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Thursday, February 11, 2021

Noida can now build satellite city, 80 villages set to come under it

To bridge the gap between the main city and satellite city, a wide expressway will be planned within a short span of time NOida authority have responsibility to shape up one of the most important investment regions of the state. It is a good step in future progress of the district." 80 villages — 60 in the neighbouring Bulandshahr district and 20 in Gautam Budh Nagar — will have to be developed like a satellite city villages in Gautam Budh Nagar are situated at a distance of more than 40km from Mahamaya flyover. Dadri-Noida-Ghaziabad Investment Region, a crucial destination to attract industrialists and entrepreneurs

SBI's savings plus account

SBI's savings plus account SBI's Savings Plus Account is a savings bank account linked to Multi Option Deposit Scheme (MODS), wherein surplus fund above a threshold limit from the savings bank account is transferred automatically to term deposits opened in multiples of ₹ 1000. A monthly average balance (MAB) requirement is applicable for maintaining SBI's Savings Plus account.

Monday, February 8, 2021

253. सरकारी और प्राइवेट रोजगार कानून और अधिकार - सरकारी exams की same financial year में एडवरटाइजिंग,written टेस्ट, इंटरव्यू ओर भर्ती पूरी करने की बाध्यता संबधित कानून। और देर होने पर perday skilled वर्कर्स की मिनिमम pay जितना बेरोजगारी भत्ता डायरेक्ट खाते में देने की बाध्यता सम्बंधित कानून व्यवस्था।


सरकारी और प्राइवेट रोजगार कानून और अधिकार - सरकारी exams की same financial year में एडवरटाइजिंग,written टेस्ट, इंटरव्यू ओर भर्ती पूरी करने की बाध्यता संबधित कानून। और देर होने पर perday skilled वर्कर्स की मिनिमम pay जितना बेरोजगारी भत्ता डायरेक्ट खाते में देने की बाध्यता सम्बंधित कानून व्यवस्था।

16 digit unique ID for land in India जमीन धोखाधड़ी रकने का एक सार्थक प्रयास।

16 digit unique ID for land in India जमीन धोखाधड़ी रकने का एक सार्थक प्रयास।

Ref Hindustan 7 feb 2021

Tuesday, February 2, 2021

Company Matters -One Person Companies (OPCs)-Allowing their conversion into any other type of company at any time

To decriminalize the Limited Liability Partnership (LLP) Act, 2008 Easing Compliance requirement of Small companies by revising their definition under Companies Act, 2013 by increasing their thresholds for Paid up capital from “not exceeding Rs. 50 Lakh” to “not exceeding Rs. 2 Crore” and turnover from “not exceeding Rs. 2 Crore” to “not exceeding Rs. 20 Cr”. Promoting start-ups and innovators by incentivizing the incorporation of One Person Companies (OPCs): Allowing their growth without any restrictions on paid up capital and turnover Allowing their conversion into any other type of company at any time, Reducing the residency limit for an Indian citizen to set up an OPC from 182 days to 120 days and Allowing Non Resident Indians (NRIs) to incorporate OPCs in India.

One Nation One Ration Card

 

 

scheme for beneficiaries to claim rations anywhere in the country - migrant workers to benefit the most Scheme implementation so far covered 86% of beneficiaries across 32 States and UTs Remaining 4 states to be integrated in next few months

 

Wednesday, January 13, 2021

कर चोरी .. ब्लैक मनी - बेनामी संपत्ति के मामले में एक करोड़ रुपये और विदेशों में कालाधन रखने सहित अन्य कर चोरी के मामले में पांच करोड़ रुपये तक का पुरस्कार -आयकर विभाग

कर चोरी .. ब्लैक मनी


आयकर विभाग ने एक नई ‘ऑनलाइन’ सुविधा शुरू की है जिसके माध्यम से कोई भी किसी व्यक्ति अथवा कंपनी की विदेशों में अवैध संपत्ति, बेनामी संपत्ति अथवा कर चोरी के बारे में सरकार को जानकारी दे सकता है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को यह कहा। सीबीडीटी ने कहा है कि उसके ई-फाइलिंग पोर्टल https://www.incometaxindiaefiling.gov.in पर सोमवार को ‘कर चोरी अथवा बेनामी संपत्ति होल्डिंग की जानकारी देने संबंधी’ लिंक को चालू कर दिया गया है।

इस सुविधा के तहत स्थायी खाता संख्या (पैन) अथवा आधार नंबर रखने वाला या फिर ऐसा व्यक्ति जिसके पास पैन अथवा आधार नहीं भी है वह शिकायत दायर कर सकता है। इस ऑनलाइन सुविधा में ओटीपी आधारित वैद्यीकरण प्रक्रिया के तहत कोई भी आयकर कानून 1961 के उल्लंघन, अघोषित संपत्ति कानून और बेनामी लेनदेन बचाव कानून के तहत तीन अलग अलग फॉर्म में शिकायत दर्ज की जा सकती है।

5 करोड़ रुपये का इनाम
शिकायत दर्ज होने के बाद विभाग प्रत्येक शिकायत के लिए एक विशिष्ट नंबर देगा और उससे शिकायतकर्ता वेबलिंक पर उसके द्वारा की गई शिकायत पर होने वाले कार्रवाई की स्थिति देख सकेगा। इस नई सुविधा में कोई भी व्यक्ति ‘मुखबिर अथवा भेदिया’ भी बन सकता है और वह इनाम पाने का भी हकदार होगा। वर्तमान में लागू योजना के मुताबिक बेनामी संपत्ति के मामले में एक करोड़ रुपये और विदेशों में कालाधन रखने सहित अन्य कर चोरी के मामले में कुछ शर्तों के साथ पांच करोड़ रुपये तक का पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है।

https://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/if-you-know-black-money-holders-complaint-here-and-get-rs-5-crore-reward/articleshow/80242850.cms

