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Tuesday, October 13, 2020

किसानों की आय दुगनी 2017

E-NAM
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना

तर्क किए बिना किसी बात को आँख बंद के मान लेना भी एक प्रकार की ग़ुलामी है #BhagatSingh

लिखूं आज या कलम तोड़ दूं दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं.


लिखूं आज या कलम तोड़ दूं
दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं....

#BEWITHBETI 
#Justice
#BetiBachao

बहन- बेटी सबकी एक समान होती हैं 🤷

बहन- बेटियों की इज्जत का कोई जाती-धर्म नहीं होता है!

बहन-बेटियों की जान गरीब-अमीर नहीं होती है!

इसलिये बहन #ManishaValmiki के अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिये आवाज़ उठाना हम सब देशवासियो का कर्तव्य है!

फ़ास्ट ट्रेक में कड़ी से कड़ी सजा हो!

अगर बेटी का दुख केवल बेटी का माँ ही समझती है  #मनिषा किसी दौलतमंद की औलाद नही थी लेकिन इज़्ज़त से जीने का हक भी खत्म है क्या लोकतंत्र में अब?
संवेदनायें क्यों शून्य हैं बेटियों पर अत्याचार हों तो?

“क्या कारण है कि माँ बेटी सलामत नहीं है? शाम को अकेली घर से बाहर निकल नहीं पाती है क्या कारण है? 8-9वीं की बच्चियां स्कूल जाती है तो सिरफिरे लड़के रास्ते में ऐसी भद्दी टोका टोकी करते हैं वे स्कूल जाने से डरती हैं”


अपने बच्चों को अच्छे #संस्कार दो प्लीज 🙏
कोशिश करो कि हमारे बच्चों के #विचार अच्छे रहे ।
कोशिश करो कि उनके आचरण #अच्छे रहे ।


Our laws & their enforcement must be so strict that the mere thought of punishment makes rapists shudder with fear!Hang the culprits.Raise ur voice to safeguard daughters & sisters-its the least we can do



भारत की आत्मा गाँवो में बसती है।

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....

मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....


मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह देखा जाता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी जाति का असर बना रहता है और उसका अंतिम संस्कार उसकी जाति के अनुसार ही होता है। यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो भारतीय समाज में बनी हुई है।

हर जाति के लिए अलग-अलग शमशान घाट होता है, जो उस जाति की परंपरागत धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। यह एक रूपरेखा है जो मनुष्य की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसे आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।

भारतीय समाज में, जातिवाद और जाति से जुड़े विवाद चिरपिंड हैं, और इसका असर मौत के बाद भी बना रहता है। मृत्यु के पश्चात मानव शरीर को जलाकर उसकी आत्मा को मोक्ष की दिशा में भटकने के लिए इस परंपरागत प्रथा का अनुसरण किया जाता है। इसमें जाति के अनुसार विभिन्न क्रियाएँ होती हैं और शमशान घाट का चयन भी उसी तरह के धार्मिक और सामाजिक आधारों पर होता है।

विभिन्न शमशान घाटों का अस्तित्व मनुष्य के जीवन में धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां मृत्यु होने पर आत्मा को शांति प्रदान करने का कार्य होता है और यह श्राद्ध, पिंडदान, और अन्य धार्मिक आचरणों के माध्यम से किया जाता है।

हर जाति का अपना शमशान घाट एक विशेष भौगोलिक स्थान पर स्थित होता है और यहां जाति के अनुसार मृत्यु हुई व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रक्रिया में विभिन्न सम्प्रदायों और जातियों के बीच छिपे विवादों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह भारतीय समाज के एक अभिन्न हिस्से का हिस्सा है और यह उसकी रिच धारों का परिचय कराता है।

इस प्रकार, मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है और यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो समृद्धि और संस्कृति को बनाए रखने में मदद करता है। यह एक दृष्टिकोण है जो भारतीय समाज के गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को समझने में मदद करता है और इसे एक अद्भुत और विविध समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का एक माध्यम प्रदान करता है।

