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Thursday, October 12, 2023

हैंडराइटिंग की माध्यम से किसी की पर्सनॅलिटी का पूरी तरह से सही अनुमान- ग्राफोलॉजी

 ग्राफोलॉजी

हैंडराइटिंग की माध्यम से किसी की पर्सनॅलिटी का पूरी तरह से सही अनुमान लगाया जा सकता है। हैंडराइटिंग विज्ञान का एक शाखा है जिसे ग्राफोलॉजी कहा जाता है, और इसमें कई विभिन्न संकेतों की जाँच की जाती है। 

 लिखावट का सीधा संबंध इंसान की साइकोलॉजी से होता है

किसी का व्यक्तित्व पहचानने के लिए उससे जुड़ी हर छोटी-छोटी बात बहुत मायने रखती है, जैसे उसका व्यवहार, बातचीत, उठने-बैठने का तरीका, यहां तक कि उसकी लिखावट।  

उंगलियों का सीधा संबंध दिमाग से होता है इसलिए हम कह सकते है, व्यक्ति की लिखावट में उसके अंदर छिपी क्रिएटिविटी और प्रतिभा की झलक दिखाई देती है. 


लिखावट का झुकाव
दाईं ओर झुकी लिखावट वाले लोग खुली किताब की तरह होते हैं। इन्हें लोगों से घुलना-मिलना पसंद है और ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। बाईं ओर झुकी लिखावट वाले लोग अक्सर पर्दे के पीछे खुश रहते हैं।



अगर आप राइट हैंडेड हैं फिर भी बाएं हाथ से लिखते हैं तो आप क्रांतिकारी प्रवृत्ति के हो सकते हैं। सीधा लिखने वाले लोग अमूमन भावनात्मक किस्म के होते हैं और तार्किक बनने का प्रयास करते हैं।

लिखावट का आकार
बहुत बड़े आकार के अक्षर लिखने वाले लोग आमतौर पर प्रभावशाली व्यक्तित्व के होते हैं। यही वजह है कि कई बड़े सेलिब्रिटीज की लिखावट में बड़े अक्षम होते ही हैं।


बहुत छोटे अक्षरों में लिखने वाले लोग बहुत फोकस से काम करते हैं। ये शर्मीले और अंर्तमुखी स्वभाव के हो सकते हैं। सामान्य आकार के अक्षरों को लिखने वाले लोग हर परिस्थिति में सांमजस्य बैठा सकते हैं और हर काम को सलीके से करने में यकीन रखते हैं।

किसी भी अक्षर को तीन भागों में बांटकर देखना चाहिए ऊपर का हिस्सा, केंद्र और नीचे का हिस्सा. अक्षर का ऊपरी भाग जीवन मूल्य को दर्शाता है, वहीं मध्य भाग यह बताता है कि व्यक्ति कितना व्यावहारिक प्रकृति का है और नीचे का हिस्सा इच्छा और कर्म के विषय में संकेत देता है. 

अक्षर का मध्य भाग व्यक्ति की मानसिकता दर्शाता है. अतः किसी व्यक्ति के स्वभाव को समझने के लिए अक्षर के मध्य भाग पर ध्यान देना चाहिए. यदि अक्षर का मध्य भाग अनुपात के अनुसार है तो यह इस बात का संकेत है कि यह एक संतुलित व्यक्तित्व का इंसान है. ऐसा व्यक्ति अधिक व्यावहारिक होता है और परिस्थिति के अनुरूप स्वयं को ढालने वाला होता है. एक संतुलित व्यक्तित्व का मनुष्य अपने साथ-साथ अपने आसपास के लोगों का भी ख्याल रखता है और सबको साथ लेकर चलना पसंद करता है. ऐसे लोगों के साथ लंबी पार्टनरशिप या डील की जा सकती है. यदि मध्य भाग अनुपात से बहुत बड़ा हो तो यह व्यक्ति की ऊंची महत्वाकांक्षा का संकेत है और वह भी ऐसी महत्वाकांक्षा जो वास्तविकता से दूर है. ऐसा व्यक्ति अपनी महत्वाकांक्षा के अधीन होता है और उसे पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. इनसे किसी समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती. ऐसे व्यक्तियों से जुड़ने से पहले बहुत सोच विचार की आवश्यकता है. तीसरी स्थिति यह है कि अक्षर का मध्य भाग अनुपात में छोटा हो. यह व्यक्ति की छोटी सोच को दर्शाता है. ऐसा व्यक्ति रिस्क लेने से डरता है, इसका अर्थ है कि ऐसा व्यक्ति मौके का फायदा उठाना नहीं जानते. इनमें दूरदृष्टिता नहीं होती और ये आसानी से दूसरों से प्रभावित हो जाते हैं. 
सबसे खतरनाक श्रेणी उन लोगों की है जिनके अक्षरों का माप एक समान न रहकर कम ज्यादा होता हो. यह मनुष्य के मन की अस्थिरता का संकेत है. ऐसे लोग अपनी बात में अडिग रहने में असमर्थ होते हैं , इसलिए इनके साथ कोई भी डील का लंबे समय तक चलना थोड़ा मुश्किल होता है. 


