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Sunday, November 22, 2020
फोन काल से पहले के विज्ञापन कैसे जानलेवा है।
Sunday, November 15, 2020
नए रोजगार सृजन योजना - 2 साल तक EPF का पैसा भारत सरकार भरेगी।
दुर्गा शक्ति aap महिलाए मोबाइल में इस app को डाउनलोड कर ले सकती है पुलिस से मदद। हरयाणा पुलिस का उत्तम प्रयास।
Thursday, October 22, 2020
Penalty on Employer on non payment of Gratuity or Harassments of employee gratuity settlement.- यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें
उपदान संदाय अधिनियम 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972)
Gratuity : नौकरी पेशा व्यक्तियों को रिटायरमेंट या बीमारी के कारण नौकरी नहीं कर पाने के कारण एक निश्चित धनराशि दी जाती है। यह धनराशि उस नियोजक द्वारा दी जाती है जिस नियोजक के पास में व्यक्ति नौकरी कर रहा था।
Penalty on Employer on non Payment of Gratuity or Harassments of employee for settlement of Gratuity
किसी कर्मचारी को उपदान किए जाने के संबंध में कोई नुकसान पहुंचाया जाए तो ऐसी परिस्थिति में 1 वर्ष तक का कारावास रखा गया है। ऐसा कारावास नियोजक यानी संस्था के कर्ताधर्ता को दिया जाएगा।
Time for Gratuity Settlement by Employer - 30 Days
अधिनियम के अंतर्गत उपदान का संदाय करने हेतु नियोजक को 30 दिन का समय दिया गया है। कर्मचारी जिस दिन से उपदान के संदाय हेतु आवेदन जमा करता है उससे 30 दिन की अवधि के भीतर नियोजक को उपदान का संदाय कर देना चाहिए। यदि वह उपदान का संदाय इस समय अवधि के भीतर नहीं करता है। उसके बाद कुछ समय और लेता है तो ऐसी परिस्थिति में नियोजक को कर्मचारी को एक निश्चित दर से ब्याज देना होगा।
Employee क्या कर सकता हैं यदि Employer Gratuity settlement करने में दिक़्क़्क़त करे
यदि कोई कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करें
Gratuity की वसूली कैसे होती है।
यदि कर्मचारी द्वारा नियोजक को उपदान के संदाय हेतु आवेदन किया जाता है और नियोजक कर्मचारी को उपदान का संदाय नहीं करता है। ऐसी परिस्थिति में नियोजक की शिकायत यदि नियंत्रक अधिकारी को की जाती है तो वह प्राधिकारी जिले के कलेक्टर को यह प्रमाण पत्र जारी करेगा कि वह भू राजस्व की वसूली की तरह ग्रेज्युटी की रकम को वसूल करें तथा वसूल करके उस रकम को कर्मचारी को प्रदान करे।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 (Social Security 2019) चैप्टर 5 :
सामाजिक सुरक्षा संहिता में कहा गया है कि कर्मचारी के हर पूर्ण साल की सर्विस पर ग्रैच्युटी 15 दिन की सैलरी पर आधारित होती है. हर पूरे साल या 6 महीने से ज्यादा के समय के लिए कर्मचारी को ग्रेच्युटी 15 दिन की सैलरी की दर पर या केंद्र सरकार के किसी नोटिफिकेशन में तय किए गए दिनों के आधार पर मिलेगी.