Monday, September 28, 2020

गरमा-गरम कॉफ़ी


एक पुराना ग्रुप कॉलेज छोड़ने के बहुत दिनों बाद मिला। वे सभी अच्छे कॅरियर के साथ खूब पैसे कमा रहे थे। वे अपने सबसे फेवरेट प्रोफेसर के घर जाकर मिले।
प्रोफेसर साहब उनके काम के बारे में पूछने लगे।
धीरे-धीरे बात लाइफ में बढ़ती स्ट्रेस और काम के प्रेशर पर आ गयी। इस मुद्दे पर सभी एक मत थे कि, भले वे अब आर्थिक रूप से बहुत मजबूत हों पर उनकी लाइफ में अब वो मजा नहीं रह गया जो पहले हुआ करता था।
प्रोफेसर साहब बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे, वे अचानक ही उठे और थोड़ी देर बाद किचन से लौटे और बोले,
”डीयर # स्टूडेंट्स, मैं आपके लिए गरमा-गरम कॉफ़ी लेकर आया हूँ , लेकिन प्लीज आप सब किचन में जाकर अपने-अपने लिए कप्स लेते आइये।"
लड़के तेजी से अंदर गए, वहाँ कई तरह के कप रखे हुए थे, सभी अपने लिए अच्छा से अच्छा कप उठाने में लग गये, किसी ने क्रिस्टल का शानदार कप उठाया तो किसी ने पोर्सिलेन का कप सेलेक्ट किया, तो किसी ने शीशे का कप उठाया।
सभी के हाथों में # कॉफीआ गयी तो प्रोफ़ेसर साहब बोले,
"अगर आपने ध्यान दिया हो तो, जो कप दिखने में अच्छे और महंगे थे आपने उन्हें ही चुना और साधारण दिखने वाले कप्स की तरफ ध्यान नहीं दिया। जहाँ एक तरफ अपने लिए सबसे अच्छे की चाह रखना एक नॉर्मल बात है वहीँ दूसरी तरफ ये हमारी लाइफ में प्रॉब्लम्स और स्ट्रेस लेकर आता है।
फ्रेंड्स, ये तो पक्का है है कि कप चाय की क्वालिटी में कोई बदलाव नहीं लाता। ये तो बस एक जरिया है जिसके माध्यम से आप कॉफी पीते है। असल में जो आपको चाहिए था वो बस कॉफ़ी थी, कप नहीं, पर फिर भी आप सब सबसे अच्छे कप के पीछे ही गए और अपना लेने के बाद दूसरों के कप निहारने लगे।"
अब इस बात को ध्यान से सुनिये ...
"ये लाइफ कॉफ़ी की तरह है ;
हमारी # नौकरी, # पैसा, # पोजीशन, कप की तरह हैं। ये बस लाइफ जीने के साधन हैं, खुद लाइफ नहीं ! और हमारे पास कौन सा कप है ये न हमारी लाइफ को डिफाइन करता है और ना ही उसे चेंज करता है। कॉफी की चिंता करिये कप की नहीं।"
"दुनिया के सबसे खुशहाल लोग वो नहीं होते जिनके पास सब कुछ सबसे बढ़िया होता है, पर वे होते हैं, जिनके पास जो होता है बस उसका सबसे अच्छे से यूज़ करते हैं।
सादगी से जियो।
सबसे प्रेमकरो।
सबकी केयर करो। यही असली जीना है।

Saturday, September 19, 2020

मुफ्त गैस कनेक्शन 2015- 6 करोड़ से ज्यादा परिवारो को मुफ्त गैस कनेक्शन

6 करोड़ से ज्यादा परिवारो को मुफ्त गैस कनेक्शन




मुफ्त गैस कनेक्शन के बारे में 2015 में भारत में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना के अंतर्गत, गरीब और वंचित घरों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया गया। यह योजना उन लोगों को लक्ष्य बनाती थी जो गैस कनेक्शन की अभावी थे और इसलिए अग्निशमन के खतरे में थे। इस योजना के तहत, सरकार ने मुख्य रूप से गरीब बालिकाओं, महिलाओं और अन्य समाज के वंचित वर्गों को लाभार्थी बनाया। यह एक प्रमुख उपाय था जो गरीब और वंचित वर्गों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ-साथ अधिक साफ वस्त्र खाने की संभावना देने के लिए किया गया।
 

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को हुई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को आग के खतरे से मुक्ति दिलाना और उन्हें स्वच्छ पाकिस्तान की ओर बढ़ने का एक कदम उठाना था। इस योजना के अंतर्गत, गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया गया।

इस योजना में पात्रता के मानदंड कुछ ऐसे थे:

  1. योजना के तहत, भारतीय नागरिक जो बीपीएल (बीलो के आधार पर जनसंख्या) कार्ड धारक हैं, उन्हें योजना के अंतर्गत निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किया गया।

  2. योजना के अंतर्गत, कनेक्शन के लिए सिलेंडर, प्रेस्चर रेगुलेटर, स्टोव आदि की भी मुफ्त आपूर्ति की गई।

  3. इसके अलावा, योजना के तहत धारकों को सम्बंधित राज्य सरकार की तरफ से आवश्यकता होने पर वार्षिक आय सहायता भी प्रदान की गई।

यह योजना महिलाओं को विशेष ध्यान में रखते हुए शुरू की गई थी, क्योंकि उन्हें परिवार के भोजन की खास जिम्मेदारी होती है। इससे वे खाने पकाने में सुरक्षित और साफ जल प्राप्त कर सकती हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

योजना के अंतर्गत अब तक लाखों गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है और उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिली है।

 

सेना में महिला अधिकारियो को स्थाई कमिशन

Reboot योजना आयोग to नीति आयोग 2014

महिलाओ को पुरुषो के बराबर वेतन

वेतन और शर्तों पर भेदभाव