मेक इन इंडिया (2014–2026) और आत्मनिर्भर भारत: भारत को रक्षा विनिर्माण महाशक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन
प्रस्तावना
साल 2014 में शुरू हुई "मेक इन इंडिया" पहल और 2020 के बाद गति पकड़ने वाले "आत्मनिर्भर भारत अभियान" ने भारत के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव लाया है। एक समय दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक माना जाने वाला भारत आज रक्षा उत्पादन, निर्यात और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है।
रक्षा क्षेत्र केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह GDP वृद्धि, रोजगार सृजन, FDI आकर्षण, MSME विकास, तकनीकी नवाचार और निर्यात आय का भी प्रमुख स्रोत बन चुका है।
2014 बनाम 2026: रक्षा क्षेत्र का परिवर्तन
| संकेतक | 2013-14 | 2025-26 |
|---|---|---|
| रक्षा उत्पादन | ₹43,746 करोड़ | ₹1.78 लाख करोड़ |
| रक्षा निर्यात | ₹686 करोड़ | ₹38,424 करोड़ |
| निर्यात देश | 20-30 | 100+ |
| निजी क्षेत्र योगदान | सीमित | 24% |
| औद्योगिक लाइसेंस | कम | 788+ लाइसेंस |
रक्षा उत्पादन 2014 की तुलना में लगभग 4 गुना बढ़ चुका है तथा निर्यात में 50 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
GDP में रक्षा विनिर्माण का योगदान
भारत की GDP लगभग ₹330 लाख करोड़ (2025-26 अनुमान) के आसपास है।
रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है, जो प्रत्यक्ष रूप से GDP का लगभग 0.5% योगदान देता है। यदि रक्षा सप्लाई चेन, MSME, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और रोजगार प्रभाव को शामिल किया जाए तो इसका कुल आर्थिक प्रभाव 1.5% से 2% GDP तक पहुँच सकता है।
गुणक प्रभाव (Multiplier Effect)
रक्षा क्षेत्र में निवेश:
- उच्च तकनीक उद्योगों को बढ़ावा देता है
- R&D खर्च बढ़ाता है
- रोजगार उत्पन्न करता है
- विदेशी मुद्रा अर्जित करता है
- आयात बिल कम करता है
रक्षा क्षेत्र में FDI सुधार
सरकार ने रक्षा क्षेत्र में FDI नियमों को उदार बनाया:
प्रमुख सुधार
- ऑटोमैटिक रूट से 74% FDI
- सरकारी मंजूरी से 100% FDI
- रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर
- लाइसेंसिंग प्रक्रिया सरलीकरण
- निर्यात मंजूरी का डिजिटलीकरण
इन सुधारों के कारण वैश्विक रक्षा कंपनियों की भारत में रुचि बढ़ी है।
प्रमुख सरकारी पहल
1. मेक इन इंडिया
उद्देश्य:
- आयात कम करना
- घरेलू विनिर्माण बढ़ाना
- रोजगार सृजन
2. आत्मनिर्भर भारत
उद्देश्य:
- स्वदेशी हथियार निर्माण
- विदेशी निर्भरता कम करना
3. रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर
उत्तर प्रदेश रक्षा कॉरिडोर
- लखनऊ
- कानपुर
- झांसी
- अलीगढ़
- आगरा
- चित्रकूट
तमिलनाडु रक्षा कॉरिडोर
- चेन्नई
- कोयंबटूर
- सलेम
- होसुर
- तिरुचिरापल्ली
4. iDEX (Innovation for Defence Excellence)
स्टार्टअप और MSME को रक्षा तकनीक विकास हेतु प्रोत्साहन।
5. Positive Indigenisation Lists
सरकार ने हजारों रक्षा वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाकर घरेलू उद्योगों को अवसर प्रदान किए हैं।
प्रमुख रक्षा परियोजनाएँ
वायु सेना
- Tejas Mk1A
- AMCA Fighter Program
- CATS Warrior Drone
नौसेना
- Project 75(I) Submarines
- Indigenous Aircraft Carrier
- INS Dunagiri
- INS Agray
- INS Sanshodhak
थल सेना
- ATAGS Howitzer
- Pinaka Rocket System
- Arjun Tank Upgrade
मिसाइल कार्यक्रम
- BrahMos
- Akash
- Astra
- Pralay
निवेश अवसर (Investment Opportunities)
आने वाले दशक में सबसे अधिक अवसर निम्न क्षेत्रों में होंगे:
1. ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन सिस्टम
