • रडार और नेविगेशन सिस्टम: शक्ति प्रोसेसर की उच्च प्रोसेसिंग क्षमता और कम ऊर्जा खपत इसे रडार और नेविगेशन प्रणालियों के लिए आदर्श बनाती है।

  • सैन्य ड्रोन और रोबोटिक्स: शक्ति प्रोसेसर के इस्तेमाल से सैन्य ड्रोन अधिक कुशलता से संचालन कर सकते हैं, और स्वायत्तता में वृद्धि होती है।

  • एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन: सुरक्षित संचार के लिए शक्ति प्रोसेसर अत्याधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीकों का समर्थन करता है, जिससे गोपनीय जानकारी की रक्षा सुनिश्चित होती है।

2. साइबर सुरक्षा के लिए महत्त्व
साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल युग में एक बड़ी चुनौती है, विशेष रूप से रक्षा प्रणालियों के लिए। शक्ति प्रोसेसर निम्नलिखित तरीकों से साइबर सुरक्षा को मजबूत करता है:

  • हार्डवेयर आधारित सुरक्षा: शक्ति प्रोसेसर में इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं जो हार्डवेयर स्तर पर डेटा सुरक्षा प्रदान करते हैं।

  • विश्वसनीय कंप्यूटिंग: यह प्रोसेसर सुरक्षा में सेंध लगाने वाले सॉफ़्टवेयर हमलों को रोकने के लिए विश्वसनीय कंप्यूटिंग एनवायरनमेंट प्रदान करता है।


अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान

1. ISRO के मिशनों में संभावित उपयोग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में शक्ति प्रोसेसर का उपयोग अंतरिक्ष यानों और उपग्रहों के संचालन के लिए किया जा सकता है। इसकी संभावित उपयोगिता में शामिल हैं:

  • उपग्रह नियंत्रण प्रणाली: शक्ति प्रोसेसर की उच्च प्रोसेसिंग क्षमता और विश्वसनीयता इसे उपग्रहों के नेविगेशन और नियंत्रण प्रणालियों के लिए आदर्श बनाती है।

  • डेटा प्रोसेसिंग: अंतरिक्ष मिशनों में भारी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करने की आवश्यकता होती है। शक्ति प्रोसेसर इस कार्य को प्रभावी ढंग से संभाल सकता है।

2. उच्च तापमान और विकिरण प्रतिरोधी डिजाइन
अंतरिक्ष में उच्च तापमान और विकिरण का सामना करना पड़ता है। शक्ति प्रोसेसर को इन कठोर परिस्थितियों में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है:

  • थर्मल स्थिरता: यह प्रोसेसर अत्यधिक तापमान में भी स्थिर प्रदर्शन करता है, जो अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक है।

  • विकिरण प्रतिरोध: शक्ति प्रोसेसर विकिरण प्रतिरोधी तकनीक से लैस है, जिससे यह अंतरिक्ष में विकिरण के प्रभाव से सुरक्षित रहता है।


सरकारी और नागरिक उपयोग

1. स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में उपयोग
स्मार्ट सिटी पहल के तहत शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है:

  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट: शक्ति प्रोसेसर की सहायता से ट्रैफिक सिग्नल और निगरानी प्रणालियों को स्वचालित और अधिक कुशल बनाया जा सकता है।

  • ऊर्जा प्रबंधन: स्मार्ट ग्रिड प्रणालियों में शक्ति प्रोसेसर का उपयोग ऊर्जा की खपत को नियंत्रित और अनुकूलित करने के लिए किया जा सकता है।

2. शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में योगदान
शक्ति प्रोसेसर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है:

  • डिजिटल शिक्षा उपकरण: स्कूलों और कॉलेजों में शक्ति प्रोसेसर आधारित कंप्यूटर और टैबलेट्स का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

  • टेलीमेडिसिन: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शक्ति प्रोसेसर आधारित टेलीमेडिसिन प्रणालियों के माध्यम से सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।


शक्ति माइक्रोप्रोसेसर न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि यह भारत के रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, और नागरिक क्षेत्रों में बहुआयामी योगदान देता है। इसकी सुरक्षा, विश्वसनीयता, और उच्च प्रदर्शन क्षमताएं इसे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए आदर्श बनाती हैं। भविष्य में, शक्ति प्रोसेसर के व्यापक उपयोग से भारत की तकनीकी और आर्थिक प्रगति को और अधिक बल मिलेगा।


6. स्वदेशी प्रोसेसर के लाभ

  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
    • विदेशी प्रोसेसर में संभावित सुरक्षा खतरों से बचाव
    • स्वदेशी हार्डवेयर के माध्यम से राष्ट्रीय डेटा की सुरक्षा
  • आयात पर निर्भरता में कमी
    • विदेशी तकनीक पर खर्च में कमी
    • घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
  • घरेलू तकनीकी उद्योग का विकास
    • स्टार्टअप्स और उद्यमिता के नए अवसर
    • स्थानीय नौकरियों और कौशल विकास में वृद्धि

    स्वदेशी प्रोसेसर के लाभ

    डेटा सुरक्षा और गोपनीयता

    स्वदेशी प्रोसेसर के उपयोग का सबसे बड़ा लाभ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के क्षेत्र में देखा जा सकता है। आज के डिजिटल युग में डेटा को 'नई तेल' कहा जाता है, और इसकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेशी प्रोसेसर का उपयोग करने पर डेटा चोरी, साइबर जासूसी, और अनधिकृत पहुंच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    स्वदेशी प्रोसेसर के माध्यम से इन खतरों से बचा जा सकता है क्योंकि यह प्रोसेसर घरेलू तकनीकों और मानकों पर आधारित होते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि डेटा का संग्रहण, प्रक्रिया, और स्थानांतरण पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी विदेशी एजेंसी या संस्था की पहुँच से बाहर है।

    इसके अतिरिक्त, स्वदेशी प्रोसेसर के उपयोग से सरकार और महत्वपूर्ण संस्थानों के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा बढ़ती है। जैसे रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, और वित्तीय क्षेत्रों में डेटा लीक होने की संभावना कम हो जाती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है।

    आयात पर निर्भरता में कमी

    स्वदेशी प्रोसेसर के विकास और उपयोग से आयात पर निर्भरता में महत्वपूर्ण कमी आती है। जब हम विदेशी प्रोसेसर और तकनीकी उपकरणों पर निर्भर रहते हैं, तो हमें भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान के कारण देश के तकनीकी विकास पर प्रभाव पड़ता है।

    स्वदेशी प्रोसेसर के उत्पादन से न केवल विदेशी खर्च में कमी आती है, बल्कि यह हमारे देश की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाता है। यह 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों को समर्थन देता है, जिससे घरेलू उत्पादन और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