Monday, January 4, 2021

NPS subscribers can now use online mode to exit the scheme.Pension fund regulator Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA), on Wednesday, said the subscribers can now use online mode to exit the National Pension System (NPS)

Pension fund regulator Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA), on Wednesday, said the subscribers can now use online mode to exit the National Pension System (NPS)


https://www.timesnownews.com/amp/business-economy/personal-finance/article/nps-subscribers-can-now-use-online-mode-to-exit-the-scheme-here-s-how/701166

Now in addition to the existing offline process as mentioned above, the subscribers shall also have an online option to submit the withdrawal documents and authorizing their withdrawal request by using OTP/e-sign to make the process seamless in a paperless manner.


Sunday, November 22, 2020

फोन काल से पहले के विज्ञापन कैसे जानलेवा है।

किसी इमरजेंसी सिचुऐसन में फोन कॉल करने पर फोन पर विज्ञापन सुनने से ज्यादा बात होना कितना जरुरी है देखें - 

1. एक अकेली लड़की अपराधियों के चंगुल में फंसी उसे 5 सेकण्ड का वक्त मिला फोन करने का, लेकिन वो फोन नहीं कर पाई वो सिर्फ विज्ञापन ही सुन पाई ! 

2. कोई इंसान आपकी पहचान वाला बाइक से अपने परिवार को साथ कहीं जा रहा है, और आपकी नजर पड़ जाती है कि पीछे बैठी महिल का दुपट्टा बाइक के पहिये में फंसने ही वाला है, आपने आगाह करने के लिये फोन किया, लेकिन  फोन पर विज्ञापन ही बजता रहा, और जब फोन लगा तब तक देर हो गई !! 

2. एक अपराधी किसी के घर के सदस्यों को घायल करके बच्चे का अपहरण करके भाग रहा है, पड़ोसी ने मदद के लिये फोन किया, फोन नहीं लगा, फोन पर विज्ञापन ही चलता रहा, इतने में अपराधी फरार हो गया !! 

3. एक डंपर का पीछे का डाला अपने आप उठने लगा, पीछे पीछे गाड़ी मालिक था, मालिक ने ड्राइवर को फोन किया फोन नहीं लगा, विज्ञापन ही चलता रहा, परिणाम ये हुआ कि डंपर का डाला पूरी तरह ऊपर उठ गया और हाईटेंशन लाइन से टकरा गया और बड़ी दुर्घटना हो गई !! 

ऐसी एक हजार सिचुऐसन हैं जब जीवन बचाने के लिये जो विज्ञापन चलाया जा रहा है वो कैंसे जानलेवा साबित हो रहा है !! 

आपको उचित लगे तो कृपया फोन काल से पहले के विज्ञापन हटवाने के लिये मुहिम को व्यापक बनाऐं..

Sunday, November 15, 2020

नए रोजगार सृजन योजना - 2 साल तक EPF का पैसा भारत सरकार भरेगी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण । 13 नवम्बर 2020
अगले दो साल तक कंपनी ओर कर्मचारी द्वारा  EPF में दिया जाने वाला पैसा सरकार भरेगी।
नई भर्तीया करने वाले संस्थानों EPF में सब्सिडी दी जाएगी।
15000/- से कम वेतन पाने वालों को इस स्कीम का लाभ मिलेगा।


दुर्गा शक्ति aap महिलाए मोबाइल में इस app को डाउनलोड कर ले सकती है पुलिस से मदद। हरयाणा पुलिस का उत्तम प्रयास।

दुर्गा शक्ति app महिलाए मोबाइल में इस app को डाउनलोड कर ले सकती है पुलिस से मदद। 


Promote safety and empowerment of women in the State, Haryana

The App enables any woman/girl in distress to
seek immediate help of the Police in case of any emergency. Any
woman/girl can download the App and register herself. In case of need,
when she presses the “Alert” button on the App, the Woman Helpline
unit of the district Police will know the location and relevant details of the
victim woman/ girl and immediately respond based on the situation.

Thursday, October 22, 2020

808. Critics, Penalty on Employer on non payment of Gratuity or Harassments of employee gratuity settlement.- यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें

उपदान संदाय अधिनियम 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972)

उपदान संदाय अधिनियम को 10 से अधिक कर्मचारियों की किसी भी संस्था संगठन पर आवश्यक रूप से लागू किया है।

Gratuity : नौकरी पेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक द्वारा दी जाती है जिस नियोजक के पास में व्यक्ति नौकरी कर रहा था।


Penalty on Employer on non Payment of Gratuity or Harassments of employee for settlement of Gratuity

अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत कुछ अपराध हैं। उनके दंड भी रखे गए यदि कोई नियोजक इस अधिनियम के अंतर्गत बताए गए उपदान का संदाय करने से बचता है या बचने का प्रयास करता है जब कोई ऐसी विवेचना बनाता है, जिससे वह उपदान का संदाय करने से बच जाए तो यह इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध है इसके लिए 6 माह तक का कारावास रखा गया है।

किसी कर्मचारी को उपदान किए जाने के संबंध में कोई नुकसान पहुंचाया जाए तो ऐसी परिस्थिति में 1 वर्ष तक का कारावास रखा गया है। ऐसा कारावास नियोजक यानी संस्था के कर्ताधर्ता को दिया जाएगा।