ग्रेच्युटी कब मिलती है? : 1. सेवानिवृत्ति होने पर 2. दुर्घटना या बीमारी की वजह से मौत या अपंगता के कारण 3. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर 4. छंटनी होने पर 5. इस्तीफ़ा देने पर 6. नौकरी से निकाल दिया जाने पर।
ग्रेच्युटी लेने के लिए कौन सा फॉर्म भरना होता है? : कंपनी को ज्वाइन करते वक़्त कर्मचारी को फॉर्म “F” भर कर उसमे अपने घर के किसी भी सदस्य को नॉमिनी बनाना होता है। यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी है कि यदि कंपनी घाटे में चल रही हो तो भी उसे ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करना होगा।
Calculation of Gratuity
15 X {(Basic Salary+ DA+ Sales Commission) X duration of work (in years) } / 26
15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) भाग 26 यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन है।
Maximum Amount of Gratuity
2018 में के संशोधन के बाद इस सीमा को बढ़ाकर ₹2000000 कर दिया गया है अब मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक ₹2000000 तक ग्रेच्युटी की रकम हो सकती है।
कौन सी कंपनी Gratuity देने के लिए वचनबद्ध होनी चाहिए।
नियोजक जिनमें कर्मचारियों की संख्या 10 से अधिक है, वह इस अधिनियम के अधीन नियोजक कहलाएंगे।
10 कर्मचारियों से अधिक काम करने वाली संस्थाएं इस अधिनियम के अंतर्गत शासित होगी तथा उन्हें अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की धनराशि देना होगी।
कारखाने, खदान, बागान, दुकान और वह सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्था जो केंद्रीय राज्य सरकारों तथा लोकल अथॉरिटी आदि।
ग्रेच्युटी पर कितना कर लगता है? : निजी कर्मचारियों को जब ग्रेच्युटी उनके नौकरी करते समय (रिटायरमेंट के पहले तक) मिलती है, तो उनकी ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है क्योंकि यह उनके वेतन के अंतर्गत आता है लेकिन सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी उनकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु या पेंशन के तौर मिलती है और उस पर टैक्स भी नहीं लगता है। श्रम मंत्रालय के नये नियमों के अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से 20 लाख रुपए तक के कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र होंगे इससे पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी।
1961 की सेवा नियमावली में ग्रेच्युटी रोकने का कोई उपबन्ध नहीं है.
Thursday, October 15, 2020
National Cyber Crime Reporting Portal
Is messaging someone with fake ID is a cybercrime? Essential requirements to avoid cybercrime in business Report.
Complaints related to cyber crime or online financial fraud at National Cyber Crime Reporting Portal https://www.cybercrime.gov.in of MHA - Ministry of Home Affairs
नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन
इस मिशन में नागरिकों का एक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें उनका हेल्थ रिकार्ड यानी उनकी सेहत और बीमारी से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें देखा जा सके। इस तरह विकसित होने वाले डिजिटल इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) की मदद से आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इसमें भारतीय नागरिकों, स्वास्थ्य पेशेवरों, सार्वजनिक अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के संस्थानों के बीच सेहत की जांच, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाला एक पुख्ता नेटवर्क बन सकेगा। इससे लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता आ सकती है और बीमारियों के त्वरित एवं सटीक इलाज की व्यवस्था बन सकती है।
पुरानी बीमारियों के इलाज का रिकार्ड मौजूद नहीं होने पर कई बार गलत इलाज की चपेट में भी आ जाते हैं। ऐसे में मर्ज से बड़ी समस्या उसके निदान की प्रक्रिया हो जाती है। यह तथ्य भी कई बार सामने आ चुके हैं कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बीमारियों के इलाज में ही गरीब हुआ जा रहा है, क्योंकि अक्सर उन्हें यही नहीं पता चलता है कि आखिर उन्हें हुआ क्या है? किस बीमारी का क्या इलाज है और कहां इलाज हो सकता है? इसकी जानकारी नहीं होने पर मरीज गलत हाथों में पड़ जाते हैं। ऐसे में सही इलाज की पहली सीढ़ी मरीज और उसके तीमारदार को इसकी जानकारी मिलना है कि आखिर बीमारी क्या है या मरीज को इससे पहले क्या मर्ज था और उसका क्या इलाज था?
हमारे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत ही लचर हालत में हैं। यहां सरकारी चिकित्सा सेवाओं में अक्सर लापरवाही, संसाधनों का दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार देखा जाता है। निजी क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं के मानक तय नहीं हैं। निजी अस्पताल जांच, टेस्ट, इलाज और दवाओं आदि के नाम पर अनाप-शनाप रकम वसूलते हैं। इसलिए डिजिटल हेल्थ कार्ड और नेशनल डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से तमाम अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद की जा रही है,
India's Digital footprint is one of the fastest growing in the world.Digital India 2014 to 2022
India's Digital footprint is one of the fastest growing in the world.
Revolutionizing Digital India
Digital India- Reducing Corruption through Technology
Indian Railway-Contributing 8.2% of GDP- सैटेलाइट से होगी ट्रेनों की ट्रैकिंग, टिकटिंग के लिए क्यूआर कोड सिस्टम
आजादी के अमृत महोत्सव के 75 सप्ताह में, 75 वंदे भारत ट्रेनें देश के हर कोने को जोड़ेंगी।- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी
Make In India -2014- Make in India’ & ‘Aatmanirbharta’ in defence
Make in India’ & ‘Aatmanirbharta’ in defence
mantras of self-sufficiency and indigenizationAll modernisation requirements of the three Services & Indian Coast Guard to be indigenously sourced irrespective of nature of procurement
Requirement of Integrity Pact Bank Guarantee dispensed with to reduce financial burden on domestic industry
Integrity Pact Bank Guarantee (IPBG)
Earnest Money Deposit (EMD)
Defence Acquisition Procedure (DAP)
Defence Acquisition Council (DAC)
iDEX framework
शिक्षकों को सम्मानजनक वेतनमान एवं सेवा शर्तों पर नियुक्ति।
Tuesday, October 13, 2020
भारत की बुलंदी
लिखूं आज या कलम तोड़ दूं दरिंदों को क्या मैं यूं ही छोड़ दूं.