    घरेलू तकनीकी उद्योग का विकास

    स्वदेशी प्रोसेसर के विकास से घरेलू तकनीकी उद्योग को नई ऊँचाइयाँ मिलती हैं। इससे स्टार्टअप्स और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होते हैं। युवा उद्यमी और नवाचारकर्ता घरेलू आवश्यकताओं के अनुसार नए उत्पाद और सेवाएं विकसित कर सकते हैं, जो स्थानीय बाजार के अनुरूप होती हैं।

    यह प्रक्रिया स्थानीय नौकरियों के अवसर भी पैदा करती है। प्रोसेसर के डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, और वितरण में विभिन्न प्रकार के कौशल की आवश्यकता होती है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, बल्कि तकनीकी कौशल का विकास भी होता है।

    राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान

    स्वदेशी प्रोसेसर का उत्पादन और उपयोग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इससे घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलती है, और निर्यात के अवसर भी उत्पन्न होते हैं। जब हम अपनी तकनीक को अन्य देशों में निर्यात करते हैं, तो यह देश के लिए विदेशी मुद्रा अर्जन का स्रोत बनता है।

    इसके अलावा, घरेलू तकनीकी उद्योग के विकास से अनुसंधान और विकास (R&D) के क्षेत्र में भी वृद्धि होती है। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के लिए नए अवसर खुलते हैं, और देश के वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलती है।

    अनुकूलन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास

    स्वदेशी प्रोसेसर का एक और बड़ा लाभ यह है कि इन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। विदेशी प्रोसेसर आमतौर पर वैश्विक बाजार के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता।

    स्वदेशी प्रोसेसर के माध्यम से हम विशेष रूप से अपने देश की भौगोलिक, पर्यावरणीय, और उपयोगकर्ता आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक विकसित कर सकते हैं। इससे उत्पाद की कार्यक्षमता और उपयोगिता में वृद्धि होती है, और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव प्राप्त होता है।

    दीर्घकालिक तकनीकी स्वतंत्रता

    स्वदेशी प्रोसेसर के विकास और उपयोग से दीर्घकालिक तकनीकी स्वतंत्रता प्राप्त होती है। यह स्वतंत्रता हमें वैश्विक बाजार में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता से प्रभावित हुए बिना अपनी तकनीकी प्रगति जारी रखने की क्षमता प्रदान करती है।

    जब हम अपने प्रोसेसर और तकनीकी उपकरण स्वयं विकसित करते हैं, तो हमारे पास पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण होता है। इससे तकनीकी उन्नयन और नवाचार की प्रक्रिया तेज होती है, और हम तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के साथ कदम मिलाकर चल सकते हैं।

    पर्यावरणीय लाभ

    स्वदेशी प्रोसेसर के निर्माण में स्थानीय संसाधनों और पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। विदेशी प्रोसेसर के निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों और प्रक्रियाओं पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

    स्थानीय निर्माण से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है क्योंकि आयात-निर्यात की प्रक्रिया में परिवहन के कारण उत्पन्न होने वाले प्रदूषण से बचा जा सकता है। इससे देश के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को समर्थन मिलता है।

    स्वदेशी प्रोसेसर के विकास और उपयोग के अनेक लाभ हैं, जो न केवल डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आयात पर निर्भरता को कम करते हुए घरेलू उद्योग और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं। इससे तकनीकी स्वतंत्रता, रोजगार सृजन, और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति होती है।

    भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्वदेशी प्रोसेसर का विकास आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में देश की तकनीकी और आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

     


7. चुनौतियाँ और समाधान

  • विकास के दौरान आई चुनौतियाँ
    • तकनीकी बाधाएँ और नवाचार की आवश्यकता
    • संसाधनों और विशेषज्ञता की कमी
  • विदेशी प्रतिस्पर्धा और बाजार में स्थिति
    • इंटेल, एएमडी जैसी कंपनियों के साथ मुकाबला
    • बाजार में विश्वास बनाने की प्रक्रिया
  • शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के लिए भविष्य की रणनीतियाँ
    • अनुसंधान और विकास में निरंतरता
    • वैश्विक साझेदारियों की खोज

     

    विकास के दौरान आई चुनौतियाँ

    तकनीकी बाधाएँ और नवाचार की आवश्यकता

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के विकास में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तकनीकी बाधाओं का सामना करना था। माइक्रोप्रोसेसर डिज़ाइन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें उच्च स्तर की विशेषज्ञता और उन्नत तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता होती है। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो एक ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर है। हालांकि, इस आर्किटेक्चर का लाभ यह था कि यह स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ तकनीकी जटिलताएँ भी जुड़ी थीं।

    माइक्रोप्रोसेसर के प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर नवाचार और अनुसंधान की आवश्यकता थी। इसके अलावा, हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के बीच तालमेल बैठाने में भी कठिनाइयाँ आईं। डिज़ाइन त्रुटियों को सुधारना और उन्हें उत्पादन स्तर तक ले जाना एक और बड़ी चुनौती थी।

    संसाधनों और विशेषज्ञता की कमी

    भारत में माइक्रोप्रोसेसर डिज़ाइन की दिशा में सीमित अनुभव और विशेषज्ञता थी। इस क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों की संख्या कम थी और उपलब्ध संसाधन भी सीमित थे। आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर निर्माण के लिए आवश्यक अत्याधुनिक उपकरणों और फैब्रिकेशन सुविधाओं की भी कमी थी।

    वित्तीय संसाधनों की भी सीमाएँ थीं। माइक्रोप्रोसेसर विकास के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है, जो सरकारी अनुदान और कुछ निजी निवेशकों के समर्थन से ही संभव हो पाया। इसके अलावा, विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने और नई प्रतिभाओं को विकसित करने में भी समय और संसाधनों की आवश्यकता थी।

    विदेशी प्रतिस्पर्धा और बाजार में स्थिति

    इंटेल, एएमडी जैसी कंपनियों के साथ मुकाबला

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर को वैश्विक तकनीकी दिग्गजों जैसे इंटेल और एएमडी के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। ये कंपनियाँ दशकों से माइक्रोप्रोसेसर के क्षेत्र में अग्रणी हैं और उनके पास उन्नत तकनीक, विशाल संसाधन, और वैश्विक बाजार में मजबूत पकड़ है।

    इन कंपनियों के उत्पादों ने पहले ही बाजार में एक मानक स्थापित कर रखा था। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर को इस प्रतिस्पर्धा में अपनी उपयोगिता और प्रदर्शन को सिद्ध करना पड़ा। इसके लिए जरूरी था कि यह प्रोसेसर न केवल लागत में प्रतिस्पर्धी हो, बल्कि प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा के मामले में भी वैश्विक मानकों पर खरा उतरे।

    बाजार में विश्वास बनाने की प्रक्रिया

    किसी भी नए उत्पाद के लिए बाजार में विश्वास बनाना एक कठिन कार्य होता है, विशेषकर जब प्रतिस्पर्धा इतनी मजबूत हो। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के लिए भी यही चुनौती थी। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को यह विश्वास दिलाना कि यह प्रोसेसर विश्वसनीय और उच्च प्रदर्शन वाला है, एक कठिन प्रक्रिया थी।