Time for Gratuity Settlement by Employer - 30 Days


अधिनियम के अंतर्गत उपदान का संदाय करने हेतु नियोजक को 30 दिन का समय दिया गया है। कर्मचारी जिस दिन से उपदान के संदाय हेतु आवेदन जमा करता है उससे 30 दिन की अवधि के भीतर नियोजक को उपदान का संदाय कर देना चाहिए। यदि वह उपदान का संदाय इस समय अवधि के भीतर नहीं करता है। उसके बाद कुछ समय और लेता है तो ऐसी परिस्थिति में नियोजक को कर्मचारी को एक निश्चित दर से ब्याज देना होगा।


Employee क्या कर सकता हैं  यदि  Employer  Gratuity settlement करने  में  दिक़्क़्क़त  करे 


यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें

उस क्षेत्र के भीतर, जहां कंपनी का ऑफिस स्थित है, के पास ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकरण या केंद्रीय श्रम आयुक्त के पास सभी जरूरी कागजात भेजकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए अपने वकील के माध्यम से पूर्व ऑफिस को नोटिस भेजे और श्रम न्यायालयों (Labour Courts) में मुकदमा दर्ज कराये। जिस दिन कर्मचारी ग्रेच्युटी निकालने के लिए आवेदन करता है उस तारिख से 30 दिन के अन्दर उसे भुगतान मिल जाना चाहिए। यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी राशि पर साधारण ब्याज की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा. यदि कंपनी ऐसा नही करती है तो उसे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम,1972 (Payment of Gratuity Act,1972) के उल्लंघन का दोषी माना जायेगा जिसमे उसे 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है।

Gratuity की वसूली कैसे  होती  है। 


यदि कर्मचारी द्वारा नियोजक को उपदान के संदाय हेतु आवेदन किया जाता है और नियोजक कर्मचारी को उपदान का संदाय नहीं करता है। ऐसी परिस्थिति में नियोजक की शिकायत यदि नियंत्रक अधिकारी को की जाती है तो वह प्राधिकारी जिले के कलेक्टर को यह प्रमाण पत्र जारी करेगा कि वह भू राजस्व की वसूली की तरह ग्रेज्युटी की रकम को वसूल करें तथा वसूल करके उस रकम को कर्मचारी को प्रदान करे।


सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 (Social Security 2019)  चैप्टर 5 : 

सामाजिक सुरक्षा संहिता में कहा गया है कि कर्मचारी के हर पूर्ण साल की सर्विस पर ग्रैच्युटी 15 दिन की सैलरी पर आधारित होती है. हर पूरे साल या 6 महीने से ज्यादा के समय के लिए कर्मचारी को ग्रेच्युटी 15 दिन की सैलरी की दर पर या केंद्र सरकार के किसी नोटिफिकेशन में तय किए गए दिनों के आधार पर मिलेगी.

ग्रेच्युटी कब मिलती है? : 1. सेवानिवृत्ति होने पर 2. दुर्घटना या बीमारी की वजह से मौत या अपंगता के कारण 3. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर 4. छंटनी होने पर 5. इस्तीफ़ा देने पर 6. नौकरी से निकाल दिया जाने पर।

ग्रेच्युटी लेने के लिए कौन सा फॉर्म भरना होता है? : कंपनी को ज्वाइन करते वक़्त कर्मचारी को फॉर्म “F” भर कर उसमे अपने घर के किसी भी सदस्य को नॉमिनी बनाना होता है। यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी है कि यदि कंपनी घाटे में चल रही हो तो भी उसे ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करना होगा। 

Calculation of Gratuity

15 X {(Basic Salary+ DA+ Sales Commission) X duration of work (in years)  } / 26

15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) भाग 26 यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन है।

Maximum Amount of Gratuity

2018 में के संशोधन के बाद इस सीमा को बढ़ाकर ₹2000000 कर दिया गया है अब मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक ₹2000000 तक ग्रेच्युटी की रकम हो सकती है।

कौन   सी कंपनी Gratuity  देने के लिए  वचनबद्ध होनी चाहिए। 

नियोजक जिनमें कर्मचारियों की संख्या 10 से अधिक है, वह इस अधिनियम के अधीन नियोजक कहलाएंगे।

10 कर्मचारियों से अधिक काम करने वाली संस्थाएं इस अधिनियम के अंतर्गत शासित होगी तथा उन्हें अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की धनराशि देना होगी।

कारखाने, खदान, बागान, दुकान और वह सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्था जो केंद्रीय राज्य सरकारों तथा लोकल अथॉरिटी आदि। 

ग्रेच्युटी पर कितना कर लगता है? : निजी कर्मचारियों को जब ग्रेच्युटी उनके नौकरी करते समय (रिटायरमेंट के पहले तक) मिलती है, तो उनकी ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है क्योंकि यह उनके वेतन के अंतर्गत आता है लेकिन सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी उनकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु या पेंशन के तौर मिलती है और उस पर टैक्स भी नहीं लगता है। श्रम मंत्रालय के नये नियमों के अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपए तक के कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र होंगे इससे पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी।

1961 की सेवा नियमावली में ग्रेच्युटी रोकने का कोई उपबन्ध नहीं है. 