अनुमानित निवेश:
₹40,000 करोड़+
2. AI एवं रक्षा सॉफ्टवेयर
₹25,000 करोड़+
3. साइबर सुरक्षा
₹20,000 करोड़+
4. सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स
₹1 लाख करोड़+
5. नौसेना जहाज निर्माण
₹2 लाख करोड़+
6. एयरोस्पेस एवं इंजन निर्माण
₹1.5 लाख करोड़+
2030 तक का लक्ष्य
सरकार और रक्षा मंत्रालय के विभिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर संभावित लक्ष्य:
| क्षेत्र | 2030 लक्ष्य |
|---|---|
| रक्षा उत्पादन | ₹3 लाख करोड़+ |
| रक्षा निर्यात | ₹50,000 करोड़+ |
| रोजगार | 50 लाख+ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष |
| MSME भागीदारी | 25,000+ |
| GDP योगदान | 2% तक |
रक्षा निर्यात के लिए ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य पहले ही घोषित किया जा चुका है।
2047 का विजन: विकसित भारत
यदि वर्तमान वृद्धि दर बनी रहती है तो 2047 तक भारत:
संभावित उपलब्धियाँ
- विश्व के शीर्ष 5 रक्षा निर्यातकों में स्थान
- ₹10-12 लाख करोड़ वार्षिक रक्षा उत्पादन
- ₹2-3 लाख करोड़ रक्षा निर्यात
- 1 करोड़ से अधिक रोजगार
- रक्षा क्षेत्र का GDP में 3% तक योगदान
सरकार की संभावित आय
रक्षा क्षेत्र के विस्तार से:
प्रत्यक्ष लाभ
- GST संग्रह
- कॉर्पोरेट टैक्स
- आयकर
- निर्यात आय
अप्रत्यक्ष लाभ
- विदेशी मुद्रा बचत
- आयात बिल में कमी
- उच्च वेतन रोजगार
- MSME वृद्धि
अनुमान है कि 2047 तक रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र से सरकार को प्रतिवर्ष लाखों करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त हो सकता है।
चुनौतियाँ
प्रमुख बाधाएँ
- इंजन तकनीक में निर्भरता
- R&D व्यय कम
- रक्षा खरीद प्रक्रिया में देरी
- निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी
- उच्च तकनीकी कौशल की कमी
नीतिगत सुझाव
1. Defence PLI Scheme 2.0
रक्षा क्षेत्र हेतु विशेष PLI प्रोत्साहन।
2. Defence Innovation Fund
₹50,000 करोड़ का राष्ट्रीय रक्षा नवाचार कोष।
3. Defence Export Promotion Authority
निर्यात बढ़ाने हेतु समर्पित एजेंसी।
4. AI और Robotics Mission
रक्षा तकनीक में वैश्विक नेतृत्व हेतु।
5. Defence Manufacturing Universities
विशेषीकृत कौशल विकास संस्थान।
निष्कर्ष
"मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" केवल नीतियाँ नहीं, बल्कि भारत को रक्षा आयातक से रक्षा निर्यातक राष्ट्र बनाने का राष्ट्रीय अभियान हैं। 2014 से 2026 के बीच रक्षा उत्पादन ₹43,746 करोड़ से बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ और निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुँचना इस परिवर्तन का स्पष्ट प्रमाण है।
यदि भारत 2030 तक ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन और 2047 तक वैश्विक रक्षा विनिर्माण महाशक्ति बनने का लक्ष्य हासिल करता है, तो यह केवल राष्ट्रीय सुरक्षा ही नहीं बल्कि $10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था और विकसित भारत 2047 के सपने को भी मजबूत आधार प्रदान करेगा। 🇮🇳
Make in India’ & ‘Aatmanirbharta’ in defence
mantras of self-sufficiency and indigenizationAll modernisation requirements of the three Services & Indian Coast Guard to be indigenously sourced irrespective of nature of procurement
Requirement of Integrity Pact Bank Guarantee dispensed with to reduce financial burden on domestic industry
Integrity Pact Bank Guarantee (IPBG)
Earnest Money Deposit (EMD)
Defence Acquisition Procedure (DAP)
Defence Acquisition Council (DAC)
iDEX framework
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