    इस विश्वास को बनाने के लिए शक्ति टीम ने कई रणनीतियाँ अपनाईं। सरकारी परियोजनाओं में शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, जिससे घरेलू बाजार में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी। इसके अलावा, विभिन्न तकनीकी मंचों और सम्मेलनों में शक्ति माइक्रोप्रोसेसर की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया, जिससे तकनीकी समुदाय में इसकी पहचान बनी।

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के लिए भविष्य की रणनीतियाँ

    अनुसंधान और विकास में निरंतरता

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर की सफलता को बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास आवश्यक है। तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है।

    नई तकनीकों का विकास, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के लिए अनुकूल प्रोसेसर डिज़ाइन करना, भविष्य की रणनीतियों में शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, हार्डवेयर सुरक्षा को और मजबूत करने, और ऊर्जा दक्षता को बढ़ाने पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

    वैश्विक साझेदारियों की खोज

    वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों की खोज एक महत्वपूर्ण रणनीति है। विदेशी तकनीकी कंपनियों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग से शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के डिज़ाइन और निर्माण में नई तकनीकों और विचारों का समावेश किया जा सकता है।

    इसके अलावा, वैश्विक बाजार में प्रवेश करने के लिए विदेशी वितरकों और विपणन एजेंसियों के साथ साझेदारी करना भी जरूरी है। इससे न केवल शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में ब्रांड की पहचान भी मजबूत होगी।

    निष्कर्ष

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का विकास भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि इस यात्रा में कई चुनौतियाँ आईं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए किए गए नवाचार और प्रयास इसे सफल बनाने में सहायक रहे। भविष्य में अनुसंधान और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से शक्ति माइक्रोप्रोसेसर न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत स्थिति बना सकता है।


8. शक्ति माइक्रोप्रोसेसर बनाम विदेशी प्रोसेसर

  • तकनीकी तुलना
    • प्रदर्शन (Clock Speed, Cores, Cache आदि का विश्लेषण)
    • ऊर्जा दक्षता और लागत तुलना
  • कस्टमाइजेशन और सुरक्षा में शक्ति की बढ़त
    • विदेशी प्रोसेसर में सीमित कस्टमाइजेशन
    • हार्डवेयर स्तर पर सुरक्षा विशेषताएँ
  • लागत, प्रदर्शन, और विश्वसनीयता का विश्लेषण
    • लंबी अवधि में स्वदेशी प्रोसेसर के फायदे
    • विदेशी प्रोसेसर की तुलना में शक्ति का कुल लागत विश्लेषण

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर बनाम विदेशी प्रोसेसर

    तकनीकी तुलना

    प्रदर्शन (Clock Speed, Cores, Cache आदि का विश्लेषण): शक्ति माइक्रोप्रोसेसर, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास द्वारा विकसित किया गया है, आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुसार प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन प्रदान करता है। इसमें विभिन्न संस्करण होते हैं, जैसे शक्ति C-क्लास, I-क्लास, और M-क्लास, जो विभिन्न एप्लिकेशन के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। शक्ति प्रोसेसर में मल्टी-कोर आर्किटेक्चर का उपयोग किया जाता है जो बेहतर मल्टीटास्किंग और प्रोसेसिंग क्षमताओं को सुनिश्चित करता है।

    विदेशी प्रोसेसर, जैसे इंटेल और एएमडी के प्रोसेसर, उच्च क्लॉक स्पीड और बड़े कैश मेमोरी के साथ आते हैं। ये प्रोसेसर दशकों से उद्योग में स्थापित हैं और उनके प्रदर्शन को व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। उदाहरण के लिए, इंटेल के i7 और i9 प्रोसेसर उच्च क्लॉक स्पीड (3.5 GHz से अधिक) और 8 से 16 कोर तक की पेशकश करते हैं, जबकि शक्ति प्रोसेसर मुख्य रूप से 1.5 GHz तक की स्पीड पर केंद्रित हैं। हालांकि, शक्ति प्रोसेसर का डिज़ाइन विशिष्ट भारतीय आवश्यकताओं और लागत-प्रभावशीलता को ध्यान में रखता है।

    ऊर्जा दक्षता और लागत तुलना: शक्ति माइक्रोप्रोसेसर ऊर्जा दक्षता के मामले में प्रभावशाली है, खासकर एम्बेडेड सिस्टम और IoT (Internet of Things) उपकरणों के लिए। इसका डिज़ाइन कम ऊर्जा खपत के साथ बेहतर प्रदर्शन देने के लिए तैयार किया गया है। वहीं विदेशी प्रोसेसर, विशेष रूप से हाई-एंड मॉडल, अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं, जो उच्च प्रदर्शन के साथ आता है।

    लागत के मामले में, शक्ति प्रोसेसर स्वदेशी उत्पादन के कारण कम लागत पर उपलब्ध हैं। इससे भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। दूसरी ओर, विदेशी प्रोसेसर महंगे होते हैं, विशेष रूप से हाई-एंड और सर्वर ग्रेड प्रोसेसर।

    कस्टमाइजेशन और सुरक्षा में शक्ति की बढ़त

    विदेशी प्रोसेसर में सीमित कस्टमाइजेशन: विदेशी प्रोसेसर सामान्यतः प्री-डिज़ाइन और फिक्स्ड आर्किटेक्चर के साथ आते हैं, जिनमें कस्टमाइजेशन की सीमित संभावनाएँ होती हैं। उपयोगकर्ता को निर्माता द्वारा प्रदान किए गए हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलन करना कठिन हो जाता है।

    हार्डवेयर स्तर पर सुरक्षा विशेषताएँ: शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के डिज़ाइन में हार्डवेयर स्तर पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसमें हार्डवेयर ट्रोजन और अन्य सुरक्षा खतरों के खिलाफ अंतर्निहित सुरक्षा उपाय शामिल हैं। शक्ति प्रोसेसर के ओपन-सोर्स डिज़ाइन के कारण इसे किसी भी सुरक्षा जोखिम के लिए आसानी से ऑडिट और अनुकूलित किया जा सकता है। विदेशी प्रोसेसर में यह सुविधा सीमित होती है, और उनकी सुरक्षा प्रणालियाँ निर्माता के नियंत्रण में होती हैं, जिससे उपयोगकर्ता की निर्भरता बढ़ जाती है।

    लागत, प्रदर्शन, और विश्वसनीयता का विश्लेषण

    लंबी अवधि में स्वदेशी प्रोसेसर के फायदे: स्वदेशी शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग दीर्घकालिक दृष्टिकोण से फायदेमंद है। यह न केवल लागत में कमी लाता है, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देता है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर समर्थन और विकास की सुविधा से सिस्टम की विश्वसनीयता और प्रदर्शन में सुधार होता है।