आपराधिक मुकदमा चल रहा हो तो रोकी जा सकती है ग्रेच्युटी: HC

विधिविरुद्ध गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में याची को मिलने वाली ग्रेच्युटी इसी आधार पर रोक दी गयी। 

Reference: https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/allahabad-allahabad-high-court-says-gratuity-can-be-stopped-if-criminal-prosecution-against-person-1122976.html

Thursday, October 15, 2020

औद्योगिक टाउनशिप

Rural Development


Rural Development


नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन




इस मिशन में नागरिकों का एक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें उनका हेल्थ रिकार्ड यानी उनकी सेहत और बीमारी से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें देखा जा सके। इस तरह विकसित होने वाले डिजिटल इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की मदद से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इसमें भारतीय नागरिकों, स्वास्थ्य पेशेवरों, सार्वजनिक अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के संस्थानों के बीच सेहत की जांच, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाला एक पुख्ता नेटवर्क बन सकेगा। इससे लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता आ सकती है और बीमारियों के त्वरित एवं सटीक इलाज की व्यवस्था बन सकती है।

पुरानी बीमारियों के इलाज का रिकार्ड मौजूद नहीं होने पर कई बार गलत इलाज की चपेट में भी आ जाते हैं। ऐसे में मर्ज से बड़ी समस्या उसके निदान की प्रक्रिया हो जाती है। यह तथ्य भी कई बार सामने आ चुके हैं कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बीमारियों के इलाज में ही गरीब हुआ जा रहा है, क्योंकि अक्सर उन्हें यही नहीं पता चलता है कि आखिर उन्हें हुआ क्या है? किस बीमारी का क्या इलाज है और कहां इलाज हो सकता है? इसकी जानकारी नहीं होने पर मरीज गलत हाथों में पड़ जाते हैं। ऐसे में सही इलाज की पहली सीढ़ी मरीज और उसके तीमारदार को इसकी जानकारी मिलना है कि आखिर बीमारी क्या है या मरीज को इससे पहले क्या मर्ज था और उसका क्या इलाज था?

डाटा से आएगी नई क्रांति : आमतौर पर ऐसे सारे रिकार्ड रखने की जिम्मेदारी व्यक्तिगत मानी जाती है, लेकिन सरकार के स्तर पर महसूस किया गया कि अगर लोगों की बीमारियों का कोई डाटाबेस तैयार हो सके और संबंधित जानकारियों को एक डिजिटल कार्ड में समाहित किया जा सके तो इस क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है। भारत ऐसी व्यवस्था करने वाला दुनिया का पहला देश नहीं है, बल्कि कई अन्य देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है। जैसे ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में डिजिटल हेल्थ रिकार्ड की व्यवस्था और अमेरिका में कायम नेशनल हेल्थ सíवस आदि का इस संबंध में अध्ययन किया गया। उल्लेखनीय है कि डिजिटल हेल्थ कार्ड जैसी योजना की प्रेरणा के पीछे एक भूमिका प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना की है। तीन साल पहले 25 सितंबर, 2018 को देश के 25 राज्यों में औपचारिक रूप से आयुष्मान योजना को जब लागू किया गया तो यह उम्मीद जगी थी कि अब देश के वंचित, उपेक्षित और गरीब लोगों को बीमारियों के इलाज में कोई समस्या नहीं होगी।

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत पिछले साल अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप में हुई थी, लेकिन अब पूरे देश में इसे लागू किया जा रहा है।
हमारे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत ही लचर हालत में हैं। यहां सरकारी चिकित्सा सेवाओं में अक्सर लापरवाही, संसाधनों का दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार देखा जाता है। निजी क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं के मानक तय नहीं हैं। निजी अस्पताल जांच, टेस्ट, इलाज और दवाओं आदि के नाम पर अनाप-शनाप रकम वसूलते हैं। इसलिए डिजिटल हेल्थ कार्ड और नेशनल डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से तमाम अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद की जा रही है,

जहां तक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से जुड़े यूनिक हेल्थ कार्ड की बात है तो अभी इसके कई फायदे एक साथ दिख रहे हैं। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक बार बीमारी की कोई जांच हो जाने और उसका इलाज शुरू हो जाने के बाद देश में कहीं भी जाने पर कोई जांच रिपोर्ट, डाक्टर की पर्ची, बीमारी के पुराने रिकार्ड आदि संभाल कर रखने और ले जाने की जरूरत नहीं होगी। ये सभी सूचनाएं हेल्थ कार्ड में दर्ज होंगी और चिकित्सक किसी मरीज की आइडी से जान जाएंगे कि मरीज पहले किन बीमारियों की चपेट में रहा है और उसका किस स्तर पर कहां एवं कितना इलाज हुआ है। आधार कार्ड या मोबाइल नंबर के माध्यम से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की वेबसाइट पर हेल्थ आइडी शीर्षक के तहत सभी जानकारियां देकर यह कार्ड बनाया जा सकता है और इससे जुड़ी सुविधाओं का लाभ उठया जा सकता है।

हेल्थ कार्ड या आइडी के माध्यम से लोग किसी भी राज्य में अस्पतालों, पैथ लैब और फार्मा कंपनियों में अपनी सेहत से जुड़ी जानकारियां अपनी मर्जी के हिसाब से ले सकेंगे। यानी इनमें कोई बाहरी व्यक्ति उनकी मंजूरी के बिना दखल नहीं दे सकेगा। हेल्थ कार्ड इस योजना का एक छोटा, किंतु सुविधापूर्ण हिस्सा है। इस योजना के फायदों को समझना हो तो इसे समग्रता में देखना होगा। असल में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत देश में जो डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा, उससे आम नागरिकों के अलावा स्वास्थ्य पेशेवरों, सरकारी और निजी क्षेत्र के अस्पतालों-संगठनों आदि के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अर्जति करना और उनकी निगरानी करना आसान हो जाएगा। मोटे तौर पर यह योजना चार महत्वपूर्ण हिस्सों में विभाजित की जाएगी। इसमें पहले चरण पर नागरिकों का डिजिटल हेल्थ कार्ड (आइडी) बनाया जाएगा। इसके बाद एक बड़ी भूमिका डिजिटल डाक्टर, स्वास्थ्य सुविधा पहचानकर्ता और निजी स्वास्थ्य रिकार्ड की रहेगी।

