रेन वाटर हार्वेस्टिंग: जल संकट का स्थायी समाधान या अधूरी नीति?
प्रस्तावना
भारत विश्व की लगभग 18% आबादी का घर है, जबकि विश्व के मात्र 4% मीठे जल संसाधन ही भारत के पास हैं। बढ़ती जनसंख्या, अनियोजित शहरीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन और वर्षा जल के अपर्याप्त संरक्षण के कारण देश के अनेक क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।
हर वर्ष भारत में लगभग 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर वर्षा होती है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा नदियों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है। यदि इस वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण किया जाए तो देश की जल समस्याओं का बड़ा हिस्सा हल किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है।
भारत में जल संकट की भयावह स्थिति
प्रमुख तथ्य
- नीति आयोग की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 60 करोड़ भारतीय जल संकट से प्रभावित हैं।
- भारत दुनिया में भूजल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
- देश के लगभग 70% जल स्रोत किसी न किसी स्तर पर प्रदूषित हैं।
- केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के अनुसार अनेक राज्यों में भूजल स्तर प्रतिवर्ष 0.5 से 1 मीटर तक नीचे जा रहा है।
- वर्ष 2050 तक भारत की जल मांग वर्तमान उपलब्धता से कहीं अधिक होने की आशंका है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग क्या है?
वर्षा के जल को संग्रहित करके उसे भविष्य में उपयोग हेतु सुरक्षित रखने या भूजल पुनर्भरण (Ground Water Recharge) के लिए भूमि में पहुंचाने की प्रक्रिया को रेन वाटर हार्वेस्टिंग कहा जाता है।
प्रमुख तरीके
- रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग
- रिचार्ज पिट
- परकोलेशन टैंक
- चेक डैम
- तालाब एवं जलाशय पुनर्जीवन
- रिचार्ज कुएं
समस्या की जड़ (Root Cause)
1. भूजल का अत्यधिक दोहन
कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए लगातार भूजल निकाला जा रहा है, जबकि पुनर्भरण पर्याप्त नहीं हो रहा।
2. कंक्रीट का बढ़ता जंगल
शहरों में खुली जमीन कम होती जा रही है। वर्षा जल जमीन में समाहित होने के बजाय सीधे नालों में बह जाता है।
3. नीति का कमजोर क्रियान्वयन
अनेक राज्यों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य तो है लेकिन उसका निरीक्षण और अनुपालन कमजोर है।
4. जन-जागरूकता का अभाव
लोग इसे अतिरिक्त खर्च समझते हैं, निवेश नहीं।
5. विभागों के बीच समन्वय की कमी
नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जल विभाग और पर्यावरण विभाग के बीच समन्वित कार्यप्रणाली का अभाव है।
सरकार की प्रमुख पहलें
1. जल शक्ति अभियान
केंद्र सरकार द्वारा वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु चलाया गया राष्ट्रीय अभियान।
2. अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana)
भूजल प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु लगभग ₹6000 करोड़ की योजना।
3. अमृत मिशन (AMRUT)
शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और जल संरक्षण हेतु विशेष कार्यक्रम।
4. जल जीवन मिशन
हर घर जल उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल स्रोतों के संरक्षण पर भी बल।
5. कैच द रेन अभियान
"जहां भी गिरे, जब भी गिरे, बारिश का पानी संजोएं" के सिद्धांत पर आधारित राष्ट्रीय अभियान।
वर्तमान व्यवस्था की कमियां
1. केवल कागजी अनुपालन
कई भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित तो दिखाया जाता है, लेकिन वह कार्यरत नहीं होता।
2. निरीक्षण व्यवस्था कमजोर
स्थापना के बाद नियमित ऑडिट और निगरानी नहीं होती।
3. प्रोत्साहन की कमी
