Thursday, October 12, 2017

Make In India- Every shopping mall 1floor only for made in India items only

Online vs small shop सेल्स मेन तो मास्टर होता ही है फिजिकल इंटरेक्शन का कोई रिप्लेसमेंट नही
बर्तन का व्यापारी परिवार के लिये जूते ऑनलाइन खरीद रहा है,
जूते का व्यापारी परिवार के लिये मोबाइल ऑनलाइन खरीद रहा है,
मोबाइल का व्यापारी परिवार के लिए कपडे ऑनलाइन खरीद रहा है,
कपड़े का व्यापारी परिवार के लिये घड़ी ऑनलाइन ख़रीद रहा है,
घडी का व्यापारी घर के लिये अनेकों इलेक्ट्रॉनिक सामान ऑनलाइन ख़रीद रहा है,
इलेक्ट्रानिक का व्यापारी बच्चों के लिए खिलोने ऑनलाइन ख़रीद रहा है,
खिलोने का व्यापारी घर के लिये बर्तन ऑनलाइन खरीद रहा है,
और ये सब रोज सुबह अपनी-अपनी दुकान खोलकर अगरबत्ती लगाकर भगवान से  प्रार्थना कर रहे है कि आज धंदा अच्छा हो जाये, हे भगवान इस बार दिवाली सीज़न पर अच्छी बिक्री हो जाये। कहाँ से होगी बिक्री ?
खरीददार आसमान से नहीं आते हमही एक दूसरे का सामान खरीदकर बाजार को चलाते हैं, क्योकिं हर व्यक्ति कुछ न कुछ बेंच रहा है और हर व्यक्ति खरीददार भी है।
ऑनलाइन खरीदी करके आप भले 50-100 रु की एक बार बचत कर लें लेकिन इसके नुकसान बहुत है क्योंकि ऑनलाइन खरीदी से सारा मुनाफा बड़ी बड़ी कंपनियों को जाता है जिनमे काफी विदेशी कंपनियां भी हैं।
ये कम्पनियाँ मुठ्ठीभर कर्मचारियों के बल पर बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेती हैं। ये कम्पनियां ना सर्फ बेरोजगारी पैदा कर रही है बल्कि इनके द्वारा कमाये गये मुनाफे का बहुत छोटा हिस्सा ही पुनः बाजार में आता है।
यदि आप सोचते हैं कि मैं तो कोई दुकानदार नहीं हूं और ना ही व्यापारी, मैं तो नौकरी करता हूँ ऑनलाइन खरीदी से मुझे सिर्फ फायदा है नुकसान कोई नहीं तो आप सरासर गलत हैं क्योकि जब समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती है या देश का पैसा देश के बाहर जाता है तो देश के हर व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसका नुकसान उठाना पड़ता है चाहे वह अमीर हो या गरीब, व्यापारी हो या नौकरी करने वाला, दुकानदार हो या किसान हर कोई प्रभावित होता है।
अभी भी समय है अपने आपको, अपने परिवार को, बाकी दुकानदारों को ऑनलाइन और बड़े बड़े शॉपिंग मॉल से ख़रीद करने से रोकें और उन्हें समझाएं नहीं तो आगे और भी मुश्किल परिस्थिति होनी वाली है।
उपर से देश की अर्थव्यवस्था कुछ इस तरह टूटी हुई है कि फ्लिपकार्ट और अमेज़न दोनो मिल के 4 दिन में सिर्फ 6670 करोड़ का माल बेच पाते हैं....
साभार स्वदेशी क्रांति
अभी अभी मैने कही seminar में सुना था कि लोग better customer experience के लिए ऑनलाइन खरीदते है।भारत सरकार भी ये policy बनाये की हर मॉल में 1 floor सिर्फ मेड इन india   समान के लिए हो जहाँ छोटे दुकानदार अपना सामान  बेच सके। बाकी सेल्स मेन तो मास्टर होता ही है फिजिकल इंटरेक्शन का कोई रिप्लेसमेंट नही।
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