इस मिशन में देश के प्रत्येक डाक्टर को डिजिटल डाक्टर के रूप में एक विशेष पहचानपत्र भी दिया जाएगा, जो उनके मौजूदा पंजीकरण संख्या से अलग होगा। ये डाक्टर डिजिटल हस्ताक्षर कर सकेंगे, जिससे मरीजों को दूर बैठे इलाज का पर्चा लिख सकेंगे। इसके अलावा योजना में हर किस्म की स्वास्थ्य सुविधा को एक संख्या देकर विशेष इलेक्ट्रानिक पहचान दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर मलेरिया बुखार को एम-15 कहा जा सकता है तो देश के किसी भी कोने में बैठा डाक्टर समझ सकेगा कि मरीज को असल में क्या बीमारी अतीत में हो चुकी है। केंद्रीय सर्वर से जुड़े रहने के कारण मरीज, डाक्टर, अन्य स्वास्थ्यकर्मी, अस्पताल और सरकार तक व्यक्ति की मंजूरी के साथ जरूरी जानकारियां जुटा सकेंगे और नागरिकों को स्वस्थ रखने के मिशन को साकार किया जा सकेगा।

आयुष्मान भारत अभियान का यह डिजिटल मिशल असल में अस्पताली प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

Refernce: PIB, Jagaran

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 2015

नागरिक अस्पताल

दुनिया विचार से बदलती है। चीजो से नही।

दुनिया का देश पर विश्वास


सांसद आदर्श ग्राम योजना 2014

शिक्षकों को सम्मानजनक वेतनमान एवं सेवा शर्तों पर नियुक्ति।

शिक्षकों के लिए ऊच्च सन्मान ओर शिक्षा के पेशे को ऊच्च दर्जा।
टैक्स में स्पेशल छूट।


Tuesday, October 13, 2020

हर घर बिजली 2015

जनधन योजना 2014 में शुरू

40 करोड़ से ज्यादा लोगो के खाते खोले गए।
योजनाओं का पैसा सीधे लोगो के खाते में भेजा जा रहा है।

खुशहाल और श्रेष्ठ जीवन

Optic fiber link for 6 lakhs Village Target-2023

जन आरोग्य योजना 2018

10 करोड़ परिवारों को 5 लाख तक इलाज सुविधा।

भारत की बुलंदी




 भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुये हैं।

 भारत के लिए आस्था का मतलब है- उमंग, उत्साह, और उल्लास और मानवता पर विश्वास: PM @narendramodi

यही समय है, सही समय है,
भारत का अनमोल समय है।
असंख्य भुजाओं की शक्ति है,
हर तरफ़ देश की भक्ति है,
तुम उठो तिरंगा लहरा दो,
भारत के भाग्य को फहरा दो
यही समय है, सही समय है, 
भारत का अनमोल समय है।
कुछ ऐसा नहीं जो कर ना सको,
कुछ ऐसा नहीं जो पा ना सको,
तुम उठ जाओ, तुम जुट जाओ,
सामर्थ्य को अपने पहचानो,
कर्तव्य को अपने सब जानो,
भारत का ये अनमोल समय है,
यही समय है, सही समय है: PM @narendramodi

अटल पेंशन योजना 2015

किसानों की आय दुगनी 2017

E-NAM
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना

तर्क किए बिना किसी बात को आँख बंद के मान लेना भी एक प्रकार की ग़ुलामी है #BhagatSingh

लिखूं आज या कलम तोड़ दूं दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं.


लिखूं आज या कलम तोड़ दूं
दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं....

#BEWITHBETI 
#Justice
#BetiBachao

बहन- बेटी सबकी एक समान होती हैं 🤷

बहन- बेटियों की इज्जत का कोई जाती-धर्म नहीं होता है!

बहन-बेटियों की जान गरीब-अमीर नहीं होती है!

इसलिये बहन #ManishaValmiki के अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिये आवाज़ उठाना हम सब देशवासियो का कर्तव्य है!

फ़ास्ट ट्रेक में कड़ी से कड़ी सजा हो!

अगर बेटी का दुख केवल बेटी का माँ ही समझती है  #मनिषा किसी दौलतमंद की औलाद नही थी लेकिन इज़्ज़त से जीने का हक भी खत्म है क्या लोकतंत्र में अब?
संवेदनायें क्यों शून्य हैं बेटियों पर अत्याचार हों तो?

“क्या कारण है कि माँ बेटी सलामत नहीं है? शाम को अकेली घर से बाहर निकल नहीं पाती है क्या कारण है? 8-9वीं की बच्चियां स्कूल जाती है तो सिरफिरे लड़के रास्ते में ऐसी भद्दी टोका टोकी करते हैं वे स्कूल जाने से डरती हैं”


अपने बच्चों को अच्छे #संस्कार दो प्लीज 🙏
कोशिश करो कि हमारे बच्चों के #विचार अच्छे रहे ।
कोशिश करो कि उनके आचरण #अच्छे रहे ।


Our laws & their enforcement must be so strict that the mere thought of punishment makes rapists shudder with fear!Hang the culprits.Raise ur voice to safeguard daughters & sisters-its the least we can do



भारत की आत्मा गाँवो में बसती है।

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....


मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह देखा जाता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी जाति का असर बना रहता है और उसका अंतिम संस्कार उसकी जाति के अनुसार ही होता है। यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो भारतीय समाज में बनी हुई है।

हर जाति के लिए अलग-अलग शमशान घाट होता है, जो उस जाति की परंपरागत धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। यह एक रूपरेखा है जो मनुष्य की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसे आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।

भारतीय समाज में, जातिवाद और जाति से जुड़े विवाद चिरपिंड हैं, और इसका असर मौत के बाद भी बना रहता है। मृत्यु के पश्चात मानव शरीर को जलाकर उसकी आत्मा को मोक्ष की दिशा में भटकने के लिए इस परंपरागत प्रथा का अनुसरण किया जाता है। इसमें जाति के अनुसार विभिन्न क्रियाएँ होती हैं और शमशान घाट का चयन भी उसी तरह के धार्मिक और सामाजिक आधारों पर होता है।

विभिन्न शमशान घाटों का अस्तित्व मनुष्य के जीवन में धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां मृत्यु होने पर आत्मा को शांति प्रदान करने का कार्य होता है और यह श्राद्ध, पिंडदान, और अन्य धार्मिक आचरणों के माध्यम से किया जाता है।

हर जाति का अपना शमशान घाट एक विशेष भौगोलिक स्थान पर स्थित होता है और यहां जाति के अनुसार मृत्यु हुई व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रक्रिया में विभिन्न सम्प्रदायों और जातियों के बीच छिपे विवादों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह भारतीय समाज के एक अभिन्न हिस्से का हिस्सा है और यह उसकी रिच धारों का परिचय कराता है।

इस प्रकार, मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है और यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो समृद्धि और संस्कृति को बनाए रखने में मदद करता है। यह एक दृष्टिकोण है जो भारतीय समाज के गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को समझने में मदद करता है और इसे एक अद्भुत और विविध समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का एक माध्यम प्रदान करता है।

Monday, September 28, 2020

गरमा-गरम कॉफ़ी


एक पुराना ग्रुप कॉलेज छोड़ने के बहुत दिनों बाद मिला। वे सभी अच्छे कॅरियर के साथ खूब पैसे कमा रहे थे। वे अपने सबसे फेवरेट प्रोफेसर के घर जाकर मिले।
प्रोफेसर साहब उनके काम के बारे में पूछने लगे।
धीरे-धीरे बात लाइफ में बढ़ती स्ट्रेस और काम के प्रेशर पर आ गयी। इस मुद्दे पर सभी एक मत थे कि, भले वे अब आर्थिक रूप से बहुत मजबूत हों पर उनकी लाइफ में अब वो मजा नहीं रह गया जो पहले हुआ करता था।
प्रोफेसर साहब बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे, वे अचानक ही उठे और थोड़ी देर बाद किचन से लौटे और बोले,
”डीयर # स्टूडेंट्स, मैं आपके लिए गरमा-गरम कॉफ़ी लेकर आया हूँ , लेकिन प्लीज आप सब किचन में जाकर अपने-अपने लिए कप्स लेते आइये।"
लड़के तेजी से अंदर गए, वहाँ कई तरह के कप रखे हुए थे, सभी अपने लिए अच्छा से अच्छा कप उठाने में लग गये, किसी ने क्रिस्टल का शानदार कप उठाया तो किसी ने पोर्सिलेन का कप सेलेक्ट किया, तो किसी ने शीशे का कप उठाया।
सभी के हाथों में # कॉफीआ गयी तो प्रोफ़ेसर साहब बोले,
"अगर आपने ध्यान दिया हो तो, जो कप दिखने में अच्छे और महंगे थे आपने उन्हें ही चुना और साधारण दिखने वाले कप्स की तरफ ध्यान नहीं दिया। जहाँ एक तरफ अपने लिए सबसे अच्छे की चाह रखना एक नॉर्मल बात है वहीँ दूसरी तरफ ये हमारी लाइफ में प्रॉब्लम्स और स्ट्रेस लेकर आता है।
फ्रेंड्स, ये तो पक्का है है कि कप चाय की क्वालिटी में कोई बदलाव नहीं लाता। ये तो बस एक जरिया है जिसके माध्यम से आप कॉफी पीते है। असल में जो आपको चाहिए था वो बस कॉफ़ी थी, कप नहीं, पर फिर भी आप सब सबसे अच्छे कप के पीछे ही गए और अपना लेने के बाद दूसरों के कप निहारने लगे।"
अब इस बात को ध्यान से सुनिये ...
"ये लाइफ कॉफ़ी की तरह है ;
हमारी # नौकरी, # पैसा, # पोजीशन, कप की तरह हैं। ये बस लाइफ जीने के साधन हैं, खुद लाइफ नहीं ! और हमारे पास कौन सा कप है ये न हमारी लाइफ को डिफाइन करता है और ना ही उसे चेंज करता है। कॉफी की चिंता करिये कप की नहीं।"
"दुनिया के सबसे खुशहाल लोग वो नहीं होते जिनके पास सब कुछ सबसे बढ़िया होता है, पर वे होते हैं, जिनके पास जो होता है बस उसका सबसे अच्छे से यूज़ करते हैं।
सादगी से जियो।
सबसे प्रेमकरो।
सबकी केयर करो। यही असली जीना है।

Saturday, September 19, 2020

मुफ्त गैस कनेक्शन 2015- 6 करोड़ से ज्यादा परिवारो को मुफ्त गैस कनेक्शन

6 करोड़ से ज्यादा परिवारो को मुफ्त गैस कनेक्शन




मुफ्त गैस कनेक्शन के बारे में 2015 में भारत में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना के अंतर्गत, गरीब और वंचित घरों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया गया। यह योजना उन लोगों को लक्ष्य बनाती थी जो गैस कनेक्शन की अभावी थे और इसलिए अग्निशमन के खतरे में थे। इस योजना के तहत, सरकार ने मुख्य रूप से गरीब बालिकाओं, महिलाओं और अन्य समाज के वंचित वर्गों को लाभार्थी बनाया। यह एक प्रमुख उपाय था जो गरीब और वंचित वर्गों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ-साथ अधिक साफ वस्त्र खाने की संभावना देने के लिए किया गया।
 