जो लोग प्रभावी जल संचयन करते हैं उन्हें पर्याप्त आर्थिक लाभ या टैक्स छूट नहीं मिलती।
4. दंडात्मक व्यवस्था अप्रभावी
नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई बहुत सीमित है।
5. डेटा आधारित निगरानी का अभाव
कितना पानी संग्रहित हुआ और कितना भूजल रिचार्ज हुआ, इसका राष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय डेटा उपलब्ध नहीं है।
समाधान
1. राष्ट्रीय रेन वाटर हार्वेस्टिंग मिशन
स्वच्छ भारत मिशन की तर्ज पर एक समयबद्ध राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए।
2. डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
सभी बड़े भवनों और संस्थानों को ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।
3. भूजल रिचार्ज क्रेडिट
जो व्यक्ति या संस्था अधिक भूजल रिचार्ज करे उसे "वाटर क्रेडिट" प्रदान किया जाए।
4. संपत्ति कर में छूट
प्रभावी रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाने वाले भवनों को 10-20% तक संपत्ति कर में छूट दी जा सकती है।
5. CSR फंड का उपयोग
कंपनियों को जल संरक्षण परियोजनाओं में CSR निवेश हेतु प्रोत्साहित किया जाए।
सरकार की भूमिका
- मजबूत नीति निर्माण
- डिजिटल ट्रैकिंग
- आर्थिक प्रोत्साहन
- कठोर अनुपालन
- जन जागरूकता अभियान
संस्थाओं की भूमिका
RWA (Resident Welfare Association)
- प्रत्येक सोसाइटी में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करना।
- वार्षिक जल ऑडिट कराना।
- जल संरक्षण समिति बनाना।
स्कूल एवं कॉलेज
- छात्रों को जल संरक्षण का व्यवहारिक प्रशिक्षण देना।
- कैंपस में मॉडल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करना।
उद्योग
- "Zero Water Waste" लक्ष्य अपनाना।
- भूजल रिचार्ज परियोजनाओं में निवेश करना।
प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी
- घर में वर्षा जल संचयन अपनाना।
- पानी की बर्बादी रोकना।
- स्थानीय जल स्रोतों को स्वच्छ रखना।
- समुदाय स्तर पर जल संरक्षण अभियानों में भाग लेना।
नीतिगत बदलाव के सुझाव
1. भवन स्वीकृति से जोड़ना
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बिना भवन पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) न दिया जाए।
2. वार्षिक जल ऑडिट अनिवार्य
500 वर्गमीटर से बड़े सभी भवनों के लिए।
3. वाटर परफॉर्मेंस रेटिंग
ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग की तरह जल संरक्षण रेटिंग लागू हो।
4. राष्ट्रीय जल संरक्षण डैशबोर्ड
सभी राज्यों का वास्तविक समय डेटा सार्वजनिक हो।
5. जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना
जिस प्रकार स्वच्छ भारत अभियान ने जन भागीदारी बढ़ाई, उसी प्रकार "जल सुरक्षित भारत अभियान" प्रारंभ किया जाए।
विजन 2030
- प्रत्येक शहरी भवन में कार्यशील रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।
- भूजल स्तर में निरंतर सुधार।
- जल संकटग्रस्त जिलों में 50% तक कमी।
- वर्षा जल का कम से कम 25% स्थानीय स्तर पर संग्रहण।
विजन 2047: विकसित भारत
- जल आत्मनिर्भर भारत।
- प्रत्येक शहर और गांव में वैज्ञानिक जल प्रबंधन।
- भूजल दोहन और पुनर्भरण के बीच संतुलन।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन।
निष्कर्ष
रेन वाटर हार्वेस्टिंग केवल एक तकनीक नहीं बल्कि जल सुरक्षा का राष्ट्रीय आंदोलन है। सरकार नीति बना सकती है, संस्थाएं व्यवस्था विकसित कर सकती हैं, लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब प्रत्येक नागरिक इसे अपना कर्तव्य समझकर अपनाए। यदि आज हम वर्षा की प्रत्येक बूंद को बचाने का संकल्प लें, तो 2047 का विकसित भारत जल संकट से मुक्त और जल समृद्ध राष्ट्र बन सकता है।
"जल है तो कल है, और वर्षा जल संचयन है तो सुरक्षित भविष्य है।"

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