लिखावट में दबाव
कुछ लोग लिखते वक्त कलम पर दबाव बनाते हैं जो उनकी लिखावट में साफ झलकता है। ऐसी लिखावट वाले लोग गंभीर किस्म के होते हैं और कमिटमेंट में विश्वास रखते हैं। वहीं फ्री हैंड लिखावट वाले लोग संवेदनशील होते हैं और दूसरों से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

अक्षरों में स्पेस
अक्षरों के बीच में कितनी जगह हम लिखते वक्त छोड़ते हैं, यह भी हमारे व्यक्तित्व की ओर इशारा है। अक्षरों के बीच अधिक स्पेस रखने वाले लोग अपने व्यक्तगित स्वतंत्रता को लेकर गंभीर होते हैं जबकि कम स्पेस रखने वाले लोगों में दूसरों की नकल करने की प्रवृत्ति अधिक होती है। 

 


Handwriting: लिखावट सिर्फ व्यक्ति की पहचान नहीं होती बल्कि उसके व्यक्तित्व का दर्पण भी होती है. शब्दों की बनावट में ही व्यक्ति के स्वभाव, उसकी सोच, प्रतिक्रिया की तीव्रता झलकती है.
शब्दों की बनावट में ही व्यक्ति के स्वभाव, उसकी सोच, प्रतिक्रिया की तीव्रता झलकती है.

 हस्ताक्षर विश्लेषण व्यक्तित्व परीक्षण

पूरे नाम पर हस्ताक्षर करना

Example : Shri Narendra Damodardas Modi 

Prime Minister of India


यदि आप अपना पूरा नाम हस्ताक्षर करते हैं , तो आप वर्तमान पर केंद्रित हैं। आप अपनी पहचान और अपने परिवार के बीच एक अच्छा संतुलन बनाते हैं। यदि आपके नाम का पहला अक्षर बड़े अक्षरों में है, तो आपका आत्म-सम्मान थोड़ा अधिक स्पष्ट है। यदि आपके अंतिम नाम का पहला अक्षर बड़े अक्षरों में है, तो आपका अपने परिवार के प्रति अधिक भावनात्मक लगाव है।

 

 

Rahul Gandhi

यदि आप केवल अपने पहले नाम पर हस्ताक्षर करते हैं, तो आपमें आत्म-जागरूकता की प्रबल भावना है। आप स्वतंत्र हैं और संभवतः काम करने के लिए अपने परिवार से दूर चले जाते हैं। आप आम तौर पर अपने जीवन के प्रति बहुत सचेत हैं, हालाँकि बाहर से आप काफी शांत दिख सकते हैं। आप अपने पैसों के प्रबंधन को लेकर भी काफी समझदार हैं।

यदि आप केवल अपने अंतिम नाम पर हस्ताक्षर करते हैं , तो आप एक स्वतंत्र प्रवृत्ति और आत्मविश्वास का भी प्रदर्शन करते हैं। यह आपके परिवार के प्रति प्रेम और निष्ठा की मजबूत भावना को भी प्रदर्शित करता है। आप अपने परिवार के करीब या उसके आस-पास ही रहते हैं।

यदि आप केवल अपने शुरुआती अक्षरों से हस्ताक्षर करते हैं, तो आप एक अत्यंत निजी व्यक्ति हैं। आप अहंकारी हैं और आसानी से नहीं खुलते। यह एक स्वतंत्र प्रवृत्ति के उच्च स्तर को भी दर्शाता है। यदि सभी या पहले अक्षर बड़े अक्षरों में हैं, तो आप आत्म-सम्मान की स्वस्थ भावना प्रदर्शित करते हैं।

नोट: हालाँकि, यदि आपका अंतिम नाम नीचे की ओर झुका हुआ दिखता है, तो यह कुछ नकारात्मक भावनाओं का संकेत हो सकता है। यदि आपका पहला और अंतिम नाम दोनों अक्षरों में हैं, तो आप लोगों के बीच बहुत मिलनसार और चंचल होते हैं।



 

हस्ताक्षर के नीचे रेखांकित करना


यदि आप रेखांकित नहीं करते हैं , तो आप एक गैर-उधम मचाने वाले व्यक्ति हैं। आपको महत्वपूर्ण महसूस करने या ध्यान आकर्षित करने की कोई आवश्यकता या इच्छा नहीं दिखती। आप प्रवाह के साथ चलते हैं.