property ID -Gurgaon रजिस्ट्री के लिए प्रॉपर्टी ID जरूरी।समय से टैक्स दे जनता दे देश के लिए योगदान किया। क्या सरकार ने अपना काम ईमानदारी से किया.
HARYANA PROPERTY ID SCAM
समय से टैक्स दे जनता दे देश के लिए योगदान किया। क्या सरकार ने अपना काम ईमानदारी से किया PMOPG/E/2023/0071474
Subject: Current Software and system for Property ID is not capable, Promoting Corruption and agent ship in system, Bugs and error in system also showing incapability of correct vendor selection in process. Public is honest and want to pay taxes timely but System incapability promoting corruption. Raising dispute option also not working properly system crash in between and showing error, look like planned Software failure to promote corruption.
Negligence in new property ID creation, lots of mistakes, no information is correct.
Failure of digital India – Aadhar link with PAN , PAN Aadhar Link with Electricity Bill, Family ID, Property ID so why government agencies fail during copy paste of previous data, Who they are trying to give benefit from this corruption practice.
Corruption case:
I would like to bring in your notice no information is correct in new property ID; it is full of negligence by party who got contract to create or update new property ID.
Name, Plot size, mobile, email everything wrong it is look like they have filled information at office of RWA and not taken any consent from Flat owner regarding correctness of information.
Relief Sought for:
1. Immediate correction of information in new property ID so that we can pay our property correct tax.
2. 10% of turn over Penalty on vendor and penalty on responsible officials for wrong and unvalidated insufficient information on new property id Portal.
3. Upload and availability of all property tax payment done with old property id in portal to download by owner to avoid any kind of corruption in this process or promotion of agent ship in this process.
मनुष्य के मरने के बाद भी ये देखा जाता है कि उसकी जाति न मर जाए। तभी हर जाति के अलग शमशान घाट....
मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह देखा जाता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी जाति का असर बना रहता है और उसका अंतिम संस्कार उसकी जाति के अनुसार ही होता है। यह एक प्राचीन और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो भारतीय समाज में बनी हुई है।
हर जाति के लिए अलग-अलग शमशान घाट होता है, जो उस जाति की परंपरागत धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। यह एक रूपरेखा है जो मनुष्य की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसे आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।
भारतीय समाज में, जातिवाद और जाति से जुड़े विवाद चिरपिंड हैं, और इसका असर मौत के बाद भी बना रहता है। मृत्यु के पश्चात मानव शरीर को जलाकर उसकी आत्मा को मोक्ष की दिशा में भटकने के लिए इस परंपरागत प्रथा का अनुसरण किया जाता है। इसमें जाति के अनुसार विभिन्न क्रियाएँ होती हैं और शमशान घाट का चयन भी उसी तरह के धार्मिक और सामाजिक आधारों पर होता है।
विभिन्न शमशान घाटों का अस्तित्व मनुष्य के जीवन में धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां मृत्यु होने पर आत्मा को शांति प्रदान करने का कार्य होता है और यह श्राद्ध, पिंडदान, और अन्य धार्मिक आचरणों के माध्यम से किया जाता है।
हर जाति का अपना शमशान घाट एक विशेष भौगोलिक स्थान पर स्थित होता है और यहां जाति के अनुसार मृत्यु हुई व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रक्रिया में विभिन्न सम्प्रदायों और जातियों के बीच छिपे विवादों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह भारतीय समाज के एक अभिन्न हिस्से का हिस्सा है और यह उसकी रिच धारों का परिचय कराता है।
इस प्रकार, मनुष्य के मरने के बाद भी उसकी जाति का महत्वपूर्ण स्थान है और यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है जो समृद्धि और संस्कृति को बनाए रखने में मदद करता है। यह एक दृष्टिकोण है जो भारतीय समाज के गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को समझने में मदद करता है और इसे एक अद्भुत और विविध समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का एक माध्यम प्रदान करता है।

