Wednesday, October 25, 2017

Universal Basic Income - Senior citizen above 58 Years should get minimum pension of Rs 2000/- per month irrespective of their income

Universal Basic Income

Indian government need to come with the solution for social and Nobel cause 

Senior citizen above  58 Years should get minimum pension of Rs 2000/- per month irrespective of their income 



Aadhar linked DBT Direct bank transfer methodology need to be used.


Decision on Universal Basic Income depends on social, political preferences in India


References
https://navbharattimes.indiatimes.com/business/budget/budget-news/know-all-about-universal-basic-income-is-it-viable-for-indian-economy/articleshow/67734376.cms

2016-17 के आर्थिक सर्वे में मोदी सरकार ने यूबीआई का जिक्र किया। तब आर्थिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक इनकम पर 40 से अधिक पेजों का एक खाका तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सल बेसिक इनकम भारत में व्याप्त गरीबी का एक संभव समाधान हो सकता है।


लंदन यूनिवर्सिटी के प्रफेसर गाय स्टैंडिंग ने गरीबी हटाने के लिए अमीर-गरीब, सबको निश्चित अंतराल पर तयशुदा रकम देने का विचार पेश किया। 



Requirement

इस स्कीम का लाभ लेने के लिए किसी भी व्यक्ति को अपनी कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति अथवा बेरोजगारी का सबूत नहीं देना पड़े। 


यूबीआई के दायरे में देश की पूरी आबादी को नहीं लाया जा सकता है, इसलिए इसके वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती है।

Universal Basic Income में use  की जाने वाली संभावनाए:

पहला- आर्थिक दृष्टि से निचले पायदान की 75 प्रतिशत आबादी को यूबीआई के दायरे में लाया जाए। 

दूसरा- सिर्फ महिलाओं को इसके दायरे में लाया जाए क्योंकि महिलाओं को रोजगार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं वित्तीय समावेशन के मोर्चों पर हमेशा पिछड़ेपन का सामना करना पड़ता है। इससे आबादी का आधा हिस्सा यूबीआई के दायरे में आएगा। सर्वे में कहा गया था कि महिलाओं के हाथ में पैसे गए तो उनके दुरुपयोग की आशंका भी नहीं के बराबर रहेगी। 

तीसरा- शुरुआत में यूबीआई स्कीम का लाभ विधवाओं, गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ वृद्ध एवं बीमार आबादी को दिया जा सकता है।

Benifit

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने लिखा था, 

यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी योजना हमें सामाजिक न्याय दिलाने के साथ मजबूत अर्थव्यवस्था बनने में मददगार साबित हो सकती है।

यूबीआई न सिर्फ जीवन स्तर बेहतर कर सकता है। 

मौजूदा स्कीमों का प्रशासनिक स्तर भी बेहतर कर सकता है।


सरकार  का पक्ष : 

स्कीम को लागू करने पर जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा

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