यदि आप एक बार और ऊपर की ओर रेखांकित करते हैं, तो आप एक आशावादी और रचनात्मक दृष्टिकोण दिखाते हैं, खासकर अपने काम में। इसका उद्देश्य दूसरों को आपकी उपस्थिति और आपने क्या किया है, इसके बारे में बताना है।


यदि आप दो बार रेखांकित करते हैं, तो आपके पास महत्वपूर्ण महसूस करने की तीव्र इच्छा या आवश्यकता है। आपको अपने काम का श्रेय दिया जाना पसंद है। यह असुरक्षा या आत्मविश्वास की कमी को भी प्रदर्शित कर सकता है। 
 

हस्ताक्षर पढ़ना कठिन

 

पढ़ने में कठिन हस्ताक्षर को अपठनीय हस्ताक्षर के रूप में भी जाना जाता है, जबकि यदि आपका हस्ताक्षर पढ़ने में आसान और सीधा है, तो यह सुपाठ्य हस्ताक्षर है।

यदि आपका हस्ताक्षर पढ़ने में कठिन है या लिखने जैसा दिखता है , तो संभवतः आपका दिमाग तेज़ है। आप ब्यौरों या बाधाओं से घिरे नहीं हैं। आपको अपनी क्षमताओं और काम पर भरोसा है।

यदि आपके हस्ताक्षर पढ़ने में आसान हैं , तो आप एक संतुलित और शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप सीधे-सादे हैं और स्पष्टता के साथ-साथ आत्मविश्वास से भी भरे हुए हैं।

तिरछा हस्ताक्षर

ऊपर की ओर झुकाव महत्वाकांक्षा और दूरदर्शी व्यक्ति को दर्शाता है। आपमें महत्वाकांक्षा की भावना और भविष्य की ओर देखने की प्रवृत्ति विकसित हो गई है।

नीचे की ओर झुकाव , यानी, हस्ताक्षर लाइन पर शुरू होता है और नीचे की ओर बढ़ता है, किसी ऐसे व्यक्ति को दिखा सकता है जिसमें आत्म-सम्मान की कमी है।

सीधा हस्ताक्षर व्यक्ति के जीवन और कार्य के प्रति दृष्टिकोण में संतुलन का संकेत देता है। आप आत्मनिर्भर, अत्यधिक संगठित और अपने मन पर नियंत्रण रखने वाले हैं। आप अपनी सच्ची भावनाओं को प्रकट न करने की तीव्र इच्छा भी प्रदर्शित करते हैं।

 

हस्ताक्षर के अंत में एक बिंदु लगाना

यदि आप अपने हस्ताक्षर के बाद बिंदी लगाते हैं, तो आपके पास एक मजबूत आत्म-जागरूकता है। आप जानते हैं कि आप मेज पर क्या लाते हैं। आप अपने काम में गंभीरता का भाव प्रदर्शित करते हैं, भले ही व्यक्तिगत रूप से आप प्रसन्नचित्त और हल्के-फुल्के हों। आपको उद्योग जगत का दिग्गज माना जाता है।

आप मजबूत नेतृत्व गुण प्रदर्शित करते हैं। सबसे अधिक संभावना है, मजबूत बिजनेस लीडर अपने हस्ताक्षर के अंत में एक बिंदु लगाकर हस्ताक्षर करते हैं।

 

हस्ताक्षर विश्लेषण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया हो सकता है जो किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत और कार्यात्मक जीवन के बारे में जानकारी प्रदान कर सकता है। निम्नलिखित प्रकार के हस्ताक्षरों का विश्लेषण आपको अधिक समझार्थक हस्ताक्षरों के प्रकार जानने में मदद कर सकता है:

  1. स्ट्राइक-थ्रू हस्ताक्षर: इस प्रकार का हस्ताक्षर किसी व्यक्ति के निर्णयकता और संकट सहने की क्षमता को दर्शा सकता है। यह व्यक्ति की संघटनशीलता और सहयोगी प्रावृत्तियों का सूचक हो सकता है।

  2. हस्ताक्षर के चारों ओर गोला बनाएं: गोला बनाने वाले हस्ताक्षर आमतौर पर व्यक्ति की आत्म-सुरक्षा और अपने आसपास के लोगों के साथ मिलजुलकर रहने की प्रकृति को दर्शा सकते हैं।

  3. छोटे हस्ताक्षर: छोटे हस्ताक्षर व्यक्ति की नगरीय और अद्भुत योजनाओं की प्रवृत्ति को दर्शा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब नहीं है कि व्यक्ति कम महत्वपूर्ण है।