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को हुई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को आग के खतरे से मुक्ति दिलाना और उन्हें स्वच्छ पाकिस्तान की ओर बढ़ने का एक कदम उठाना था। इस योजना के अंतर्गत, गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया गया।

इस योजना में पात्रता के मानदंड कुछ ऐसे थे:

  1. योजना के तहत, भारतीय नागरिक जो बीपीएल (बीलो के आधार पर जनसंख्या) कार्ड धारक हैं, उन्हें योजना के अंतर्गत निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किया गया।

  2. योजना के अंतर्गत, कनेक्शन के लिए सिलेंडर, प्रेस्चर रेगुलेटर, स्टोव आदि की भी मुफ्त आपूर्ति की गई।

  3. इसके अलावा, योजना के तहत धारकों को सम्बंधित राज्य सरकार की तरफ से आवश्यकता होने पर वार्षिक आय सहायता भी प्रदान की गई।

यह योजना महिलाओं को विशेष ध्यान में रखते हुए शुरू की गई थी, क्योंकि उन्हें परिवार के भोजन की खास जिम्मेदारी होती है। इससे वे खाने पकाने में सुरक्षित और साफ जल प्राप्त कर सकती हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

योजना के अंतर्गत अब तक लाखों गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है और उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिली है।

 

सेना में महिला अधिकारियो को स्थाई कमिशन

Reboot योजना आयोग to नीति आयोग 2014

महिलाओ को पुरुषो के बराबर वेतन

वेतन और शर्तों पर भेदभाव

PMEJP प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम



ई लोक अदालत

स्किल इंडिया 2014 मुहिम

Legal age of marriage for Girls - India

Govt revising Legal age of marriage for Girls 

इंडिया अंतरिक्ष मिशन गगन यान 2017 -2022 लक्ष्य

वसीयत सहित कानूनी दस्तावेजो का ऑनलाइन पंजीकरण

मानवीय संवेदनाओं ओर न्याय का मुद्दा

Tuesday, September 1, 2020

संघर्ष में आदमी अकेला होता है,सफलता में दुनिया उसके साथ होती है,जिस-जिस पर ये जग हँसा है,उसीने इतिहास रचा है…



संघर्ष में आदमी अकेला होता है,
सफलता में दुनिया उसके साथ होती है,
जिस-जिस पर ये जग हँसा है,
उसीने इतिहास रचा है…

Tuesday, August 25, 2020

मोहल्ला क्लास नो इंटरनेट नो मोबाइल लाउडस्पीकर से एजुकेशन


आईडिया फ्रॉम झारखंड


वन नेशन वन राशन कार्ड

 
 

"वन नेशन वन राशन कार्ड" योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय स्तर पर एक ही प्रकार के राशन कार्ड प्राप्त करने का आवासीयता, यानी "वन नेशन वन राशन कार्ड" प्रदान करना है।

इस योजना के अंतर्गत, भारत के किसी भी राज्य से अन्य राज्य में रह रहे नागरिक एक ही प्रकार के राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें अन्य राज्यों में निवास करते समय राशन सुविधा का लाभ मिल सकता है।

यह पहल राष्ट्रीय एकता और समानता के माध्यम से भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे नागरिकों को समान राशन सुविधा का लाभ प्रदान करने का प्रयास है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में रहते हुए राशन कार्ड के लिए परेशानी ना करें।

इसके अलावा, यह योजना लोगों को अन्य विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों के लिए आवेदन करने में भी सहायक हो सकती है। यह एक सरल, सुविधाजनक, और समानता को बढ़ावा देने वाला प्रयास है जो भारतीय समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

"वन नेशन वन राशन कार्ड" (One Nation One Ration Card) योजना भारत सरकार की गरीबी मुक्त भारत अभियान का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य है राष्ट्रीय स्तर पर एक ही प्रकार के राशन कार्ड का निर्माण करना ताकि गरीब नागरिकों को देशभर में राशन की सुविधा मिल सके, खासकर जब वे अपने गाँव या शहर में गठबंधन करने के लिए प्रवास करते हैं।

इस योजना के अंतर्गत, एक ही प्रकार के राशन कार्ड को एक ही पोस मशीन के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है, जो देशभर के राशन दुकानों में स्थापित किए गए हैं। इससे लाभार्थी व्यक्ति किसी भी राज्य में रहते हुए अपने राशन कार्ड का उपयोग कर सकते हैं।

यह पहल गरीबी को कम करने के साथ-साथ लोगों को बेहतर राशन सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। इससे अधिक लोग अपनी आवश्यकतानुसार अन्न सुरक्षा के साथ जीवन बिता सकते हैं, जो उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद कर सकता है।

 

 **एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड (One Nation, One Ration Card)**

### परिचय

भारत में, खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राशन कार्ड है, जो कि कमजोर वर्गों और गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराता है। हाल के वर्षों में, भारत सरकार ने "एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" (ONORC) पहल की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आने वाले लाभार्थियों को देश के किसी भी हिस्से में, किसी भी राज्य के सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करना है। यह विशेष रूप से उन प्रवासी कामगारों के लिए सहायक है, जो अपने गृह राज्य से दूर काम करते हैं।

### एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

1. **खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना**: पूरे देश में प्रवासियों और कामगारों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
2. **राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी**: लाभार्थियों को देश के किसी भी हिस्से में राशन लेने की सुविधा प्रदान करना।
3. **पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाना**: राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
4. **भ्रष्टाचार कम करना**: फर्जी राशन कार्ड और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करना।