    विदेशी प्रोसेसर की तुलना में शक्ति का कुल लागत विश्लेषण: कुल लागत के विश्लेषण में शक्ति प्रोसेसर विदेशी प्रोसेसर की तुलना में अधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं। शक्ति प्रोसेसर की खरीद, रखरखाव, और अपग्रेड लागत कम होती है, जबकि विदेशी प्रोसेसर में ये लागतें अधिक होती हैं। इसके अलावा, शक्ति प्रोसेसर के ओपन-सोर्स नेचर के कारण लाइसेंसिंग फीस और अन्य छिपी हुई लागतें भी नहीं होती हैं, जो विदेशी प्रोसेसर के साथ आम हैं।

    निष्कर्ष

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर और विदेशी प्रोसेसर के बीच तुलना में यह स्पष्ट है कि शक्ति प्रोसेसर न केवल लागत-प्रभावशीलता और ऊर्जा दक्षता में आगे हैं, बल्कि सुरक्षा और कस्टमाइजेशन के मामलों में भी बढ़त प्रदान करते हैं। हालांकि विदेशी प्रोसेसर उच्च प्रदर्शन और व्यापक उद्योग स्वीकृति प्रदान करते हैं, शक्ति प्रोसेसर भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता और विशेष आवश्यकताओं के लिए एक मजबूत विकल्प हैं। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से, शक्ति प्रोसेसर भारतीय तकनीकी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

     


9. भविष्य की संभावनाएँ और अनुसंधान

  • शक्ति प्रोसेसर के अगले संस्करण
    • भविष्य में और उच्च प्रदर्शन प्रोसेसर का विकास
    • एआई और मशीन लर्निंग के लिए प्रोसेसर डिज़ाइन
  • भारत में माइक्रोप्रोसेसर अनुसंधान का भविष्य
    • IITs और अन्य संस्थानों की भूमिका
    • निजी क्षेत्र और सरकारी सहयोग
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संभावनाएँ
    • अन्य देशों के साथ तकनीकी साझेदारियाँ
    • वैश्विक बाजार में शक्ति प्रोसेसर का स्थान

    शक्ति प्रोसेसर के अगले संस्करण

    शक्ति प्रोसेसर, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास द्वारा विकसित किया गया है, ने भारतीय माइक्रोप्रोसेसर उद्योग में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। इसके अगले संस्करणों में उच्च प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भविष्य में शक्ति प्रोसेसर के संस्करण और अधिक शक्तिशाली और अनुकूलन योग्य होंगे, जो विभिन्न उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।

    भविष्य में और उच्च प्रदर्शन प्रोसेसर का विकास

    तकनीकी प्रगति के साथ, शक्ति प्रोसेसर के आगामी संस्करणों में मल्टी-कोर आर्किटेक्चर, बेहतर कैश मेमोरी प्रबंधन, और तेज क्लॉक स्पीड जैसी विशेषताएँ होंगी। ये प्रोसेसर डेटा सेंटर्स, सुपरकंप्यूटिंग, और क्लाउड कंप्यूटिंग में उच्च प्रदर्शन की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। इसके अलावा, कम ऊर्जा खपत के साथ उच्च दक्षता प्राप्त करने के लिए नवीनतम नैनोमेटेरियल्स और फिन-फेट तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

    एआई और मशीन लर्निंग के लिए प्रोसेसर डिज़ाइन

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, शक्ति प्रोसेसर के भविष्य के संस्करण विशेष रूप से AI और ML एल्गोरिदम को तेजी से प्रोसेस करने के लिए डिज़ाइन किए जाएंगे। इनमें विशेष न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स (NPUs) और हार्डवेयर एक्सेलेरेटर्स का समावेश होगा, जो डीप लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स के लिए उपयुक्त होंगे। यह न केवल अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए भी लाभकारी होगा।

    भारत में माइक्रोप्रोसेसर अनुसंधान का भविष्य

    भारत में माइक्रोप्रोसेसर अनुसंधान तेजी से उभर रहा है। शक्ति प्रोसेसर जैसी पहल ने घरेलू तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

    IITs और अन्य संस्थानों की भूमिका

    IIT मद्रास के अलावा, अन्य प्रमुख संस्थान जैसे कि IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, और IISc बेंगलुरु भी माइक्रोप्रोसेसर अनुसंधान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ये संस्थान न केवल नई तकनीकों के विकास पर काम कर रहे हैं, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं को उन्नत प्रशिक्षण और संसाधन भी प्रदान कर रहे हैं। इनके सहयोग से भारत में नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।

    निजी क्षेत्र और सरकारी सहयोग

    सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से माइक्रोप्रोसेसर अनुसंधान को और अधिक गति मिल रही है। भारत सरकार की "मेक इन इंडिया" और "डिजिटल इंडिया" पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, निजी कंपनियाँ जैसे कि टाटा, इंफोसिस, और विप्रो भी माइक्रोप्रोसेसर विकास में निवेश कर रही हैं। इस संयुक्त प्रयास से अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संभावनाएँ

    अंतरराष्ट्रीय सहयोग शक्ति प्रोसेसर के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अन्य देशों के साथ तकनीकी साझेदारियाँ

    शक्ति प्रोसेसर परियोजना अन्य देशों के तकनीकी संस्थानों और कंपनियों के साथ सहयोग करके अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए, अमेरिका, जापान, और दक्षिण कोरिया के साथ साझेदारियाँ अनुसंधान और नवाचार में तेजी ला सकती हैं। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के अनुसंधान कार्यक्रमों में भागीदारी से भी तकनीकी लाभ मिल सकते हैं।

    वैश्विक बाजार में शक्ति प्रोसेसर का स्थान

    शक्ति प्रोसेसर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हो रहा है। उच्च गुणवत्ता, सुरक्षा, और अनुकूलनशीलता के कारण, यह प्रोसेसर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय उद्योगों में अपनी जगह बना सकता है। इसके अलावा, किफायती मूल्य निर्धारण और स्थानीय उत्पादन से यह वैश्विक बाजार में एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बन सकता है।

    निष्कर्ष

    शक्ति प्रोसेसर के भविष्य की संभावनाएँ उज्ज्वल हैं। उच्च प्रदर्शन प्रोसेसर के विकास, एआई और मशीन लर्निंग के लिए विशेष डिज़ाइन, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से, यह परियोजना भारतीय तकनीकी परिदृश्य में एक नई क्रांति ला सकती है। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

     


10. निष्कर्ष

  • शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का राष्ट्रीय महत्व
    • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
    • स्वदेशी तकनीक के माध्यम से भारत की वैश्विक पहचान
  • दीर्घकालिक प्रभाव और संभावनाएँ
    • तकनीकी और आर्थिक लाभ
    • युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत

    निष्कर्ष

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का राष्ट्रीय महत्व

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह परियोजना न केवल "आत्मनिर्भर भारत" के सपने को साकार करने में योगदान देती है, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करती है। आज के डिजिटल युग में, माइक्रोप्रोसेसर तकनीक किसी भी देश की तकनीकी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के विकास ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत और सुरक्षित तकनीक विकसित करने में सक्षम है।