  4. पीछे की ओर जाते हुए रेखांकित करें: इस प्रकार के हस्ताक्षर व्यक्ति की पिछली गुलामी या खासतर मानसिक तनाव को दर्शा सकते हैं।

  5. लिखा हुआ हस्ताक्षर: इस प्रकार के हस्ताक्षर व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वाधीनता और अपने विचारों के प्रति सजगता को दर्शा सकते हैं।

  6. अंतिम पत्र छोड़ें: इस प्रकार के हस्ताक्षर में अंतिम पत्र छोड़ने की प्रवृत्ति हो सकती है, जिसका अर्थ व्यक्ति की संवाद क्षमता और जानकारी देने की प्रक्रिया में अल्पता हो सकती है।

  7. बड़े अक्षर: बड़े अक्षरों का उपयोग ज्यादातर स्वाधीनता और अधिकता की प्रतीति करा सकता है।

  8. I या T गुम है: यदि 'I' या 'T' अक्षर गुम है, तो यह व्यक्ति की व्यक्तिगत स्थिति में अस्थिरता की प्रतीति कर सकता है, और उनकी संवाद क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

  9. Y लूप छोड़ना: Y लूप छोड़ना व्यक्ति की निर्णयक और प्राधान्य की ओर संकेत कर सकता है, जो उनके उद्देश्यों की प्राथमिकता को दिखा सकता है।

     

    References: 

    Wikipedia: हस्तलेख का विज्ञान- https://en-m-wikipedia-org.translate.goog/wiki/Graphology?_x_tr_sl=en&_x_tr_tl=hi&_x_tr_hl=hi&_x_tr_pto=tc

    Ref : Jagaran

     

Tuesday, September 19, 2023

मैं शपथ लेता हूँ-गोपनीयता की शपथ

 Oath/affirmation: 


मैं शपथ लेता हूँ / सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ कि भारत और विधि द्वारा स्थापित भारत के

संविधान के प्रति श्रद्धा और सच्ची निष्ठा रखूंगा, में भारत की प्रभुता और अखण्डता अक्षुण्ण रखूंगा, तथा मैं

अपने पद के कर्तव्यों का राजभक्ति, ईमानदारी और निष्पक्षता से पालन करूंगा।
 
मैं भारत के गणराज्य की सदा रक्षा, समृद्धि और खुशहाली के लिए सर्वाधिक समर्पित रहूंगा, और मैं उसके प्रजातंत्र को सच्चाई, ईमानदारी, न्याय और समाज के सर्वाधिक हित के लिए प्रस्तुत रहूंगा।"
 
मैं भारतीय संघ की संविधान के प्रावधानों का पालन करूंगा/करूंगी, भारत की संरक्षण और उन्नति के लिए पूरी तरह से समर्पित रहूंगा/रहूंगी, और देश की समृद्धि और जनता के कल्याण के लिए मेरी पूरी तरह से मेहनत करूंगा/करूंगी।"
 
 

मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा, मैं अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा।

  देश के प्रति गहरी समर्पण और उन्नत भावना 
अपने कार्यों को ईमानदारी और संविधानिक तरीके से निर्वहने के लिए प्रतिबद्ध  
न्याय के आदान-प्रदान को अधिनिपण करने के लिए बिना किसी भय या पक्षपात के सभी लोगों के प्रति समर्थ 
 
"मैं इसकी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से पालन करूंगा कि मैं अपने कर्तव्यों को संपादित करूंगा और भारत सरकार की सेवा में वफादारी से काम करूंगा। मैं भ्रष्टाचार से दूर और न्यायपूर्णता के प्रति प्रतिबद्ध रहूंगा, और संविधान के मानकों और विधियों का पालन करूंगा।" 


गोपनीयता की शपथ

मैं गोपनीयता की सख्त पालना करने का प्रण करता/करती हूँ कि मैं अपने पद के कार्यों और सरकार की गोपनीय जानकारियों का पूरी तरह से सुरक्षित रखूंगा/रखूंगी और किसी को भी यह जानकारी देने का या उसे लीक करने का कोई मौका नहीं दूंगा/दूंगी।"
गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने और बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा साबित करने के लिए कठिन प्रयास करेंगे।

Friday, September 1, 2023

कूड़ा निस्तारण केंद्र

 कूड़ा निस्तारण केंद्र

 "कूड़ा निस्तारण केंद्र" एक स्थान होता है जहाँ प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से कूड़े, कचरे और अन्य प्रदूषण करकरों को प्रबंधित किया जाता है। ये केंद्र बड़े पैमाने पर नगरीय क्षेत्रों में स्थापित होते हैं जहाँ बड़ी मात्रा में कूड़ा-कचरा पैदा होता है और इसका सही तरीके से प्रबंधन किया जाना आवश्यक होता है।