### योजना की शुरुआत और कार्यान्वयन

"एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" पहल की शुरुआत जुलाई 2020 में की गई थी। यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। योजना के तहत, सभी राज्यों के राशन कार्डों को एक केंद्रीय डेटाबेस से जोड़ा गया है, जिससे लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार देश के किसी भी हिस्से में राशन प्राप्त कर सकते हैं।

### एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड की मुख्य विशेषताएं

1. **अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी**: इस योजना के तहत, लाभार्थी अपने गृह राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में भी राशन प्राप्त कर सकते हैं।
2. **इंट्रा-स्टेट पोर्टेबिलिटी**: लाभार्थी अपने राज्य के भीतर भी किसी भी राशन की दुकान से राशन प्राप्त कर सकते हैं।
3. **आधार सीडिंग**: सभी राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ा गया है, जिससे लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित होती है।
4. **इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ePoS) मशीनें**: राशन दुकानों पर ePoS मशीनों का उपयोग किया जाता है, जिससे राशन वितरण प्रक्रिया पारदर्शी होती है।

### योजना के लाभ

1. **प्रवासियों के लिए सहूलियत**: यह योजना विशेष रूप से उन प्रवासी मजदूरों के लिए फायदेमंद है, जो रोजगार की तलाश में अपने गृह राज्य से बाहर जाते हैं। वे अब देश के किसी भी हिस्से में अपने अधिकार का राशन प्राप्त कर सकते हैं।
2. **महिलाओं और बच्चों को लाभ**: इस योजना से महिलाओं और बच्चों को भी फायदा होगा, क्योंकि वे अपने निवास स्थान से दूर होने पर भी खाद्य सुरक्षा का लाभ उठा सकते हैं।
3. **भ्रष्टाचार में कमी**: आधार सीडिंग और ePoS मशीनों के उपयोग से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और फर्जी राशन कार्डों का उपयोग कम हुआ है।
4. **समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना**: यह योजना समाज के कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

### कार्यान्वयन में चुनौतियां

हालांकि, "एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" योजना के लाभ स्पष्ट हैं, इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं:

1. **तकनीकी समस्याएं**: आधार प्रमाणीकरण में तकनीकी समस्याएं और ePoS मशीनों के संचालन में कठिनाइयां।
2. **भू-भागीय विविधता**: भारत जैसे विशाल और विविध देश में योजना को सफलतापूर्वक लागू करना एक बड़ी चुनौती है।
3. **राज्यों के बीच समन्वय**: विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना और उन्हें केंद्रीय डेटाबेस से जोड़ना।
4. **लाभार्थियों की जागरूकता**: योजना के बारे में लाभार्थियों को जागरूक करना और उन्हें इसकी जानकारी देना।

### समाधान और भविष्य की दिशा

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

1. **तकनीकी सुधार**: आधार प्रमाणीकरण और ePoS मशीनों के संचालन में सुधार के लिए तकनीकी उन्नयन और समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना।
2. **प्रशिक्षण कार्यक्रम**: राशन दुकानदारों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, ताकि वे योजना को सही तरीके से लागू कर सकें।
3. **जागरूकता अभियान**: लाभार्थियों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान चलाना।
4. **राज्यों के बीच सहयोग**: राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग स्थापित करने के लिए केंदीय स्तर पर समन्वय समितियों का गठन करना।

### निष्कर्ष

"एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" योजना भारत में खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना न केवल प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि भ्रष्टाचार में कमी और पारदर्शिता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन सही उपाय और प्रयासों से इन्हें दूर किया जा सकता है। इस योजना के सफल कार्यान्वयन से भारत में एक समृद्ध और सशक्त समाज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद

गरीब के पास अपना पक्का घर , बिजली और पानी की व्यवस्था 2017 -2022 लक्ष्य

Balance between Encouraging growth and protecting the environment

Sustainability and climate change

 

 
How to adapt to an environmentally conscious lifestyle.

1. Reduce
2. Reuse
3. Recycle
4. Renewable
5. Recover
6. Re-design
7. Re-manufacture

Few examples for the above:
Reduce - Electricity, Fuel Usage
Reuse - Old Clothes, Electronics, Building materials, furniture
Recycle - Plastic, newspapers, cartons, boxes
Renewable - Solar, Wind, Hydro, Tidal, Geothermal & Biomass
Recover - Forests, rivers, soil, mountains, wildlife
Redesign - Green buildings
Remanufacture - E-waste for new purposes

 


India is one of the leaders in sustainable development and clean energy. With the Hon PM Narendra Modi-led government’s reform-oriented, environment-friendly policies, the country has time & again shown that sound environmental policies can pave the way to a sound economy.

At the UN Climate Change Conference COP26 in 2021, PM Shri Narendra Modi announced the ‘LiFE’, a mission to bring individual behavioural change at the forefront of the global climate action narrative. LIFE or Lifestyle for Environment along with the ‘Pro Planet People’ movement, aims to strengthen the efforts to overcome climate change.

LiFE will replace the prevailing 'use-and-throw’ thinking with an environmentally conscious lifestyle. The Mission is to create a global community of ‘Pro-Planet People’ (P3), who with their shared commitment will adopt and promote environmentally friendly lifestyles.

Individual Efforts Are Key to Climate Commitment

India's traditional knowledge strongly positions it to lead the narrative of addressing climate change. Like many other mass movements, LiFE aims to inspire climate action based on the mantra of ‘Sabka Sath, Sabka Vikas’.

Our civilisational values have taught us the importance of living in harmony with nature. Today, let’s come together to protect our environment & take forward Mission LiFE - Lifestyle for Environment.