    यह स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर भारतीय रक्षा, संचार, और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम करता है। इसके साथ ही, यह भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाकर साइबर सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब देश अपनी आवश्यकतानुसार माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण करने में सक्षम होता है, तो वह वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी शक्ति और नवाचार क्षमता को भी प्रदर्शित करता है। इससे भारत की वैश्विक पहचान एक तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में सुदृढ़ होती है, जो न केवल विकासशील देशों के लिए बल्कि विकसित देशों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन सकती है।

    दीर्घकालिक प्रभाव और संभावनाएँ

    शक्ति माइक्रोप्रोसेसर का दीर्घकालिक प्रभाव तकनीकी और आर्थिक दोनों स्तरों पर देखा जा सकता है। तकनीकी दृष्टिकोण से, यह भारत में उच्च तकनीक अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करेगा। इससे घरेलू तकनीकी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और नए स्टार्टअप्स तथा नवाचारों के लिए अवसर उत्पन्न होंगे। इससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार क्षमता में वृद्धि होगी।

    आर्थिक दृष्टिकोण से, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर निर्माण से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश के भीतर ही रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा, भारत अपने माइक्रोप्रोसेसर को अन्य देशों को निर्यात कर विदेशी बाजारों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ता मिलेगी। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी भी बढ़ेगी और देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

    युवा पीढ़ी के लिए शक्ति माइक्रोप्रोसेसर एक प्रेरणा स्रोत है। यह परियोजना यह दर्शाती है कि भारतीय युवाओं के पास भी वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने की क्षमता है। इससे विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों और नवाचारकर्ताओं को नई दिशा मिलेगी। यह परियोजना भारतीय शिक्षा संस्थानों में तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के स्तर को भी ऊँचा उठाने में सहायक होगी।

    निष्कर्षतः, शक्ति माइक्रोप्रोसेसर न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह भारत को तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस प्रकार, शक्ति माइक्रोप्रोसेसर भारत के उज्जवल भविष्य की आधारशिला के रूप में स्थापित हो चुका है।


     

नेशन हाइड्रोजन मिशन ऊर्जा के भारत -novel alloy-based catalyst for the efficient generation of green hydrogen

भारत की प्रगति के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए भारत का Energy Independent होना अनिवार्य है।

भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का हब बनाना है।
भारत आज जो भी कार्य कर रहा है, उसमें सबसे बड़ा लक्ष्य है, जो भारत को क्वांटम जंप देने वाला है- वो है ग्रीन हाइड्रोजन का क्षेत्र। मैं आज तिरंगे की साक्षी में National Hydrogen Mission की घोषणा कर रहा हूं: PM @narendramodi
 

Key Highlights of the New High-Entropy Alloy (HEA) Catalyst for Hydrogen Production

  • Innovation & Development:

    • A novel high-entropy alloy (HEA) catalyst named PtPdCoNiMn has been developed for efficient hydrogen production through water electrolysis.
    • Created by researchers at the Centre for Nano and Soft Matter Sciences (CeNS), Bengaluru, under the Department of Science and Technology (DST), India.
  • Material Composition & Design:

    • Consists of platinum (Pt), palladium (Pd), cobalt (Co), nickel (Ni), and manganese (Mn).
    • Selection of metals guided by Dr. Prashant Singh from AMES National Laboratory, USA.
    • HEAs contain multiple elements in near-equal concentrations, offering stability through entropic contributions.
  • Synthesis Methods:

    • Electrodeposition: Optimized solvent choice and deposition potential at room temperature and atmospheric pressure.
    • Solvothermal Process: High-temperature, high-pressure chemical synthesis using carefully controlled solvents and reducing agents.
    • Enabled production of alloys in both single-phase and multi-phase forms.
  • Performance & Efficiency:

    • Seven times less platinum used compared to commercial catalysts.
    • Higher catalytic efficiency than pure platinum, with minimal energy loss.
    • Durable and stable, maintaining performance for over 100 hours even in alkaline seawater.
    • Theoretical studies show optimal binding of reaction intermediates enhances efficiency.
  • Practical Implications:

    • Potential to reduce reliance on expensive materials like platinum for clean energy production.
    • Offers a cost-effective, sustainable solution for hydrogen generation, supporting renewable energy technologies.
  • Funding & Recognition:

    • Funded by India’s Anusandhan National Research Foundation (ANRF), administered by DST.
    • Research findings published in Advanced Functional Material and Small journals.
Ref: PIB/2099207/03.02.2025

40.Growth Sector India 2026_ भारत की उड़ान -हाइपरसोनिक मिसाइलें: आधुनिक रक्षा तकनीक का एक अद्वितीय चमत्कार-Scramjet Engine

 भारत की उड़ान

DRDO conducts Scramjet Engine Ground Test

 Reference: PIB Release ID: 2094886

 


हाइपरसोनिक मिसाइलें: आधुनिक रक्षा तकनीक का एक अद्वितीय चमत्कार


हाइपरसोनिक मिसाइलें आधुनिक रक्षा तकनीक की दुनिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। यह मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक, यानी मैक 5 या 5,400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से यात्रा करती हैं। इस अभूतपूर्व गति और प्रौद्योगिकी की मदद से ये मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देकर तीव्र और उच्च-प्रभाव वाले हमले कर सकती हैं। हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में कई चुनौतियाँ और उपलब्धियाँ शामिल हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है स्क्रैमजेट इंजन की भूमिका।


हाइपरसोनिक मिसाइलें क्या हैं?

हाइपरसोनिक मिसाइलें ऐसी प्रौद्योगिकीय हथियार हैं, जो ध्वनि की गति से कई गुना तेज यात्रा करती हैं। इनकी असाधारण गति के साथ-साथ, इनका डिज़ाइन ऐसा होता है कि यह वायुमंडलीय दबाव और उच्च तापमान का सामना कर सकें। हाइपरसोनिक गति को वैज्ञानिक रूप से "मैक 5" से परिभाषित किया जाता है, जो ध्वनि की गति से पाँच गुना अधिक है। इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से लक्ष्य को भेदना और प्रतिद्वंद्वी की वायु रक्षा प्रणाली को निष्प्रभावी करना है।


हाइपरसोनिक मिसाइलों की विशेषताएँ

  1. अत्यधिक गति:

    • हाइपरसोनिक मिसाइलें 5,400 किमी/घंटा या उससे अधिक की गति से चलती हैं। यह गति इन्हें पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी बनाती है।

  2. सटीकता और गतिशीलता:

    • यह मिसाइलें उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने में सक्षम होती हैं। इनके मार्ग को बीच में भी बदला जा सकता है, जिससे इनकी गतिशीलता बढ़ जाती है।

  3. एयर डिफेंस सिस्टम को मात देने की क्षमता:

    • मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियाँ इतनी तेज गति से चलने वाली मिसाइलों को ट्रैक करने या रोकने में सक्षम नहीं हैं।

  4. वायुगतिकीय डिज़ाइन:

    • हाइपरसोनिक मिसाइलों का डिज़ाइन ऐसा होता है कि यह वायुमंडलीय दबाव और तापमान का सामना करते हुए स्थिरता बनाए रख सकें।


स्क्रैमजेट इंजन की भूमिका

हाइपरसोनिक तकनीक का दिल स्क्रैमजेट इंजन है। स्क्रैमजेट (Supersonic Combustion Ramjet) एक ऐसी प्रणाली है जो हवा को इंजन के अंदर खींचती है और उसमें सुपरसोनिक गति से दहन करती है। इस प्रक्रिया में कोई भी चलने वाले यांत्रिक हिस्से शामिल नहीं होते। यह प्रणाली न केवल उच्च गति प्राप्त करने में सहायक होती है, बल्कि ईंधन की खपत को भी कम करती है।

स्क्रैमजेट इंजन की प्रमुख विशेषताएँ:

  1. सुपरसोनिक दहन:

    • इंजन के अंदर वायु और ईंधन का मिश्रण सुपरसोनिक गति से दहन करता है।

  2. फ्लेम स्टेबलाइज़ेशन तकनीक:

    • फ्लेम स्टेबलाइज़ेशन तकनीक का उपयोग इंजन के अंदर स्थिर दहन बनाए रखने के लिए किया जाता है, भले ही हवा की गति 1.5 किमी/सेकंड से अधिक हो।

  3. चलने वाले हिस्सों का अभाव:

    • इसमें कोई चलने वाले हिस्से नहीं होते, जिससे यह इंजन हल्का और टिकाऊ होता है।


भारत में हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक का विकास

भारत में हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के विकास में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

एंडोथर्मिक स्क्रैमजेट ईंधन का विकास:

भारत ने पहली बार स्वदेशी एंडोथर्मिक स्क्रैमजेट ईंधन विकसित किया है। यह विकास DRDL और उद्योग जगत के बीच एक साझेदारी का परिणाम है। इस ईंधन की विशेषता यह है कि यह अत्यधिक तापमान पर ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है।

थर्मल बैरियर कोटिंग (TBC) तकनीक:

थर्मल बैरियर कोटिंग तकनीक का उपयोग स्क्रैमजेट इंजन को उच्च तापमान से बचाने के लिए किया जाता है। DRDL और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने मिलकर एक उन्नत सिरेमिक कोटिंग विकसित की है, जो स्टील के पिघलने के बिंदु से अधिक तापमान पर भी कार्य करने में सक्षम है।


थर्मल बैरियर कोटिंग की विशेषताएँ

  1. उच्च तापीय प्रतिरोध:

    • यह कोटिंग 3,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान को सहन कर सकती है।

  2. दीर्घकालिक प्रदर्शन:

    • कोटिंग का विशेष निर्माण इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है।

  3. विशेष जमाव तकनीक:

    • इस कोटिंग को स्क्रैमजेट इंजन के अंदर विशेष जमाव विधियों द्वारा लगाया जाता है, जिससे इंजन की दक्षता और आयु बढ़ जाती है।


हाइपरसोनिक मिसाइलों का भविष्य

हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास न केवल रक्षा के क्षेत्र में भारत को सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में भी बढ़त दिलाएगा। ये मिसाइलें भविष्य में युद्धक्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।

आगामी संभावनाएँ:

  1. स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास:

    • भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार प्रयासरत है और हाइपरसोनिक तकनीक में और सुधार की उम्मीद है।

  2. वैश्विक प्रतिस्पर्धा:

    • अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए, भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

  3. नागरिक अनुप्रयोग:

    • हाइपरसोनिक तकनीक का उपयोग भविष्य में परिवहन और अंतरिक्ष अन्वेषण में भी किया जा सकता है।


निष्कर्ष

हाइपरसोनिक मिसाइलें आधुनिक युद्ध की रणनीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक हैं। इनकी अद्वितीय गति, सटीकता और वायुगतिकीय डिज़ाइन उन्हें पारंपरिक हथियार प्रणालियों से अलग और अत्यधिक प्रभावी बनाते हैं। भारत का इस क्षेत्र में हो रहा निरंतर विकास न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जाएगा। DRDO, DST और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयास इस दिशा में एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।


38. Growth Sector India 2026- Manufacturing and 'Make in India'-Policy level reforms double-digit GDP growth. 5–10 years of tax holidays for companies setting up manufacturing units

 Policy level reforms double-digit GDP growth 
 

UNION BUDGET 2025-26 -“MAKE IN INDIA”

The National Manufacturing Mission will lay emphasis on five focal areas i.e. ease and cost of doing business; future ready workforce for in-demand jobs; a vibrant and dynamic MSME sector; availability of technology; and quality products.

The Mission will also support Clean Tech manufacturing and aims to improve domestic value addition and build the ecosystem for solar PV cells, EV batteries, motors and controllers, electrolyzers, wind turbines, very high voltage transmission equipment and grid scale batteries, the Union Finance Minister added.

The Finance Minister also outlined measures for Labour-Intensive Sectors, adding that Government will  undertake specific policy and facilitation measures to promote employment and entrepreneurship opportunities in labour-intensive sectors.

The Union Minister specified that to enhance the productivity, quality and competitiveness of India’s footwear and leather sector, a focus product scheme will be implemented. The Union Finance Minister further informed that the scheme will support design capacity, component manufacturing, and machinery required for production of non-leather quality footwear, besides the support for leather footwear and products. The scheme is expected to facilitate employment for 22 lakh persons, generate turnover of Rs. 4 lakh crore and exports of over Rs. 1.1 lakh crore.

 National Action Plan for Toys to be implemented to make India a global hub for toys. The scheme will focus on development of clusters, skills, and a manufacturing ecosystem that will create high-quality, unique, innovative, and sustainable toys that will represent the 'Made in India' brand, the Minister added.
 
Support for food processing,- National Institute of Food Technology, Entrepreneurship and Management in Bihar. The institute will provide a strong fillip to food processing activities in the entire Eastern region. This will result in enhanced income for the farmers through value addition to their produce, and skilling, entrepreneurship and employment opportunities for the youth.

Ref/PIB/2098392/01.02.2025

Manufacturing and 'Make in India'

  • Focus Areas: Electronics, defense, textiles, and renewable energy equipment.
  • Initiatives:
    • Production-Linked Incentive (PLI) Schemes: Extended to sectors like automotive, solar modules, and drones.
    • Electronics manufacturing expected to touch $300 billion by 2026.
  • Projections:
    • Manufacturing growth rate: ~10-12% annually.
    • Contribution to GDP: ~22% (from ~17% in 2023).
     

 

  Policy level reforms double-digit GDP growth

Make in India

  1. PLI Scheme Expansion: Extend Production-Linked Incentives (PLIs) to high-potential industries such as pharmaceuticals, electronics, and renewable energy.
  2. Skill Development for Manufacturing: Launch vocational training programs for skill enhancement aligned with industry 4.0 requirements.
  3. Local Procurement Norms: Mandate higher local content in public procurements across sectors like defense and construction.
  4. Tax Holidays for Manufacturing Hubs: Offer 5–10 years of tax holidays for companies setting up manufacturing units in underdeveloped regions.