 "कूड़ा निस्तारण केंद्र" एक स्थान होता है जहाँ प्रदूषण के प्रकारों में से एक, यानी कूड़ा (सूचागृह, अपशिष्ट आदि) को सुरक्षित और स्वच्छ ढंग से प्रबंधित किया जाता है। ये केंद्र आमतौर पर शहरों और नगरों में स्थापित किए जाते हैं ताकि उनके प्रदूषण प्रबंधन के लिए एक स्थिर माध्यम हो सके।

कूड़ा निस्तारण केंद्रों का काम कूड़े को एक निश्चित स्थल पर संग्रहण करना, इसके बाद उसे स्थानीय प्राधिकृत तरीकों से सेग्रीगेट करके उपयुक्त तरीके से प्रबंधित करना होता है। यह प्रक्रिया कूड़े की अधिक मौजूदगी को रोकती है, पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करती है, और स्थानीय समुदाय को स्वच्छता और स्वास्थ्य की दिशा में मदद करती है।

कूड़ा निस्तारण केंद्र विभिन्न प्रकार के तंत्रों और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं, जैसे कि बिन प्रदूषण तंत्र, जैविक उपचार प्रणाली, विशिष्ट स्थानों पर बिन प्रदूषण संग्रहण, आदि।

कूड़ा निस्तारण केंद्र के माध्यम से हम समुदाय को प्रदूषण प्रबंधन की महत्वपूर्ण जागरूकता प्रदान करते हैं और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाते हैं।

शहर में कूड़ा निस्तारण केंद्र की शुरुआत

 
बल्लभगढ़ - शहर व कॉलोनियों में खाली जगहों पर अब कूड़े के ढेर लगे नजर नहीं आएंगे। इसके लिए नगर निगम ने मुजेड़ी रोड के समीप करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से कूड़ा स्थानांतरण केंद्र बनाया है। इसकी शुरुआत कर दी गई है। निगम अधिकारियों के मुताबिक शहर में अभी तक कोई भी कूड़ा स्थानांतरण केंद्र न होने से शहर व कॉलोनियों में एकत्र कूड़े को अक्सर खाली जगहों पर डाल दिया जाता था। इससे आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और फैली गंदगी से दो-चार होना पड़ता था।
इसे देखते हुए अब मुजेड़ी रोड पर कूड़ा स्थानांतरण केंद्र बनाया गया है। जगह-जगह एकत्र कूड़े को रिक्शा व हुक लोडर से बड़ी गाडिय़ों द्वारा स्थानांतरण केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। यहां से कूड़े को गाडिय़ों में पैक कर बंधवाड़ी कूड़ा निस्तारण प्लांट पर भेजा जाएगा।

सात महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका... 70 लाख से बना कूड़ा निस्तारण केंद्र, बीमारी फैलने का डर

 https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/kannauj-waste-disposal-center-made-by-70-lakh-rupees-could-not-be-started-after-seven-months-6934773.html

छिबरामऊ नगर क्षेत्र में 2011-12 की जनगणना के अनुसार करीब 65000 लोग की आबादी थी. वहीं वर्तमान में अब यहां की आबादी करीब एक लाख पहुंच गई है. प्रतिदिन नगर से करीब 1.50 मेट्रिक टन कचरा निकलता है. पहले इस कचरे को सड़क किनारे डलवाया जाता था. आसपास गंदगी होने पर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाने के लिए गांव कमालपुर में जगह चिन्हित की गई थी

 

10 गांवों में कूड़ा निस्तारण केंद्र को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज

 https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/ballia/in-10-villages-the-process-of-taking-off-the-garbage-disposal-center-on-the-ground-accelerated-ballia-news-vns6717450161

वित्तीय वर्ष 2022-23 में ओडीएफ प्लस की उत्कृष्ट श्रेणी (मॉडल) के ग्राम बनाए जाने के लिए जिले के 108 ग्राम पंचायतों के 164 गांवों को चिह्नित किया गया है। यह सभी गांव पांच हजार से अधिक आबादी वाले हैं। इसमें राजस्व गांव के साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत के सभी राजस्व ग्रामों को सम्मिलित किया गया है। इन गांवों में ओडीएफ स्थायित्व, ठोस व तरल अपशिष्ट, प्लास्टिक, गोबर इत्यादि के प्रबंधन हेतु निर्मित शौचालयों का समुचित उपयोग निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा व्यक्तिगत शौचालय निर्माण, सामुदायिक शौचालय निर्माण, प्रयोग व रख-रखाव, कूड़ा संग्रहण केंद्र, कूड़ा संग्रहण हेतु ई-रिक्शा वाहनों की खरीद आदि के इंतजाम किए जाएंगे। विकास खंड स्तरीय प्लास्टिक एकत्रीकरण एवं प्रबंधन केंद्र भी संचालित होगा। यह सभी कार्य बुलंदशहर जिले के शहजादपुर कनैनी गांव की तर्ज पर होगा। अधिकारियों की मानें तो पहले चरण में 10 गांवों को मॉडल ओडीएफ बनाने के लिए शासन की ओर से 693.73 लाख स्वीकृत है। अब इसके धरातल पर उतारने की प्रक्रिया चल रही है। प्रयास है कि प्रत्येक गांव में कम से कम 300 वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध हो। यह कार्य भी अंतिम दौर में है। 

 

 

Friday, August 25, 2023

India's Digital footprint is one of the fastest growing in the world.

More than 85% of India's Internet running on FOSS and a large 4G mobile base of India which recently crossed more than 598.11 million of which 96% of them access the digital world 

 

India's digital footprint has experienced rapid growth and expansion in recent years. The country's large population, increasing internet penetration, and growing smartphone usage have all contributed to this phenomenon. Here are some key factors that highlight India's fast-growing digital footprint:

  1. Massive Internet User Base: India has one of the largest populations in the world, and a significant portion of its people are now connected to the internet. The availability of affordable smartphones and data plans has played a crucial role in bringing millions of Indians online.

  2. Mobile-First Approach: India's digital growth has been largely mobile-driven. Many Indians access the internet primarily through their smartphones, which has led to the development of mobile apps and platforms tailored to meet this demand.

  3. E-Commerce Boom: The rise of e-commerce platforms in India has transformed the way people shop. Companies like Flipkart, Amazon India, and various local players have created a thriving online shopping culture, offering convenience and a wide range of products.

  4. Digital Payments: The adoption of digital payment methods, especially after the demonetization move in 2016, has been remarkable. Mobile wallets, UPI (Unified Payments Interface), and online payment gateways have made transactions more convenient and cashless.

  5. Social Media Influence: Indians are active users of social media platforms like Facebook, Instagram, Twitter, and YouTube. Social media has not only changed how people connect and communicate but also how businesses market their products and services.

  6. Online Content Consumption: The consumption of online content, including videos, news, entertainment, and educational content, has surged. Platforms like YouTube, Netflix, and Hotstar have gained substantial user bases in India.

  7. Digital Services and Solutions: Digital solutions in areas like education, healthcare, banking, and government services have made access to these services more efficient and accessible to a larger population.

  8. Start-up Ecosystem: India's digital growth has fostered a thriving start-up ecosystem. Numerous tech start-ups have emerged, focusing on various sectors including fintech, edtech, healthtech, and more.

  9. Government Initiatives: The Indian government's initiatives such as Digital India, which aims to digitally empower citizens and improve online infrastructure, have accelerated the growth of the digital landscape.

  10. Content Creation and Influencer Culture: The rise of digital platforms has allowed individuals to become content creators and influencers. This has created a vibrant ecosystem of online creators and influencers across different domains.

It's important to note that while India's digital footprint has grown rapidly, challenges such as digital literacy, internet accessibility in remote areas, and data privacy need to be addressed for more inclusive growth. Nevertheless, India's digital journey showcases its potential as a global digital leader and the impact that technology can have on improving various aspects of society and the economy.

 

शिक्षा व्यवस्था गरीबी से लड़ने का आधार।

 

 शिक्षा पर सबका अधिकार

 

शिक्षा व्यवस्था गरीबी से लड़ने का महत्वपूर्ण आधार है क्योंकि यह एक माध्यम हो सकता है जो गरीब और असहाय लोगों को समाज में समानता और समृद्धि की दिशा में मदद कर सकता है। निम्नलिखित कुछ कारण दिखाते हैं कि शिक्षा व्यवस्था कैसे गरीबी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपाय हो सकती है:

  1. ज्ञान और आत्म-सुरक्षा: शिक्षा से लोगों को ज्ञान और जागरूकता होती है, जो उन्हें अपने अधिकारों और विकास के लिए लड़ने की क्षमता प्रदान करती है। शिक्षित लोग समाज में अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं और वे आत्म-समर्पण और आत्म-स्थायिता से गरीबी को पार कर सकते हैं।

  2. आवास और उद्यमिता: शिक्षित व्यक्ति अधिक संभावना से अधिक आवास और रोजगार मिलने की संभावना बढ़ाते हैं। यह उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक माध्यम हो सकता है, जिससे वे गरीबी से बाहर निकल सकते हैं।