 

37 Growth Sector India 2026_ Innovation Hub and Intellectual Property- India AI Mission, with an investment of $1.25 billion, aims to foster AI development across various sectors.

 Innovation Hub and Intellectual Property:

Innovation and Patents: India is emerging as a key player in the global AI landscape, with significant investments in artificial intelligence and related technologies. The government's IndiaAI Mission, with an investment of $1.25 billion, aims to foster AI development across various sectors. This initiative is expected to boost innovation and increase the number of patents filed, contributing to economic growth.

Science & Technology, Creativity in Science, Technology and Innovation for Prosperous India

‘BharOS’, a Made in India mobile operating system developed by IIT Madras


Creativity in Science, Technology and Innovation for Prosperous India

Unique Ideas - Invest in Our Planet 

Bringing out new perspectives related to political, cultural, economic, or science related aspects of national movement

आसियान देश-आसियान भारत का चौथा सबसे बडा व्यापारिक भागीदार है।

नई विज्ञान नीति Technology & Innovation -India Innovation and Patent Hub: Innovation and patent are big tool for India economy growth

DRDO’s Fuel Cell-based Air Independent Propulsion system to soon be fitted onboard INS Kalvari, significantly enhancing its submerged endurance

 

 

SVASTIK Initiative of CSIR-NIScPR- Scientifically Validated Societal Traditional Knowledge


India has a rich legacy of practices and knowledge touching different spheres of life and a scientific heritage traversing various Science & Technology (S&T) domains. The traditional knowledge of India is available in various forms such as classical texts, manuscripts and/or as oral communication that has been passed on over thousands of years. This valuable knowledge is often part of our daily practices as well. Some of the traditional practices are livelihood means of the concerned knowledge holders. Our traditional practices exist in synergy between human needs and nature, often balancing resources and requirements in a local context. However, with time, India’s Traditional Knowledge Systems are eroding rapidly, and the nation has also been witnessing erosion in people’s faith towards our traditional knowledge. A grave concern is the mindless attitude of some to mimic non-Indian cultures and disdain for our traditions. It’s important to recognize that traditional heritage is an integral part of any country’s development and progression. This calls for necessary attention and action from the concerned stakeholders in the country to build further on our scientific inheritance. Only a well-informed and balanced society can drive the advancement of the country.

Under the visionary leadership of our Hon’ble Prime Minister and President, CSIR Society, Shri Narendra Modi, the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) is spearheading the efforts to collaborate with the relevant partners from across the country and implement the national initiative SVASTIK (Scientifically Validated Societal Traditional Knowledge) for communicating India’s traditional knowledge to the society. CSIR-National Institute of Science Communication and Policy Research (CSIR-NIScPR) is the nodal organization to implement this national initiative.

The prime mission of the initiative is to conserve scientifically validated traditional practices, and instil confidence in citizens regarding the scientific values of our traditional knowledge/practices.

We invite the suggestions of academicians, researchers, subject-matter experts, students, NGOs, and the public on how to instil confidence in society about our traditional knowledge and practices. This will help us in our mission to inculcate a scientific temper and instil confidence in citizens by stimulating the Science-Scientist-Society connect towards our traditional knowledge and practices.

Ref: My gov


Click here to read more about the SVASTIK Initiative of CSIR-NIScPR. (PDF 1519 KB)

Or visit the website - https://niscpr.res.in/nationalmission/svastik

How much are you aware of our traditional knowledge and practices? Participate in MyGov quiz and check your awareness of the traditional knowledge of India. Quiz Link: https://quiz.mygov.in/quiz/quiz-on-indian-traditional-knowledge/

Friday, February 20, 2026

31. Growth Sector India 2026- Water way - Interlinking of Rivers-Connecting rivers -one of major contributor in India GDP growth in Next 2 Years नदी तटों के विकास करने की परियोजना

नदी तटों के विकास करने की परियोजना

Transportation and Connectivity: The government has set ambitious targets for the transport sector, including the development of a 200,000 km national highway network by 2025 and expanding airports to 220. Additionally, plans include operationalizing 23 waterways by 2030 and developing 35 Multi-Modal Logistics Parks (MMLPs).

 Waterways and River Linking: The National River Linking Project is an ambitious initiative to connect several rivers, forming a vast water grid from the Himalayas to the Arabian Sea and Bay of Bengal. This project aims to alleviate water shortages and flooding by redistributing water, with benefits such as irrigation for millions of hectares of farmland and increased hydroelectric power generation

Interlinking of Rivers

National Water Framework Bill, 2016


The Government of India formulated a National Perspective Plan (NPP) for interlinking of rivers (ILR) in 1980. National Water Development Agency (NWDA) has been entrusted with the work of Interlinking of Rivers under the National Perspective Plan (NPP). The NPP has two components, viz; Himalayan Rivers Development Component and Peninsular Rivers Development Component. 30 link projects have been identified under the NPP. In last 5 years, significant progress has been made in the ILR programme,

 

Connecting rivers - Waterway development safeguarding the water waste 

Possibility of approximate 5 lakhs + job boost due to this initiative


Indian tourism - Connecting rivers -one of major contributor in India GDP growth in Next 2 Years नदी तटों के विकास करने की परियोजना

Ports, Shipping, Waterways Budget 2021-22 Rs. 2,000 crore worth 7 projects to be offered in PPP-mode in FY21-22 for operation of major ports Indian shipping companies to get Rs. 1624 crore worth subsidy support over 5 years in global tenders of Ministries and CPSEs To double the recycling capacity of around 4.5 Million Light Displacement Tonne (LDT) by 2024; to generate an additional 1.5 lakh jobs

Boost of water transport
Boost of agriculture industry due to availability of water
Boost of Hotel and restaurant Industry  
Boost the tourism industry 


5 projects connecting rivers will begin in 3 months: Nitin Gadkari


Save the water for your children



Water Transport

Boosting Irrigation  & agriculture by Water Management  

Canals In India 





The 5 Longest Canals in India


Indian states are full of canals used for irrigation and as water transport in different parts of the country. These water transports of India play a very important role in irrigation of crops in drought region of India such as Rajasthan and Tamilnadu. Indian governments has launched many projects for rivers Inter link and National Waterways.

Upper Ganges Canal



The Upper Ganges Canal is the main canal of Ganges canal system projects, which starts Haridwar to Aligarh district via Meerut and Bulandshahr. The 1412 Km long Upper Ganges Canal is use to irrigates the Doab region of India.

Indira Gandhi Canal


The Indira Gandhi Canal is the longest canal in India and the largest irrigation project in the world. Indira Gandhi Canal is 649 km long and consists of Rajasthan feeder canal and Rajasthan main canal and runs through 167 km in Punjab and Haryana and remaining 492 km in Rajasthan. The canal is one of the project of Green revolution in India and also runs through The Great Thar Desert.