  3. बेहतर स्वास्थ्य और स्वछता: शिक्षा से लोगों को स्वास्थ्य और स्वछता के महत्व की जागरूकता होती है। यह उन्हें स्वच्छता, जल संरक्षण, और हाथों की सफाई जैसे आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है।

  4. सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा: शिक्षित लोग सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करने के काम आ सकते हैं। वे समाज में उच्चतम मानकों की प्रेरणा देने में मदद कर सकते हैं और गरीबी के खिलाफ लड़ाई में सहयोग कर सकते हैं।

  5. बेहतर सामाजिक और आर्थिक संरचना: शिक्षा से लोग समाज में बेहतर सामाजिक और आर्थिक संरचना की प्राथमिकता को समझते हैं। यह उन्हें सुरक्षित और स्थिर जीवन की दिशा में मदद कर सकता है।

इन कारणों से व्यक्तिगत और सामाजिक दृष्टिकोण से, शिक्षा व्यवस्था गरीबी से लड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और गरीबी को कम करने में मदद कर सकती है।

Culture built up via short video

In recent years, short-form video content has gained immense popularity in India and has played a significant role in shaping the country's culture. Various platforms, most notably TikTok (which was banned in India in 2020), Instagram Reels, YouTube Shorts, and more, have provided a space for creators to express themselves and connect with a wide audience. Here's how short videos have contributed to shaping Indian culture:

  1. Expression of Diversity: India is a land of diverse cultures, languages, and traditions. Short videos have given people from various regions and backgrounds a platform to showcase their unique cultural practices, rituals, and languages. This has led to a greater appreciation for the country's rich cultural heritage.

  2. Talent Showcase: Short video platforms have enabled individuals to display their talents in various fields such as dance, singing, comedy, mimicry, cooking, and more. This has given rise to a new wave of internet celebrities who have gained massive followings purely based on their talents.

  3. Social Commentary: Creators often use short videos to share their opinions on social issues, politics, and current events. They discuss everything from women's rights and mental health to environmental concerns, fostering conversations that might not have been as prominent in traditional media.

  4. Language Revival: India is home to numerous languages that might be less mainstream but are equally important. Short videos have provided a space for creators to promote and use these languages, aiding in language revival and preservation.

  5. Humor and Satire: Comedy has always been a big part of Indian entertainment, and short videos have taken this to the digital realm. Creators use humor and satire to comment on everyday situations, politics, and cultural nuances, making people laugh while also encouraging critical thinking.

  6. Fashion and Lifestyle Trends: Short videos have influenced fashion and lifestyle trends among the youth. Creators often share style tips, DIY hacks, and showcase the latest fashion trends, impacting how people present themselves.

  7. Regional Influences: Different regions in India have distinct traditions, clothing styles, cuisines, and more. Short video creators have been able to highlight these regional differences, promoting cross-cultural understanding and appreciation.

  8. Challenges and Trends: Short video challenges often go viral, encouraging a sense of participation and unity among users. Whether it's a dance challenge or a lip-sync trend, these challenges bring people together around a shared activity.

  9. Entrepreneurship and Brand Promotion: Many individuals have turned their short video platforms into successful businesses. Influencers and creators collaborate with brands to promote products and services, contributing to the growth of the digital marketing landscape in India.

  10. Youth Influence: Short videos have a massive following among the youth in India. This has allowed younger generations to shape trends, set norms, and influence mainstream culture to a greater extent than before.

 

 

 

 videos on themes including women empowerment, environment and sustainable development and other days of significance.

freedom struggle and the stories

celebrating its beautiful art, culture and storytelling

stories are of incredible women who have fought against the odds to achieve their dreams.

beautiful stories of inspirational Indians on various themes including Women Empowerment, Environment & Sustainability, 

videos featuring seven Women Change makers from across the country

demonstrated as ‘forces of nature’ 

The Seven Changemakers also include Ms. Poonam Nautiyal, a healthcare worker who walked miles across Bageshwar district in Uttarakhand to vaccinate everyone; Dr. Tessy Thomas, the first woman scientist to head a missile project in India; Ms. Tanvi Jagadish, India's first competitive woman stand-up paddleboarder and Ms. Aarohi Pandit, the world's youngest and first woman pilot to cross the Atlantic Ocean and the Pacific Ocean solo in a light-sport aircraft.



focus on highlighting and honouring the exemplary women, 

efforts of empowering women across the country and leading by example

Friday, August 18, 2023

2025 तक भारत का e-commerce सेक्टर 13.87लाख करोड़ का हो जाएगा



2025 तक भारत का e-commerce सेक्टर 13.87लाख करोड़ का हो जाएगा

भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र में वृद्धि हो रही है और यह अपने अनुमानित रूप से अगले सालों में भी आगे बढ़ने की संभावना है।भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास किया है, खासकर डिजिटलीकृत पेमेंट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स, ऑनलाइन शॉपिंग, और ई-वाणिज्यिक मॉडेल्स के संवर्धन के साथ। इसमें सबसे प्रमुख खिलाड़ी जैसे कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और पेमेंट गेटवे कंपनियाँ शामिल हैं।

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। यह सेक्टर नौकरियों की नई समायोजना और व्यापारिक गतिविधियों में भी वृद्धि की संभावना प्रदान कर सकता है।
 


भारत का e-commerce सेक्टर एक तेजी से बढ़ता हुआ और व्यापक सेक्टर है, और यह वाणिज्यिक गतिविधियों को ऑनलाइन माध्यम के माध्यम से सुविधाजनक बनाने और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका विस्तार तथा विकास भारत की डिजिटल यातायात, वित्तीय सेवाएं, और वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करता है।

कुछ मुख्य बिंदुः

  1. बड़े खिलाड़ी: भारत में बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे कि Amazon, Flipkart, और Walmart-owned Flipkart, सबसे प्रमुख बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ी हैं। ये कंपनियाँ विभिन्न वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स, और अन्य सामानों को ऑनलाइन बेचती हैं।

  2. स्थानीय ई-कॉमर्स: स्थानीय ई-कॉमर्स कंपनियाँ, जैसे कि फ्लिपकार्ट, मी, और न्यूरॉट, विशेष रूप से भारतीय बाजार के लिए समर्थन प्रदान करती हैं।

  3. वित्तीय सेवाएँ: डिजिटल वित्त सेक्टर ने भी ई-कॉमर्स को सहयोग प्रदान किया है, जैसे कि डिजिटल भुगतान और ई-वॉलेट सेवाएँ।

  4. मोबाइल शॉपिंग: मोबाइल ऐप्स के माध्यम से ई-कॉमर्स का उपयोग करने की लोकप्रियता में वृद्धि हुई है, और विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियाँ उपयोगकर्ताओं को ऐप्स के माध्यम से जोड़ने के लिए कई उपाय अपना रही हैं।

  5. कठिनाइयाँ और मुकाबला: भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जैसे कि प्रसव और विनिर्माण की कठिनाइयाँ, लॉजिस्टिक्स के विकास, और उपभोक्ता संरक्षण।

     

    इस सेक्टर में कई बड़ी और छोटी कंपनियाँ हैं जो विभिन्न वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्राहक इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्राहक उपयोगिता सामग्री, फूड, अन्य सामान और सेवाएँ आदि के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करती हैं।

    इस सेक्टर की गति मुख्य रूप से विश्वास की जा रही भारतीय जनता के वाणिज्यिक विपणि के परिवर्तन और डिजिटल युग के साथ जुड़ी हुई है। स्मार्टफोन और इंटरनेट की व्यापक पहुंच के कारण, लोग अब अपनी जरूरतों के लिए ऑनलाइन खरीदारी करने में रुचाना बदल रहे हैं।

    भारतीय सरकार ने इस सेक्टर की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए नई नीतियों और नियमों को लागू किया है, जो इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सहायता प्रदान कर रही है। इसके परिणामस्वरूप, नए ई-कॉमर्स कंपनियाँ उत्थान में जुट रही हैं और प्रचलित कंपनियाँ अपनी सेवाओं की विस्तार क्षमता बढ़ा रही हैं।

    ई-कॉमर्स सेक्टर में विकसित हो रही कुछ प्रमुख क्षेत्र:

    1. ऑनलाइन वस्त्र और फैशन: यह क्षेत्र भारत में सबसे बड़ा है, जहाँ लोग ऑनलाइन कपड़े और फैशन सामग्री खरीदते हैं।

    2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन, लैपटॉप, होम एप्लायंसेस, गेमिंग कंसोल्स, टेलीविजन्स, आदि की बड़ी मात्रा में खरीदारी ऑनलाइन हो रही है।

    3. ग्राहक उपयोगिता सामग्री: जैसे कि मोबाइल एक्सेसरीज, किचन उपकरण, आदि की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है।

    4. ऑनलाइन खाद्य सेवाएँ: खाने की डिलीवरी सेवाएँ, ग्रॉसरी सामग्री, रेस्टोरेंट और फ़ास्ट फ़ूड सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

    5. अन्य सेवाएँ: जैसे कि ट्रैवल और हॉटल बुकिंग, टिकट बुकिंग, अध्ययन सामग्री, स्वास्थ्य और व्यायाम सामग्री, आदि।