Buckingham Canal


The Buckingham Canal is a fresh water canal runs from Vijayawada to Villupuram District in Tamil Nadu. Buckingham Canal is second longest canal in India with an length of 421.55 km runs, along with Coromandel Coast of India. It connect most of the water bodies like Pulicat Lake,Krishna River and the port of Chennai.

Sutlej Yamuna Link Canal


The Sutlej Yamuna link canal also known as SYL is a major project to connect the Sutlej and Yamuna rivers. Sutlej Yamuna link canal is 214-km long freight canal which will create important commercial links to India. The Sutlej Yamuna waterway is 90 percentage completed but the remaining 10 is still remaining.



Sharda Canal

The Sharda Canal is the longest canal in Uttar Pradesh along with its several branches it form a network of canals. Sharda Canal is located in the Pilibhit district and has a total length of 938 Km including all branches.

Narmada Canal brings water for the farmers and residents of Jalore District and Barmer Districts of Rajasthan and rest of the part of Gujarat, from the big Sardar Sarovar Dam.
www.walkthroughindia.com.


Narmada Canal

construction work of the Kutch Branch Canal (KBC) at Rapar town in Kutch district. Narmada water will be available to Kutch for irrigation


The Kutch Branch Canal will be 360 km in length with discharge capacity of 7,700 cusecs. More than 2.78 lakh acres of land in 182 villages of seven talukas of Kutch will benefit with water for irrigation.
Narmada’s gravity ends at Banaskantha, so three big pumping stations will be constructed to provide water by way of lift irrigation at the cost of Rs1,265 crore.

Kind Attention 
Union Minister of Ports, Shipping & Waterways- Shri Sarbananda Sonowal

Key Theam
various infrastructure projects, 
PPA Projects,
Functioning of the Port, 
Ease of business initiative, 
Green initiative, 
Business development activity of the Port.
 
Ref: pib
 

Under the Himalayan Rivers Development Component of the NPP, 3 link projects, viz; Kosi-Mechi Link project , Kosi-Ghaghra link project and Chunar-Sone Barrage link project envisage transfer of water from Kosi, Ghaghra and Gandak rivers flowing down from Nepal to the other rivers in the State of Bihar.

The Pre-Feasibility Report (PFR) for Kosi-Mechi Inter State link project has been completed by NWDA. This link project lies in Nepal. As per the PFR, the link would provide for annual irrigation of 4.74 lakh hectare (ha) (2.99 lakh ha in Bihar) and 24 Million Cubic Metre (MCM) of domestic and industrial water supply in Bihar and Nepal.

The Kosi-Ghaghra link project, draft Feasibility Report (FR) for which has been completed, envisages diversion of 7482 MCM of water from right bank of the river Kosi from proposed Chatra barrage to the Ghaghra in order to extend irrigation to un-irrigated areas of Bihar and Uttar Pradesh (UP), north of river Ganga in the basins of Kosi, Kamla, Balan, Bagmati, Burhi Gandak, Gandak and Ghaghra rivers. The link would provide for annual irrigation to 10.58 lakh ha area (8.17 Lakh ha in Bihar) and 48 MCM of domestic & industrial water supply in Bihar, UP and Nepal.

The Chunar-Sone Barrage link project, draft FR for which has been completed, envisages transfer of water from river Ganga at Chunar to Sone river. River Ganga at Chunar would be surplus through augmentation of 6879 MCM of water from the proposed Gandak-Ganga link project and 4090 MCM from the proposed Ghaghra –Yamuna link project. Out of this surplus, Ganga water available at Chunar for diversion to Sone river would be 5918 MCM. The link project would provide for enroute annual irrigation of 0.67 lakh ha area, out of which 0.13 lakh ha lies in Bihar. The link canal would take over the existing commands of Western Sone Low Level Canal and High Level Canal to the extent of 4364.49 MCM of water and also the existing requirement of Sone barrage to the extent of 928.47 MCM of water directly. Due to this arrangement, additional 2.99 lakh ha irrigation will also be provided to Bihar through Sone Dam - Southern Tributaries of Ganga link, PFR of which has been completed.

Apart from the above, the Detailed Project Report (DPR) for Kosi–Mechi intra-State link project was prepared by NWDA in March, 2014. Ths intra-State link project has been accorded Environmental Clearance and Investment Clearance in 2019 and 2020 respectively. A Memorandum of Understanding for the preparation of working DPR for this intra-State link project has been signed between NWDA and Government of Bihar in December, 2022.

The Government has pursued the ILR program in a consultative manner and has accorded it top priority. DPRs of the ILR projects after completion, are sent to the party States and efforts made at various levels to bring them to a consensus on the issues related to water sharing etc., so as to take these link projects ahead to the implementation stage.

The Ken-Betwa Link project (KBLP) is the first ILR prroject under the NPP, implementation of which has been initiated. The Memorandum of Agreement (MoA) for the implementation of the Ken-Betwa Link project (KBLP) amongst the party States and the Government of India was signed on 22.03.2021. Subsequently, the link project was approved by the Government of India in December, 2021 for implementation at an estimated cost of Rs 44,605 crore (year 2020-21 price level) with a central support of Rs 39,317 crore and through a Special Purpose Vehicle (SPV), viz; Ken Betwa Link Project Authority (KBLPA). The total expenditure made on KBLP (Phase I and Phase II) till date is Rs. 7998.42 Crore. This link project is planned to be completed by March, 2030.

 

Details Of Significant Progress Made In Interlinking Of Rivers (ILR) Programme In Last 5 Years:

  1. The Pre-Feasibility Report (PFR) of 1 link project, Feasibility Reports (FRs) of 9 link projects and Detailed Project Reports (DPRs) of 7 link projects have been completed.

  2. The Ken-Betwa link project is the first link project under NPP, for which implementation has been initiated in the year 2022, after getting approval from the Govt. of India in December, 2021. Techno economic clearance and most of the statutory clearances have been obtained for the link project.

  3. Draft Memorandum of Understanding (MoU) for implementation of Par-Tapi-Narmada link and Damanganga-Pinjal link projects was prepared and sent to the Governments of Maharashtra and Gujarat in September, 2017.

  4. DPR for Godavari-Cauvery link project (comprising of three link projects) was completed by NWDA and sent to the concerned States in April, 2021. An alternative study for Godavari-Cauvery link project as per decision taken during consultation meeting held in February, 2022 with the party States has been completed by NWDA and a Technical Feasibility Report (TFR) for the same has been submitted to the party States in January, 2023.

  5. In the meeting of the Special Committee on Inter Linking of Rivers held on 13.12.2022, the proposal for making the Phase-I of Modified Parbati-Kalisindh-Chambal link duly integrated with the Eastern Rajasthan Canal Project as part of the NPP and declaring this project as one of the priority link projects has been approved. Draft PFR and Draft MoU for the proposal have been completed and sent to the concerned States in January, 2023.

  6. System studies for Mahanadi-Godavari link project has also been completed.